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ईरान ने किया ऐलान- अमेरिका के साथ डील खत्म, डोनाल्ड ट्रंप ने 20% शुल्क पर लिया यू-टर्न

Namita Shukla

5 min read | अपडेटेड July 15, 2026, 08:19 IST

सारांश

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रहा है। दोनों देश कुछ समय पहले सीजफायर के लिए तैयार हुए थे, लेकिन एक बार फिर दोनों देशों के बीच युद्ध चरम पर पहुंचता नजर आने लगा है।

अमेरिका-ईरान

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जारी, क्या हैं लेटेस्ट अपडेट्स (Photo: Shutterstock)

ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते (MoU) से ईरान ने पूरी तरह से पीछे हटने का ऐलान कर दिया है। पिछले सप्ताह से दोनों देशों के बीच तनाव फिर से काफी ज्यादा बढ़ चुका है और सीजफायर भी खत्म हो चुका है। ईरान का आरोप है कि वॉशिंगटन ने पिछले महीने लड़ाई रोकने के लिए हुए समझौते का बार-बार उल्लंघन किया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि तेहरान अब खुद को सीजफायर समझौते की शर्तों को पूरा करने के लिए बाध्य नहीं मानता, क्योंकि अमेरिका ने न केवल समझौते का उल्लंघन किया बल्कि उसे पूरी तरह खत्म कर दिया, खासकर ईरानी बंदरगाहों पर नई नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) करके। यह कदम तब उठाया गया जब अमेरिकी सेना ने बुधवार तड़के ईरानी बंदरगाहों पर फिर से नाकेबंदी लागू कर दी। यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे जहाजों पर तेहरान के हमलों के जवाब में की गई। इससे उन देशों पर नए हमले शुरू हो गए जहां अमेरिकी सेना तैनात है, और युद्ध खत्म करने का अंतरिम समझौता टूटने की कगार पर पहुंच गया।

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होर्मुज स्ट्रेट को लेकर गहराया विवाद

अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच कई दिनों से चल रही गोलीबारी और होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल पाने की दोनों देशों की कोशिशें, जिससे शांति के समय दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल और प्राकृतिक गैस गुजरता है, इस क्षेत्र को फिर से पूर्ण युद्ध की ओर धकेलने का खतरा पैदा कर रही हैं। तस्नीम समाचार एजेंसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर ‘पूरी संप्रभुता का इस्तेमाल करेगा, चाहे इसकी कोई भी कीमत चुकानी पड़े,’ जिसमें ओमान का हिस्सा भी शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि आम तौर पर ओमान उन दो देशों में से एक है जो इस स्ट्रेट को कंट्रोल करते हैं, लेकिन अब युद्ध के समय ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से ईरान को पूरे होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल करना होगा।’ गरीबाबादी ने यह भी कहा कि ईरान ‘कभी भी अमेरिका के साथ बातचीत का अनुरोध नहीं करेगा।’

मिड-अप्रैल में अमेरिका ने पहली बार ब्लॉकेड लागू किया था और फिर मिड जून में इसे हटा लिया था। यह कदम एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर करने के एक दिन बाद उठाया गया था, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर बातचीत के लिए 60 दिन का पीरियड तय किया गया था, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को लेकर लड़ाई तेज होने के कारण बातचीत रुक गई है।

एक ही दिन में क्यों ट्रंप ने बदला अपना फैसला?

जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ब्लॉकेड की वापसी की घोषणा की, तो उन्होंने यह भी कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर 20% शुल्क लगाएंगे। लेकिन फारस की खाड़ी में सहयोगियों के अनुरोधों का हवाला देते हुए, उन्होंने ब्लॉकेड फिर से शुरू करने से कुछ घंटे पहले ही यह चार्ज वसूलने का प्लान छोड़ दिया। ब्लॉकेड फिर से लागू होने के कुछ घंटों बाद, ईरान के सरकारी मीडिया ने होर्मुज स्ट्रेट में गोलीबारी की खबर दी, लेकिन कोई डिटेल नहीं दी। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने एक बयान में कहा कि ईरान ने पड़ोसी खाड़ी अरब देशों पर दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं।

अमेरिका-ईरान युद्ध की क्या है स्थिति?

बुधवार सुबह बहरीन और कुवैत में मिसाइल अलर्ट जारी किए गए क्योंकि उन्हें ईरान की तरफ से हमले का सामना करना पड़ा। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने कहा कि ब्लॉकेड फिर से लागू करने से पहले अमेरिका ने एक और दौर के हमले किए। कूपर ने कहा, ‘अमेरिकी सेना ईरान को उस गैर-जरूरी आक्रामकता के लिए जिम्मेदार ठहरा रही है जिससे बेगुनाह लोगों की जान को खतरा बना हुआ है।’ अरब सागर में कम से कम 19 अमेरिकी युद्धपोत मौजूद हैं, जिनमें दो एयरक्राफ्ट कैरियर और एक एम्फीबियस असॉल्ट शिप शामिल है, जिस पर 1,000 से ज्यादा मरीन तैनात हैं। सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी कहा कि ‘पूरे मध्य पूर्व में सैकड़ों सैन्य विमान काम कर रहे हैं।’ जब अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया, तो तेहरान ने जहाजों पर हमला करके और उन्हें धमकाकर उस रास्ते को असल में बंद कर दिया। इससे तेल, खाद और अन्य सामानों की कीमतें तेजी से बढ़ गईं।

फिर क्यों शुरू हुआ युद्ध?

हाल ही में ईरान ने ओमान के पास उस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर हमला किया है, जिसकी निगरानी अमेरिकी सेना करती है और जो तेहरान के कंट्रोल से बाहर है, इसी वजह से हालिया हिंसा शुरू हुई है। अमेरिका ने ताकत के दम पर उस रास्ते को फिर से खोलने की धमकी दी है, लेकिन जानकारों का कहना है कि इसके लिए बहुत बड़े बेड़े की जरूरत होगी, और शायद हजारों जमीनी सैनिकों की भी।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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