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4 min read | अपडेटेड May 15, 2026, 09:26 IST
सारांश
15 मई की सुबह MCX पर सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। जून गोल्ड फ्यूचर 0.87 पर्सेंट गिरकर 1,60,562 रुपये पर आ गया। वहीं चांदी 3 पर्सेंट से ज्यादा टूट गई है। डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजार पर दबाव बनाया है।

ग्लोबल मार्केट में मची हलचल के बीच सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट। | Image: Shutterstock
15 मई की सुबह जब बाजार खुला तो सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का रुख देखा गया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर आज गोल्ड और सिल्वर दोनों के दाम नीचे गिर गए हैं। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने की कीमतों में कमी आई है और यह पिछले एक हफ्ते के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
शुक्रवार सुबह करीब 9 बजकर 5 मिनट पर MCX पर जून का गोल्ड फ्यूचर 0.87 पर्सेंट की गिरावट के साथ 1,60,562 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखी गई है। MCX पर जुलाई का सिल्वर फ्यूचर 3.28 पर्सेंट की भारी गिरावट के साथ 2,81,551 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों को परेशान कर दिया है, जिससे सोने की साप्ताहिक परफार्मेंस में गिरावट आने की पूरी संभावना बनी हुई है।
सोने की कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है। डॉलर इंडेक्स 0.30 पर्सेंट चढ़कर 99.10 के स्तर पर पहुंच गया है। डॉलर में यह मजबूती तब आई जब कच्चे तेल का बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1 पर्सेंट से ज्यादा उछलकर 107 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। कच्चे तेल की कीमतें पिछले दो महीनों से ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इससे यह डर पैदा हो गया है कि पूरी दुनिया में महंगाई तेजी से बढ़ेगी। जब महंगाई बढ़ती है, तो दुनिया के बड़े केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को सख्त कर देते हैं। सोने के लिए ऊंची ब्याज दरें अच्छी नहीं मानी जाती हैं, इसलिए इसके दाम गिर रहे हैं।
बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव बनाने वाला एक और बड़ा कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में होने वाली बढ़ोतरी है। अमेरिका के 10 साल के ट्रेजरी यील्ड में उछाल आया है और यह करीब 1 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो निवेशक सोने से पैसा निकालकर वहां लगाने लगते हैं। महंगाई के बढ़ने की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहेंगी और महंगाई का दबाव बना रहेगा, तब तक सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
दुनिया भर के बाजारों में इस समय अनिश्चितता का माहौल है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसी के साथ दुनिया भर की नजरें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली मुलाकात पर टिकी हैं। ट्रंप इस समय चीन के दो दिवसीय दौरे पर हैं। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की इस मुलाकात के नतीजों का असर भी बाजार पर पड़ेगा। इसके अलावा पिछले कुछ दिनों से डॉलर के मुकाबले रुपये में आई रिकॉर्ड गिरावट ने भी घरेलू बाजार में कीमतों को प्रभावित किया है।
अगर दिल्ली के सर्राफा बाजार की बात करें तो गुरुवार को यहां सोने की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई थी। गुरुवार को सोना 650 रुपये महंगा होकर 1.66 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया था। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक 99.9 पर्सेंट शुद्धता वाला सोना 1,66,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। हालांकि शुक्रवार सुबह ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेतों के बाद अब घरेलू बाजार में भी गिरावट का असर दिखने लगा है।
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