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Bajaj Auto Buyback: 5633 करोड़ रुपये के शेयर वापस खरीदने की तैयारी, 24 जून है रिकॉर्ड डेट

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड June 22, 2026, 14:43 IST

सारांश

Bajaj Auto Buyback: इस बायबैक के लिए 24 जून 2026 रिकॉर्ड डेट तय की गई है। रिकॉर्ड डेट वह तारीख होती है जिसके आधार पर तय किया जाता है कि कौन-से शेयरधारक बायबैक में हिस्सा लेने के पात्र होंगे। जिन निवेशकों के डीमैट खाते में रिकॉर्ड डेट तक बजाज ऑटो के शेयर होंगे, वे इस प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे।

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Bajaj Auto

Bajaj Auto: निवेशकों को यह समझना चाहिए कि बायबैक का मतलब सभी शेयरों पर गारंटीड मुनाफा नहीं है।

Bajaj Auto Buyback: बजाज ऑटो का शेयर बायबैक पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। कंपनी ने 5633 करोड़ रुपये के बायबैक को मंजूरी दी है, जिसके तहत वह 46.94 लाख शेयर 12,000 रुपये प्रति शेयर की कीमत पर वापस खरीदेगी। यह कीमत बाजार भाव से करीब 19 फीसदी अधिक है। इस बायबैक के लिए 24 जून 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की गई है, यानी इसी दिन तक जिन निवेशकों के पास शेयर होंगे, वे बायबैक में हिस्सा लेने के पात्र होंगे।
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शेयर बायबैक का आकार कंपनी की कुल इक्विटी का सिर्फ 1.68 फीसदी है। रिटेल निवेशकों के लिए लगभग 7.04 लाख शेयर आरक्षित हैं, जबकि रिटेल कैटेगरी में कुल शेयरधारकों के पास करीब 1.57 करोड़ शेयर हैं। इसका मतलब है कि सभी निवेशकों के शेयर पूरी तरह स्वीकार होने की संभावना नहीं है। अनुमान है कि सिर्फ 5 से 12 फीसदी शेयर ही स्वीकार किए जा सकते हैं।

24 जून 2026 है रिकॉर्ड डेट

इस बायबैक के लिए 24 जून 2026 रिकॉर्ड डेट तय की गई है। रिकॉर्ड डेट वह तारीख होती है जिसके आधार पर तय किया जाता है कि कौन-से शेयरधारक बायबैक में हिस्सा लेने के पात्र होंगे। जिन निवेशकों के डीमैट खाते में रिकॉर्ड डेट तक बजाज ऑटो के शेयर होंगे, वे इस प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे।

टेंडर ऑफर बायबैक क्या होता है?

टेंडर ऑफर बायबैक में कंपनी अपने मौजूदा शेयरधारकों से एक तय कीमत पर शेयर वापस खरीदने की पेशकश करती है। जो निवेशक पात्र होंगे, वे बायबैक विंडो के दौरान अपने शेयर कंपनी को बेचने के लिए पेश कर सकते हैं। हालांकि, अगर बहुत ज्यादा निवेशक हिस्सा लेते हैं तो सभी शेयर स्वीकार नहीं किए जाते। ऐसे में जितने शेयर स्वीकार नहीं होते, वे वापस निवेशक के डीमैट खाते में आ जाते हैं।

बजाज ऑटो बायबैक क्यों कर रही है?

बजाज ऑटो यह बायबैक इसलिए कर रही है क्योंकि कंपनी के पास पर्याप्त नकदी है और वह उसका एक हिस्सा शेयरधारकों को लौटाना चाहती है। आमतौर पर बायबैक यह संकेत देता है कि कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत है, उसके पास जरूरत से ज्यादा कैश है और प्रबंधन मानता है कि शेयर वापस खरीदना पूंजी का बेहतर उपयोग है। इसके अलावा, बायबैक के बाद बाजार में कुल शेयरों की संख्या कम हो जाती है, जिससे प्रति शेयर कमाई (EPS) बढ़ सकती है।

शेयरधारकों को क्या फायदा होगा?

मौजूदा शेयरधारकों को इससे यह फायदा होगा कि अगर उनके शेयर बायबैक में स्वीकार हो जाते हैं तो वे उन्हें 12,000 रुपये प्रति शेयर की ऊंची कीमत पर बेच सकते हैं। हालांकि निवेशकों को यह समझना चाहिए कि बायबैक का मतलब सभी शेयरों पर गारंटीड मुनाफा नहीं है। अगर किसी निवेशक ने 10 शेयर बायबैक में दिए हैं तो जरूरी नहीं कि सभी 10 शेयर स्वीकार हो जाएं। Acceptance Ratio कम रहने पर केवल कुछ शेयर ही खरीदे जा सकते हैं। इसलिए सिर्फ बायबैक के जरिए जल्दी मुनाफा कमाने की सोचकर निवेश करना सही रणनीति नहीं हो सकती।

इन चीजों पर रखनी होगी नजर

आगे निवेशकों को कुछ अहम बातों पर नजर रखनी चाहिए। इनमें एंटाइटलमेंट रेशियो, फाइनल एक्सेप्टेंस रेशियो, प्रमोटरों की भागीदारी और बायबैक के बाद कंपनी की नकदी स्थिति शामिल है। साथ ही यह भी देखना होगा कि कंपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, मोटरसाइकिल कारोबार और निर्यात बाजार में अपनी वृद्धि की रफ्तार बनाए रख पाती है या नहीं।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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