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4 min read | अपडेटेड October 28, 2026, 13:43 IST
सारांश
मार्केट लिंक्ड डिबेंचर यानी MLD एक खास निवेश विकल्प है, जो बॉन्ड की सुरक्षा और शेयर बाजार के रिटर्न का फायदा एक साथ देता है। इसमें मिलने वाला रिटर्न तय ब्याज के बजाय निफ्टी, सोने या किसी इंडेक्स के प्रदर्शन पर आधारित होता है।

मार्केट लिंक्ड डिबेंचर (MLD) निवेशकों को पूंजी सुरक्षा के साथ बाजार आधारित रिटर्न पाने का मौका देता है।
आज के समय में हर निवेशक ऐसा विकल्प तलाशता है जहां उसका मूल पैसा भी सुरक्षित रहे और उसे फिक्स्ड डिपॉजिट से बेहतर रिटर्न भी मिल सके। ऐसे निवेशकों के बीच मार्केट लिंक्ड डिबेंचर यानी MLD काफी तेजी से पसंद किया जा रहा है। MLD वास्तव में एक खास तरह का डेट इंस्ट्रूमेंट या बॉन्ड होता है, लेकिन इसका रिटर्न किसी तय ब्याज दर पर नहीं बल्कि शेयर बाजार, सोने या सरकारी बॉन्ड यील्ड जैसे किसी अंडरलाइंग इंडेक्स के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। यह उन निवेशकों के लिए एक आकर्षक जरिया है जो सीधे शेयर बाजार में पैसा लगाकर बड़ा जोखिम नहीं उठाना चाहते, लेकिन बाजार की तेजी का फायदा जरूर उठाना चाहते हैं।
सामान्य बॉन्ड या डिबेंचर में निवेशक को हर साल या तय समय पर एक निश्चित ब्याज दर मिलती है, जिसे कूपन रेट कहा जाता है। लेकिन मार्केट लिंक्ड डिबेंचर में पहले से कोई निश्चित ब्याज तय नहीं होता है। इसमें जारी करने वाली कंपनी यह तय करती है कि आपका रिटर्न किसी खास इंडेक्स, जैसे कि निफ्टी 50, सेंसेक्स या 10 साल की सरकारी सिक्योरिटी के उतार-चढ़ाव से जुड़ेगा। अगर तय समय सीमा में वह इंडेक्स बढ़ता है, तो आपको अधिक रिटर्न मिलता है। वहीं अगर इंडेक्स में गिरावट आती है, तो भी आमतौर पर आपकी मूल पूंजी सुरक्षित रहती है और आपको नुकसान नहीं होता है।
MLD में रिटर्न मिलने का तरीका इसके खास स्ट्रक्चर पर निर्भर करता है। ज्यादातर MLD प्रिंसिपल प्रोटेक्टेड यानी मूलधन की सुरक्षा देने वाले होते हैं। इसका मतलब यह है कि कंपनी आपके लगाए गए पैसे का एक बड़ा हिस्सा सुरक्षित सरकारी बॉन्ड्स में लगाती है, जिससे मैच्योरिटी तक आपकी मूल रकम वापस मिलने की गारंटी तैयार हो जाती है। बचा हुआ छोटा हिस्सा डेरिवेटिव्स या कॉल ऑप्शंस में लगाया जाता है। जब बाजार ऊपर चढ़ता है, तो इन ऑप्शंस से भारी मुनाफा होता है और वही मुनाफा निवेशकों को ऊंचे रिटर्न के रूप में दिया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि शर्त यह है कि 3 साल में निफ्टी 20% बढ़ा, तो आपको अच्छा रिटर्न मिलेगा। अगर निफ्टी गिर भी गया, तब भी आपको अपनी मूल रकम वापस मिल जाती है।
मार्केट लिंक्ड डिबेंचर आमतौर पर हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स यानी बड़े निवेशकों के बीच ज्यादा पसंद किए जाते हैं, क्योंकि इनमें न्यूनतम निवेश की सीमा अक्सर थोड़ी अधिक होती है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो सतर्क रहकर निवेश करना पसंद करते हैं, लेकिन बैंक एफडी के सामान्य रिटर्न से संतुष्ट नहीं हैं। इसके जरिए वे शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से अपनी पूंजी को सुरक्षित रखते हुए बेहतर रिटर्न कमाने का मौका पा सकते हैं। यह पोर्टफोलियो में स्थिरता लाने का एक मजबूत माध्यम बनता है।
MLD में पैसा लगाने से पहले इसकी क्रेडिट रेटिंग और जारी करने वाली कंपनी की साख जांचना बहुत जरूरी है। भले ही यह मूल पूंजी की सुरक्षा की बात करता हो, लेकिन यदि कंपनी डिफॉल्ट कर जाए तो क्रेडिट जोखिम बना रहता है। इसलिए हमेशा मजबूत रेटिंग वाली कंपनियों के MLD ही चुनने चाहिए। इसके अलावा इनमें तय समय का लॉक-इन होता है, यानी आप बीच में आसानी से पैसा नहीं निकाल सकते। टैक्स नियमों के अनुसार भी अब MLD से होने वाले लाभ पर निवेशक के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इसलिए अपनी समझ और जरूरत के हिसाब से ही इसमें निवेश का फैसला लेना चाहिए।
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