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  1. 6 पॉइंट्स में समझिए कहां तक पहुंची India-US ट्रेड वार्ता, कब तक पक्की हो जाएगी ट्रेड डील?

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6 पॉइंट्स में समझिए कहां तक पहुंची India-US ट्रेड वार्ता, कब तक पक्की हो जाएगी ट्रेड डील?

Upstox

4 min read | अपडेटेड June 24, 2026, 09:14 IST

सारांश

यह ट्रेड वार्ता फरवरी में घोषित समझौते की रूपरेखा की समीक्षा पर केंद्रित रही। बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और शुल्क नीति में बदलाव के कारण इस रूपरेखा पर असर पड़ा है। छह पॉइंट्स में समझते हैं कि इस वार्ता में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

भारत-अमेरिका

भारत-अमेरिका के बीच उच्चस्तरीय व्यापार वार्ता (Photo: All India Radio News)

India-US Trade Talks: भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता (Bilateral Trade Agreement, BTA) जल्द हो सकता है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल पहले ही कह चुके हैं कि अगले महीने के बीच तक भारत-अमेरिका ट्रेड डील का ऐलान कर सकते हैं। इस बीच अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (United States Trade Representative, USTR) जेमीसन ग्रीन भारत में ही हैं और पीयूष गोयल से उनकी बातचीत हुई है। पीयूष गोयल ने ग्रीर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने व्यापार समझौते के विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की। दोनों पक्ष 24 जुलाई से पहले अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका की तरफ से सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर लगाया गया अस्थायी 10% आयात शुल्क 24 जुलाई को ही खत्म होना है। ग्रीर की दो-दिवसीय भारत यात्रा के कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 17 जून को फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन से इतर मुलाकात की थी।

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वाणिज्य भवन में हुई इस वार्ता के दौरान वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और भारत के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन भी मौजूद रहे। इसके पहले दोनों देशों के व्यापार वार्ताकारों ने भी महीने की शुरुआत में दिल्ली में चर्चा की थी। अमेरिकी दूतावास ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार साझेदारी दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और इससे जहां अमेरिका में मैनुफैक्चरिंग एम्प्लॉयमेंट पैदा होंगे, वहीं भारत की आर्थिक वृद्धि को भी समर्थन मिलेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी ग्रीर के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। वित्त मंत्रालय ने कहा कि इस बैठक में द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और नए मौकों पर चर्चा की गई। यह ट्रेड वार्ता फरवरी में घोषित समझौते की रूपरेखा की समीक्षा पर केंद्रित रही। बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और शुल्क नीति में बदलाव के कारण इस रूपरेखा पर असर पड़ा है। छह पॉइंट्स में समझते हैं कि इस वार्ता में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

1- पहले अमेरिका इस ढांचे के तहत भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को घटाकर 18% करने पर सहमत हुआ था, जिससे भारत को वियतनाम और अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बढ़त मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, बाद में आए अमेरिकी कोर्ट के फैसले और ट्रंप प्रशासन द्वारा 24 फरवरी से 150 दिन के लिए सभी देशों पर 10% का अस्थायी शुल्क लगाए जाने से इस व्यवस्था पर असर पड़ा। इस वजह से दोनों पक्षों को समझौते के प्रमुख प्रावधानों पर पुनर्विचार करना पड़ा है।
2- अमेरिका ने दबाव बनाने के मकसद से 11-12 मार्च को भारत समेत करीब 60 अर्थव्यवस्थाओं पर धारा 301 के तहत दो जांच शुरू कर दीं। इनमें से एक जांच कथित अत्यधिक औद्योगिक क्षमता पर केंद्रित है, जबकि दूसरी ग्लोबल सप्लाई चेनों में बंधुआ मजदूरी से जुड़े मुद्दों से संबंधित है।
3- भारत के लिए व्यापार समझौते में तरजीही टैरिफ व्यवस्था हासिल करना अहम लक्ष्य बन गया है। इसका कारण यह है कि हालिया टैरिफ बदलावों से आसियान देशों सहित अन्य प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारत का संभावित प्रॉफिट कम हो गया है।
4- रूपरेखा समझौते के तहत भारत ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों और कई कृषि वस्तुओं- जैसे पशु चारा, मेवे, फल, सोयाबीन तेल, वाइन एवं स्पिरिट पर टैरिफ घटाने या खत्म करने का प्रस्ताव रखा है।
5- दूसरी तरफ, भारत ने अगले पांच सालों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के एनर्जी प्रोडक्ट्स, एयरक्राफ्ट्स और इसके पार्ट्स, कीमती धातु और टेक प्रोडक्ट्स खरीदने की इच्छा जताई है।
6- आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा। इस दौरान भारत का अमेरिका को निर्यात 0.92% बढ़कर 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 15.95% बढ़कर 52.9 अरब डॉलर हो गया। व्यापार अधिशेष घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया, जो एक साल पहले 40.89 अरब डॉलर था।
PTI इनपुट के साथ

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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