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एथेनॉल वाले पेट्रोल से नहीं होगी आपकी गाड़ी को कोई दिक्कत, सरकार ने हर वायरल पोस्ट की खोली पोल

Namita Shukla

5 min read | अपडेटेड June 24, 2026, 13:53 IST

सारांश

सरकार ने कहा कि E20 पेट्रोल की शुरुआत के बाद से, इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण इंजन की खराबी या गाड़ियों के ब्रेकडाउन की कोई समस्या सामने नहीं आई है। मौजूदा समय में प्रचलित एक दावा इथेनॉल की नमी सोखने की क्षमता से संबंधित है।

एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल

एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है (Photo: Shutterstock)

सोशल मीडिया पर एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol, EBP) को लेकर तमाम तरह की भ्रामक दावे शेयर किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पोस्ट पर ऐसे भी दावे किए गए कि EBP वाली गाड़ियों का इंजन जल्दी खराब हो जाता है, EBP वाली गाड़ियों का क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा… इस तरह की तमाम भ्रामक बातें सोशल मीडिया पर शेयर की गई हैं। सरकार ने इस सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार ने कहा कि यह भी देखा गया है कि सनसनीखेज पब्लिसिटी के जरिए दर्शकों को आकर्षित करने और EBP के बारे में अनावश्यक चिंताएं पैदा करने की कोशिश में पुरानी तस्वीरें और वीडियो दोबारा वायरल किए जा रहे हैं।

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कब शुरू हुए एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम?

पीआईबी की प्रेस रिलीज में कहा गया, ‘पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय इस बात को दोहराता है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम वैज्ञानिक रूप से मान्य है और सरकार द्वारा इसकी लगातार निगरानी की जाती है। कच्चे तेल के आयात को कम करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्यों के साथ एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम 2003 में शुरू किया गया था। तकनीकी तैयारियों और हितधारकों के परामर्श के आधार पर इस प्रोग्राम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है, जिसका अंतिम चरण 2023 से 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) का एग्जिक्यूशन है। सरकार ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, ऑटोमोबाइल निर्माताओं, फ्यूल टेस्टिंग एजेंसियों और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श करके एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के एग्जिक्यूशन की लगातार निगरानी करती है।’

किस तरह की अफवाहें फैल रही हैं?

सरकार ने कहा कि E20 पेट्रोल की शुरुआत के बाद से, इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण इंजन की खराबी या गाड़ियों के ब्रेकडाउन की कोई समस्या सामने नहीं आई है। मौजूदा समय में प्रचलित एक दावा इथेनॉल की नमी सोखने की क्षमता से संबंधित है। इसको लेकर रिलीज में कहा गया, ‘यह सब जानते हैं कि फ्यूल टैंक में पानी आना किसी भी फ्यूल के लिए सही नहीं है, चाहे वह इथेनॉल ब्लेंडेड हो या नहीं। आधुनिक गाड़ियों में फ्यूल टैंक में पानी से बचाव के लिए डिजाइन संबंधी विशेषताएं और सुरक्षा उपाय मौजूद हैं। यह भी देखा गया है कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो बना रहे हैं और शेयर कर रहे हैं जिनमें गन्ने के रस को सीधे पेट्रोल में मिलाया जा रहा है। ऐसे वीडियो भ्रामक और निराधार हैं। ईंधन में मिलाने के लिए इस्तेमाल होने वाला इथेनॉल स्थापित इंडस्ट्रियल प्रोसेसों द्वारा तैयार किया जाता है और पेट्रोल में मिलाने से पहले सख्त गुणवत्ता मानकों का पालन करता है।’

किस-किस चीज के मिलने से बनता है एथेनॉल?

एथेनॉल विभिन्न प्रकार के कच्चे माल जैसे गन्ने का रस, गुड़, टूटा हुआ चावल और मक्का से बनाया जाता है, लेकिन एथेनॉल के गुण कच्चे माल से बहुत अलग होते हैं क्योंकि यह फर्मेंटेशन समेत कई प्रोसेस से गुजरता है, जिससे कच्चे माल में मौजूद शर्करा का फर्मेंटेशन होता है। ऐसा लगता है कि इस तरह के वीडियो को फैलाना इस मुद्दे को सनसनीखेज बनाने और दर्शकों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से किया जाता है। भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग सख्त ईंधन गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है और उपयोग से पहले इसका कड़ा टेस्टिंग की जाती है।

चींटी होने का दावा भी झूठा

हाइ लेवल की ब्लेंडिंग को लागू करने का फैसला व्यापक तकनीकी मूल्यांकन और ऑटोमोबाइल निर्माताओं और अन्य हितधारकों के साथ परामर्श के बाद ही लिया गया है। हाल ही में, एक गाड़ी के फ्यूल टैंक के पास चींटियों को दिखाने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। इसके जवाब में, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने क्लियर किया कि पेट्रोल ब्लेंडिंग में इस्तेमाल होने वाला ईंधन-ग्रेड इथेनॉल फर्मेंटेशन और डिस्टलेशन प्रोसेस द्वारा तैयार किया जाता है, जिससे फाइनल प्रोडक्ट से अवशिष्ट शर्करा (Residual Sugars) को हटा दिया जाता है। इसके अलावा, ईंधन इथेनॉल में ऐसे ‘डिनेचुरेंट्स’ होते हैं जो कीटों को दूर भगाते हैं। इसलिए, E20 फ्यूल और चींटियों के आने के बीच संबंध का दावा वैज्ञानिक रूप से निराधार है और वैज्ञानिक प्रमाणों द्वारा समर्थित नहीं है। इसी प्रकार, E20 ईंधन के उपयोग से गाड़ी के इंश्योरेंस की वैधता प्रभावित हो सकती है, इस संबंध में कई दावों को संबंधित हितधारकों द्वारा क्लियर किया गया और उन्हें गलत पाया गया।

किन-किन देशों में एथेनॉल ब्लेंडिंग हुई लागू?

एथेनॉल ब्लेंडिंग एक वर्ल्ड लेवल पर स्वीकृत प्रोसेस है और इसे अमेरिका, ब्राजील और जापान सहित कई देशों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है। ब्राजील ने लंबे समय से उच्च स्तर की एथेनॉल ब्लेंडिंग को अपनाया है, जिसमें E27 मानक पेट्रोल ब्लेंडिंग के रूप में काम करता है। गौरतलब है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम ने कच्चे तेल के आयात में कमी लाकर देश को 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत करने में मदद की है। इस प्रोग्राम ने एथेनॉल प्रोडक्शन में इस्तेमाल होने वाले कृषि कच्चे माल की निरंतर मांग भी पैदा की है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हुई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ परिवहन की दिशा में आ रहे परिवर्तन को गति देने में इथेनॉल ब्लेंडिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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