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  1. मुहूर्त ट्रेडिंग पर म्यूचुअल फंड में लगाना है पैसा? जान लें SIP और Lumpsum का फर्क

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मुहूर्त ट्रेडिंग पर म्यूचुअल फंड में लगाना है पैसा? जान लें SIP और Lumpsum का फर्क

Upstox

4 min read | अपडेटेड November 04, 2026, 14:05 IST

सारांश

दिवाली मुहूर्त ट्रेडिंग के पावन दिन म्यूचुअल फंड में निवेश करना शुभ माना जाता है। लेकिन पैसे लगाने से पहले SIP और लम्पसम के बीच का अंतर समझना जरूरी है।

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मुहूर्त ट्रेडिंग पर म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले एसआईपी और लम्पसम के अंतर को समझना जरूरी है।

दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग को म्यूचुअल फंड में निवेश की शुरुआत के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस खास मौके पर शेयर ही नहीं, बल्कि म्यूचुअल फंड्स में भी बड़ी संख्या में लोग निवेश करते हैं। लेकिन फंड्स में पैसा लगाते समय अक्सर लोग उलझ जाते हैं कि मुहूर्त ट्रेडिंग पर SIP शुरू करें या एकमुश्त यानी लम्पसम रकम लगाना ज्यादा ठीक रहेगा। दोनों ही निवेश के शानदार रास्ते हैं, लेकिन इनके काम करने का तरीका और जोखिम एकदम अलग है। अगर आप भी इस दिवाली अपने वित्तीय फ्यूचर को मजबूत बनाने के लिए कदम रखने जा रहे हैं।

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क्या है SIP?

SIP यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान म्यूचुअल फंड में नियमित रूप से पैसे लगाने का एक अनुशासित तरीका है। इसके तहत निवेशक हर महीने एक निश्चित रकम अपनी पसंद की स्कीम में लगाते हैं। इसमें 500 रुपये जैसी छोटी रकम से भी शुरुआत हो सकती है। एसआईपी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बाजार के उतार-चढ़ाव की चिंता खत्म कर देती है। जब बाजार गिरता है तो निवेशक को कम कीमत में अधिक यूनिट्स मिलती हैं और जब बाजार ऊपर चढ़ता है तो कम यूनिट्स मिलती हैं। इसे रुपए कॉस्ट एवरेजिंग कहा जाता है। मुहूर्त ट्रेडिंग पर नई एसआईपी शुरू करने का मतलब है कि आप पूरे साल के लिए निवेश का संकल्प ले रहे हैं।

क्या है लम्पसम और किस स्थिति में है उपयोगी?

लम्पसम निवेश का मतलब होता है किसी म्यूचुअल फंड स्कीम में एक ही बार में पूरी रकम लगा देना। अगर दिवाली पर बोनस मिला है या कोई अतिरिक्त बचत पड़ी है जिसे लंबे समय तक बाजार में रखना चाहते हैं, तो लम्पसम अच्छा विकल्प है। इसमें पूरा पैसा एक निश्चित एनएवी पर लग जाता है। लम्पसम का सबसे बड़ा फायदा तब मिलता है जब बाजार निचले स्तर पर हो या करेक्शन के बाद उसमें तेज रिकवरी की उम्मीद हो। हालांकि इसमें जोखिम एसआईपी से थोड़ा अधिक होता है, क्योंकि अगर पैसा लगाते ही बाजार में बड़ी गिरावट आ जाए, तो आपके पोर्टफोलियो की वैल्यू तेजी से नीचे आ सकती है।

दोनों में क्या है बड़ा फर्क

SIP और लम्पसम के बीच का सबसे बड़ा फर्क पैसे लगाने के तरीके और जोखिम प्रबंधन में है। एसआईपी छोटे निवेशकों और नौकरीपेशा लोगों के लिए बेहतर मानी जाती है, जबकि लम्पसम उन लोगों के लिए ठीक है जिनके पास एकमुश्त बड़ी पूंजी होती है। एसआईपी में बाजार को टाइम करने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि अलग-अलग स्तरों पर खरीदारी से लागत अपने आप औसत हो जाती है। इसके विपरीत लम्पसम में मार्केट का सही स्तर देखना जरूरी होता है। रिटर्न के लिहाज से लगातार तेजी वाले बाजार में लम्पसम ज्यादा मुनाफा दे सकता है, लेकिन उतार-चढ़ाव वाले बाजार में SIP हमेशा सुरक्षित साबित होती है।

मुहूर्त ट्रेडिंग पर निवेश की शुरुआत करते समय अपनी वित्तीय स्थिति का ध्यान रखना चाहिए। अगर दिवाली पर कोई अतिरिक्त बचत आई है और आप उसे पांच से सात साल तक नहीं निकालना चाहते, तो लम्पसम के जरिए निवेश कर सकते हैं। लेकिन अगर आप नियमित आय से हर महीने थोड़ा-थोड़ा बचाकर बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो मुहूर्त ट्रेडिंग पर नई SIP शुरू करना समझदारी भरा फैसला होगा। कई स्मार्ट निवेशक मुहूर्त के दिन एक छोटी लम्पसम रकम डालकर स्कीम शुरू करते हैं और साथ ही उसमें मासिक SIP भी एक्टिवेट कर देते हैं। इससे परंपरा का सम्मान भी होता है और निवेश का अनुशासन भी बना रहता है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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