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  1. पॉलीकैब और KEI इंडस्ट्रीज को लगा 'अल्ट्रावोल्ट' का झटका, अल्ट्राटेक के शेयरों में आई तेजी

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पॉलीकैब और KEI इंडस्ट्रीज को लगा 'अल्ट्रावोल्ट' का झटका, अल्ट्राटेक के शेयरों में आई तेजी

Upstox

3 min read | अपडेटेड September 04, 2026, 09:24 IST

सारांश

वायर एंड केबल बिजनेस में आने वाले दिनों में जबर्दस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। आदित्य बिरला ग्रुप इस सेगमेंट में अल्ट्रावोल्ट के साथ एंट्री मारने जा रहा है। क्या हैं इसके मायने और किन कंपनियों के शेयरों पर दिख सकता है इसका असर?

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वायर एंड केबल

वायर एंड केबल बिजनेस को लेकर क्या है आदित्य बिरला ग्रुप का प्लान? (Photo: Shutterstock)

वायर एंड केबल बिजनेस में पिछले कुछ दिनों में बड़े अपडेट्स आए हैं, अल्ट्राटेक ने कुछ दिन पहले इस बिजनेस में एंट्री का ऐलान किया था, जिसके चलते पॉलीकैब और केईआई इंडस्ट्रीज जैसी इस बिजनेस की दिग्गज कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली थी। अल्ट्राटेक की इस बिजनेस को लेकर अहम डीटेल्स अब सामने आ चुकी हैं, ऐसे में आज अल्ट्राटेक के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। अल्ट्राटेक के शेयर गुरुवार को 1.38% यानी कि 156.55 रुपये गिरकर 11,223.45 पर क्लोज हुए थे। आज अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड के शेयर ग्रीन में ट्रेड होना शुरू हुए। करीब .5% यानी कि 47 रुपये चढ़कर इसके शेयर 11,328 रुपये प्रति शेयर पर ट्रेड होना शुरू हुआ। वहीं पॉलीकैब के शेयर 4.42% यानी कि 389.50 रुपये गिरकर 8,418 रुपये प्रति शेयर पर ट्रेड होना शुरू हुए। वहीं केईआई के शेयर 7.23% यानी कि 385 रुपये गिरकर 4,942 रुपये प्रति शेयर पर ट्रेड होना शुरू हुए। आदित्य बिरला ग्रुप इस सेगमेंट में 1,800 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिरला ने कहा कि ‘अल्ट्रावोल्ट’ नाम से शुरू किया गया यह नया कारोबार पिछले तीन सालों में ग्रुप की तीसरी बड़ी शुरुआत है। इससे पहले ग्रुप ने पेंट, बी2बी (कंपनियों के बीच) ई-कॉमर्स और आभूषण खुदरा कारोबार में कदम रखा था।

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बिरला ने यहां नए कारोबार शुरू किए जाने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कहा, ‘हमारी सफलता का मूल आधार प्रोडक्ट्स और इसके इंटर्नल कंपोनेंट्स की गहरी समझ से जुड़ा हुआ है। एल्युमीनियम और तांबे में हमारी विशेषज्ञता क्वॉलिटी, प्रदर्शन और एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।’ ग्रुप के निदेशक दिलीप गौड़ ने कहा कि तार और केबल की लागत में तांबे और एल्युमीनियम की हिस्सेदारी 80% है। सीमेंट कारोबार में मौजूदगी से अल्ट्रावोल्ट को प्रतिस्पर्धियों से चार से छह महीने पहले कारोबारी अवसर का लाभ उठाने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि ग्रुप के कुल 1,800 करोड़ रुपये तक के निवेश के आधार पर अल्ट्रावोल्ट का लक्ष्य अगले तीन से पांच सालों में तार और केबल सेगमेंट में दूसरा सबसे बड़ी इकाई बनना है। गौड़ ने कहा कि कंपनी ने गुजरात के भरूच में कारखाना लगाया है। इसकी क्षमता मौजूदा विनिर्माण इकाइयों में दूसरी सबसे अधिक है।

बिरला ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में तीन प्रमुख रुझान...शहरीकरण, विद्युतीकरण और डिजिटलीकरण...नए कारोबार के लिए बड़े अवसर पैदा करेंगे। कंपनी देश के 500 जिलों और 6,000 पिनकोड में उपस्थिति के साथ शुरुआत कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत के बिजली ग्रिड का आधुनिकीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा का तेजी से विस्तार, मेट्रो रेल नेटवर्क का निर्माण और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बदलाव से विशेष प्रकार के केबल की मांग बढ़ेगी। वहीं, डिजिटलीकरण और डेटा सेंटर के विस्तार से भी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से कारोबार के अवसर पैदा होंगे।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)
पीटीआई इनपुट के साथ

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