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UPI Charges News: क्या खत्म होगा फ्री यूपीआई का दौर? लोकसभा में पेश हुआ नया टैक्स बिल, जानें जेब पर क्या पड़ेगा असर

Upstox

3 min read | अपडेटेड August 05, 2026, 14:13 IST

सारांश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में 'कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश किया है। इस नए बिल से यूपीआई से लेकर टैक्स नियमों में बड़े बदलाव हो सकते हैं।

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लोकसभा में पेश नया कराधान संशोधन विधेयक आम जनता और कारोबारियों पर बड़ा असर डालेगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में 'कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026' पेश कर दिया है। यह नया कानून आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 की जगह लेने के लिए लाया गया है। इसके जरिए देश के पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट (2007), इनकम टैक्स एक्ट (2025) और फाइनेंस एक्ट (2027) में कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। इस बिल का सीधा असर आम आदमी की जेब, देश में आने वाले विदेशी निवेश और कारोबार करने के तरीकों पर पड़ने वाला है।

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क्या खत्म होने जा रहा है फ्री UPI का दौर?

आजकल छोटे दुकानों से लेकर बड़े मॉल्स तक हर जगह लोग UPI से पेमेंट करना पसंद करते हैं। अब तक लोग बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के आसानी से डिजिटल पेमेंट करते आए हैं। इसका मुख्य कारण पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 का सेक्शन 10A था, जिसने बैंकों और पेमेंट कंपनियों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लगाने पर पूरी तरह रोक लगा रखी थी।

नए बिल में इसी जीरो-MDR वाले नियम को खत्म करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में बैंक और पेमेंट कंपनियां यूपीआई से लेनदेन करने पर चार्ज वसूल सकती हैं। सरकार का मानना है कि यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने और इसके अगले लेवल के विकास के लिए फंड की सख्त जरूरत है। इसी कारण यूपीआई पर MDR को फिर से लागू करने का रास्ता साफ किया जा रहा है।

विदेशी निवेशकों के लिए टैक्स में बड़ी राहत

देश की इकोनॉमी को रफ्तार देने और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए टैक्स के नियमों में छूट दी गई है। इनकम टैक्स एक्ट, 2025 में संशोधन के तहत विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने पर ब्याज से होने वाली कमाई और कैपिटल गेन पर टैक्स में पूरी छूट मिलेगी। इसके साथ ही बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स यानी BIS को भी सरकारी सिक्योरिटीज में इन्वेस्ट करने पर टैक्स से राहत दी जाएगी। भारत में फंड मैनेजमेंट एक्टिविटीज को बढ़ावा देने के लिए एलिजिबल इन्वेस्टमेंट फंड्स और फंड मैनेजर्स के लिए टैक्स नियमों को काफी आसान बनाया जा रहा है।

भारत को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए इस बिल में कई खास प्रावधान किए गए हैं। मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर और स्मार्ट वियरेबल्स को 'स्पेसिफाइड इलेक्ट्रॉनिक गुड्स' की कैटगरी में रखा गया है। इन प्रोडक्ट्स की कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग करने वाली कंपनियों को फाइनेंशियल ईयर 2041 तक टैक्स में छूट मिलती रहेगी। इसके अलावा कस्टम बॉन्डेड वेयरहाउस में अपने इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स रखने वाली विदेशी कंपनियों को भी 2041 तक टैक्स राहत दी गई है। वहीं लीज्ड डेटा सेंटर चलाने वाली भारतीय कंपनियों के लिए भी टैक्स नियमों को सिंपल बना दिया गया है।

डायमंड इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए विदेशी माइनिंग कंपनियों, साइटहोल्डर्स, ब्रोकर्स और ऑक्शन कंपनियों के लिए कच्चे हीरे की बिक्री पर टैक्स छूट की समय सीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2041 कर दी गई है। इसके अलावा रीट्स और इनविट्स के यूनिट होल्डर्स को मिलने वाले डिविडेंड पर भी टैक्स शर्तों में ढील दी गई है। हालांकि नई टैक्स व्यवस्था चुनने वाले स्पेशल पर्पज व्हीकल्स यानी SPV के लिए सरचार्ज 10% से बढ़ाकर सीधे 25% कर दिया गया है, जबकि अन्य घरेलू कंपनियों के लिए यह सरचार्ज 10% ही रहेगा।

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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