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  1. टैक्स में छूट का सरकार का फैसला भा गया विदेशी निवेशकों को, भारतीय बॉन्ड में अबतक ₹35,000 करोड़ का निवेश

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टैक्स में छूट का सरकार का फैसला भा गया विदेशी निवेशकों को, भारतीय बॉन्ड में अबतक ₹35,000 करोड़ का निवेश

Upstox

2 min read | अपडेटेड June 24, 2026, 08:28 IST

सारांश

सरकार ने 5 जून को इनकम टैक्स ऐक्ट में संशोधन करने वाला एक अध्यादेश जारी किया, ताकि एफपीआई के पास मौजूद सरकारी सिक्योरिटीज की बिक्री, विनिमय और ट्रांसफर से होने वाली इंट्रेस्ट इनकम और कैपिटल गेन पर टैक्स छूट दी जा सके।

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टैक्स छूट के बाद विदेशी निवेशकों ने भारतीय बॉन्ड में अबतक 35,000 करोड़ रुपये का निवेश किया (Photo: Shutterstock)

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (Foreign Portfolio Investor, FPI) ने इस महीने अब तक भारतीय बॉन्ड में लगभग 35,000 करोड़ रुपये इन्वेस्ट किए हैं। सरकार ने हाल में इन बॉन्ड में इन्वेस्टमेंट से होने वाली इंट्रेस्ट इनकम और कैपिटल गेन पर इनकम टैक्स से छूट दिए जाने का फैसला लिया था, इस फैसले के बाद FPIs के इंडियन बॉन्ड में इन्वेस्टमेंट में यह बढ़ोतरी देखी गई है। भारतीय समाशोधन निगम लि. के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। ये सभी इन्वेस्टमेंट भारतीय सरकारी सिक्योरिटीज के पूर्ण पहुंच मार्ग (Fully Accessible Route, FAR) के तहत किए गए हैं।

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आंकड़ों के मुताबिक, इसका कारण एफएआर प्रवासी निवेशकों को बिना किसी निवेश सीमा के भारत सरकार की तय अवधि वाली सिक्योरिटीज में निवेश करने की अनुमति देता है। मंगलवार को एफएआर सिक्योरिटीज में विदेशी पोर्टफोलियो की हिस्सेदारी 3.58 लाख करोड़ रुपये थी, जो 3 जून को 3.23 लाख करोड़ रुपये थी। इससे पहले, विदेशी निवेशकों ने मई में 5,512.108 करोड़ रुपये और अप्रैल में 5,262.016 करोड़ रुपये का निवेश किया था। हालांकि, मार्च में 17,687.988 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी।

सरकार ने 5 जून को इनकम टैक्स ऐक्ट में संशोधन करने वाला एक अध्यादेश जारी किया, ताकि एफपीआई के पास मौजूद सरकारी सिक्योरिटीज की बिक्री, विनिमय और ट्रांसफर से होने वाली इंट्रेस्ट इनकम और कैपिटल गेन पर टैक्स छूट दी जा सके। यह छूट पिछली तारीख 1 अप्रैल, 2026 से लागू हुई। यह कदम सरकार द्वारा घरेलू बॉन्ड मार्केट में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करने और बाहरी दबाव के बीच रुपये को सहारा देने के मकसद से उठाया गया।

मौजूदा समय में, विदेशी निवेशकों को 12 महीने से अधिक समय तक रखे गए लिस्टेड शेयरों और बॉन्ड पर 12.5% का दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ (Long-Term Capital Gain, LTCG) टैक्स देना पड़ता है, जबकि सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले ब्याज पर 20% का ‘विदहोल्डिंग’ टैक्स (स्रोत पर कर कटौती, Tax Deduction at Source, TDS) लगता है। भारतीय रिजर्व बैंक ने इस महीने मौद्रिक नीति समीक्षा में एफएआर के तहत उपलब्ध सिक्योरिटीज के दायरे का विस्तार किया और इसमें 15-वर्षीय, 30-वर्षीय और 40-वर्षीय पीरियड वाली सरकारी सिक्योरिटीज के सभी फ्रेश इश्यू को शामिल किया। केंद्रीय बैंक ने ‘सामान्य मार्ग’ के तहत एफपीआई निवेश के लिए अल्पकालिक निवेश और व्यक्तिगत प्रतिभूतियों से संबंधित सीमाओं को भी हटा दिया।

PTI इनपुट के साथ

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