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क्या शुद्ध पेट्रोल से भी महंगा हो सकता है E20 पेट्रोल? E20 से 5% तक घट सकता है माइलेज लेकिन...

Namita Shukla

4 min read | अपडेटेड July 10, 2026, 15:55 IST

सारांश

कीमतों के बारे में मंत्रालय ने कहा कि ई20 जरूरी नहीं कि पारंपरिक पेट्रोल से सस्ता हो, क्योंकि किसानों को समर्थन देने के लिए एथनॉल की खरीद कीमत लाभकारी स्तर पर तय की जाती है और इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत कम होने पर यह पेट्रोल से भी महंगा पड़ सकता है।

पेट्रोल

ई20 से 5% घट सकती है माइलेज लेकिन स्वच्छ दहन जैसे लाभ अधिक (Photo: Shutterstock)

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि 20% एथनॉल मिक्स्ड पेट्रोल (ई20) के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में ईंधन दक्षता (फ्यूल एफिसिएंशी, माइलेज) 3 से 5% तक कम हो सकती है, लेकिन इसके बदले मिलने वाले एनर्जी सिक्योरिटी, कम कार्बन उत्सर्जन (Low carbon emissions) और बेहतर इंजन परफॉरमेंस जैसे फायदे कहीं अधिक अहम हैं। मंत्रालय के मुताबिक इसके अलावा ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर एंटी-नॉक क्षमता, तेज दहन, बेहतर पिकअप जैसे अन्य फायदे भी इसमें शामिल हैं। एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol, EBP) प्रोग्राम की आलोचनाओं का जवाब देने के लिए मंत्रालय ने FAQs जारी किए हैं। जिसमें मंत्रालय की ओर से दावा किया गया है कि ई20, ई10 या शुद्ध पेट्रोल की तुलना में ‘अधिक स्वच्छ, बेहतर गुणवत्ता वाला और अधिक दक्ष ईंधन है।’ इसे सालों तक साइंटिफिक टेस्टिंग, व्हीकल मैनुफैक्चरर्स के साथ काउंसलिंग और घरेलू एथनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के बाद ही लागू किया गया है।

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भारत में एथनॉल ब्लेंडिंग का इतिहास?

मंत्रालय ने इस आशंका को खारिज किया कि यह प्रोग्राम जल्दबाजी में लागू किया गया। उसने कहा कि भारत की एथनॉल ब्लेंडिंग पहल की शुरुआत 2001 में पायलट प्रोजेक्ट्स से हुई थी और 2006 तक देश के कुछ हिस्सों में 5% एथनॉल ब्लेंडिंग लागू कर दिया गया था। मंत्रालय ने कहा कि 2014 तक एथनॉल ब्लेंडिंग लगभग 1.5% पर ही थी, लेकिन 2018 में बायोफ्यूल्स की नैशनल पॉलिसी लागू होने और गन्ने के अलावा अन्य कच्चे माल को भी इसमें शामिल किए जाने के बाद सरकार ने एथनॉल प्रोडक्शन में तेजी लाई। उसने कहा कि भारत ने निर्धारित समय से पहले 2022 में 10% एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया और एथनॉल प्रोडक्शन प्लांट्स, स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स में इन्वेस्ट के बाद 2025-26 एथनॉल सप्लाई साल में 20% मिश्रण का लक्ष्य भी प्राप्त कर लिया।

पुरानी गाड़ियों को लेकर चिंता पर मंत्रालय ने क्या दिया जवाब?

पुरानी गाड़ियों को लेकर उठी चिंताओं पर मंत्रालय ने कहा कि ई20 को देशभर में लागू करने से पहले इंजन की टिकाऊ क्षमता, फ्यूल सिस्टम, विभिन्न मटीरयलों के साथ अनुकूलता, जंग-रोधी क्षमता, व्हीकल ऑपरेशन और उत्सर्जन समेत अनेक पहलुओं पर व्यापक टेस्ट किए गए। मंत्रालय ने कहा कि मारुति सुजुकी और हीरो मोटोकॉर्प समेत व्हीकल मैनुफैक्चरर्स से मिली प्रतिक्रिया के अनुसार, वास्तविक परिस्थितियों में उपयोग किए गए वाहनों में ई20 के कारण जंग लगने, असामान्य घिसाव या कलपुर्जों के जल्दी खराब होने की कोई शिकायत नहीं मिली है।

शुद्ध पेट्रोल की उपलब्धता पर मंत्रालय का जवाब

मंत्रालय ने पेट्रोल पंप पर शुद्ध पेट्रोल, ई10 और ई20 जैसे कई प्रकार के ईंधन उपलब्ध कराने की मांग को भी खारिज करते हुए कहा कि पूरे देश में समानांतर सप्लाई चेन बनाए रखने से लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ेगी और एक लाख से अधिक खुदरा ईंधन केंद्रों पर डिस्ट्रीब्यूशन व्यवस्था जटिल हो जाएगी।

‘ई20 जरूरी नहीं पारंपरिक पेट्रोल से सस्ता रहे’

कीमतों के बारे में मंत्रालय ने कहा कि ई20 जरूरी नहीं कि पारंपरिक पेट्रोल से सस्ता हो, क्योंकि किसानों को समर्थन देने के लिए एथनॉल की खरीद कीमत लाभकारी स्तर पर तय की जाती है और इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत कम होने पर यह पेट्रोल से भी महंगा पड़ सकता है। मंत्रालय ने कहा कि इस प्रोग्राम का उद्देश्य पेट्रोल पंपों पर कीमतें घटाना नहीं बल्कि आयातित कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता कम करना, कीमतों में स्थिरता लाना और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।

मंत्रालय के अनुसार, 2014-15 के एथनॉल सप्लाई साल से अब तक एथनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के कारण 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। कच्चे तेल के आयात की आवश्यकता लगभग 316 लाख टन कम हुई है, कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन करीब 952 लाख टन घटा और किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। मंत्रालय ने उपभोक्ताओं से ई20 को लेकर फैलाई जा रही भ्रामक जानकारी से प्रभावित नहीं होने की अपील करते हुए कहा कि इसे देशभर में लागू करने से पहले व्हीकल मैनुफैक्चरिंग, टेस्टिंग एजेंसियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और नियामकों द्वारा प्रमाणित किया जा चुका है।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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