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  1. चीन पर निर्भरता कम करने के लिए Quad का बड़ा दांव, 20 अरब डॉलर खर्च करने का प्लान, समझिए इसके मायने

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चीन पर निर्भरता कम करने के लिए Quad का बड़ा दांव, 20 अरब डॉलर खर्च करने का प्लान, समझिए इसके मायने

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड May 27, 2026, 14:07 IST

सारांश

अब Quad देश मिलकर चीन पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। 20 अरब डॉलर की इस योजना के तहत नए खनिज प्रोजेक्ट्स में निवेश किया जाएगा, खनिजों की प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग बढ़ाई जाएगी और नियमों को आसान बनाकर सप्लाई चेन मजबूत की जाएगी।

Quad

Quad बैठक की मेजबानी भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने की।

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों की बैठक नई दिल्ली में हुई। ये चारों देश मिलकर “Quad” ग्रुप का हिस्सा हैं। इस बैठक में एक बड़ा फैसला यह लिया गया कि क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई सुरक्षित करने के लिए 20 अरब डॉलर की पहल शुरू की जाएगी। इसे चीन के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।

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इस बैठक की मेजबानी भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने की। इसमें अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री Penny Wong और जापान के विदेश मंत्री Toshimitsu Motegi शामिल हुए।

बैठक में इन मुद्दों पर हुई चर्चा

बैठक का मुख्य मुद्दा “क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव फ्रेमवर्क” था। इसका मकसद ऐसे खनिजों की सप्लाई को सुरक्षित बनाना है, जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर चिप, मिसाइल, फाइटर जेट, मोबाइल, बैटरी और ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी में होता है। इनमें लिथियम, कोबाल्ट, निकेल, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और ग्रेफाइट जैसे खनिज शामिल हैं।

क्रिटिकल मिनरल्स पर चीन का कंट्रोल

समस्या यह है कि इन खनिजों की सप्लाई और प्रोसेसिंग पर चीन का बहुत बड़ा कंट्रोल है। दुनिया के लगभग 69% रेयर अर्थ खनिजों का उत्पादन चीन करता है और करीब 90% प्रोसेसिंग भी वहीं होती है। यानी कई बार खनिज दूसरे देशों में निकलते हैं, लेकिन उन्हें प्रोसेस करने के लिए चीन भेजना पड़ता है। इससे चीन को दुनिया पर आर्थिक और रणनीतिक दबाव बनाने की ताकत मिलती है।

चीन पहले भी इस ताकत का इस्तेमाल कर चुका है। उसने 2023 में गैलियम और जर्मेनियम जैसे जरूरी खनिजों के निर्यात पर कंट्रोल लगाया था, जो सेमीकंडक्टर और रक्षा तकनीक के लिए बेहद जरूरी हैं। बाद में अमेरिका को इन खनिजों के निर्यात पर रोक भी लगाई गई। इससे दुनिया को समझ आया कि अगर सप्लाई एक ही देश पर निर्भर रही तो बड़ा संकट पैदा हो सकता है।

20 अरब डॉलर की योजना

अब क्वाड देश मिलकर चीन पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। 20 अरब डॉलर की इस योजना के तहत नए खनिज प्रोजेक्ट्स में निवेश किया जाएगा, खनिजों की प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग बढ़ाई जाएगी और नियमों को आसान बनाकर सप्लाई चेन मजबूत की जाएगी।

भारत के लिए भी यह योजना अहम

भारत की भूमिका इसमें काफी अहम मानी जा रही है। भारत में जम्मू-कश्मीर के रियासी इलाके में 59 लाख टन लिथियम मिलने की पुष्टि हुई थी। हालांकि अभी वहां खनन शुरू नहीं हो पाया है, क्योंकि सुरक्षा चिंताओं और गिरती लिथियम कीमतों की वजह से कंपनियों ने रुचि नहीं दिखाई। फिर भी भारत को भविष्य के बड़े सप्लायर और उपभोक्ता दोनों के रूप में देखा जा रहा है।

भारत के लिए यह इसलिए भी अहम है क्योंकि देश तेजी से इलेक्ट्रिक व्हीकल और सेमीकंडक्टर सेक्टर को बढ़ाना चाहता है। इन दोनों इंडस्ट्रीज के लिए यही खनिज सबसे जरूरी हैं। इस बैठक में सिर्फ खनिजों पर ही नहीं, बल्कि समुद्री व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, अंडरसी केबल नेटवर्क और फिजी में बंदरगाह बनाने जैसे मुद्दों पर भी सहयोग बढ़ाने की बात हुई।

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