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4 min read | अपडेटेड August 14, 2026, 15:04 IST
सारांश
आजादी के बाद भारत ने एक लंबा सफर तय किया है। 1990 के दशक में देश के पास महज तीन हफ्ते का विदेशी मुद्रा भंडार बचा था और दिवालिया होने का खतरा मंडरा रहा था। वहां से निकलकर आज भारत 1991 के आर्थिक सुधारों और नीति आयोग की नई रिपोर्टों के दम पर ग्लोबल मैन्यूफैक्चरिंग और सर्विस हब बन रहा है।

1991 के आर्थिक संकट से निकलकर आज दुनिया के नक्शे पर चमकता भारत और नीति आयोग का विकसित भारत रोडमैप।
भारत की आजादी के बाद की आर्थिक कहानी बेहद प्रेरणादायक रही है। आजादी मिलने के बाद देश अपने पैरों पर खड़ा होने की कोशिश कर ही रहा था कि 1990 के दशक की शुरुआत में एक ऐसा दौर आया जब देश पर दिवालिया होने का संकट मंडराने लगा था। विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 1 अरब डॉलर से भी कम रह गया था, जिससे केवल तीन हफ्तों का आयात ही किया जा सकता था। ऐसे मुश्किल वक्त में कड़क नौकरशाह ए. रामानन को आरबीआई का गवर्नर बनाया गया। उन्होंने भारी दबाव के बावजूद देश के गोल्ड रिजर्व को विदेश में गिरवी रखकर कर्ज जुटाने का ऐतिहासिक फैसला लिया। इसके बाद जून 1991 में प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह की जोड़ी ने देश में आर्थिक उदारीकरण के नए युग की शुरुआत की। जिसके बाद भारत ने ग्रोथ की ऐसी रफ्तार पकड़ी की आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी के रूप में खड़ा है।
आर्थिक संकट से उबरने के लिए सबसे बड़ा फैसला 'लाइसेंस राज' को खत्म करने का था। 1947 से चले आ रहे इस सिस्टम में कोई भी नया बिजनेस शुरू करने के लिए लगभग 80 सरकारी एजेंसियों से मंजूरी लेनी पड़ती थी। सरकार ने इस नौकरशाही के जाल को खत्म किया और विदेशी निवेश के रास्ते खोल दिए। इससे देश में आधुनिक तकनीक आई और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिला। टेलिकॉम, सॉफ्टवेयर, मेडिकल इंडस्ट्री, बायोटेक्नोलॉजी और ऑटो पार्ट्स जैसे सेक्टर तेजी से आगे बढ़े। 1991-92 में जो विदेशी निवेश 13.2 करोड़ डॉलर था, वह 1995-96 में बढ़कर 5.3 अरब डॉलर हो गया। वहीं देश में गरीबी दर 1993-94 के 36 पर्सेंट से घटकर 1999-2000 में 26.1 पर्सेंट पर आ गई। आज की बात करें तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) 10.512 अरब डॉलर बढ़कर 692.866 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है।
आज का भारत 1990 के उस दौर से बहुत आगे निकल चुका है। आज देश में एक विशाल मिडिल क्लास, दर्जनों यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स और मजबूत यूपीआई डिजिटल पेमेंट सिस्टम है। हर हाथ में स्मार्टफोन, 5G नेटवर्क और AI तकनीक ने आम जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। आज भारत का बाजार इतना ताकतवर हो चुका है कि यूरोपीय देश भारत के साथ एफटीए करने के लिए तैयार हैं और दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भारत के बढ़ते प्रभाव को मान रही हैं। भारत आज ग्लोबल मैन्यूफैक्चरिंग में टॉप लिस्ट में शामिल हो चुका है।
नीति आयोग ने 13 अगस्त 2026 को भारत को ग्लोबल मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने के लिए एक अहम रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में चार मुख्य सेक्टरों रसायन, कपड़ा, टेलिकॉम डिवाइस और सौर पीवी पर फोकस किया गया है। कपड़ा उद्योग में भारत वित्त वर्ष 2025 में 37.7 अरब डॉलर के निर्यात के साथ दुनिया का छठा सबसे बड़ा निर्यातक बन चुका है और 4 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रहा है। दूरसंचार में भारत 1.2 अरब ग्राहकों के साथ दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। वहीं सौर ऊर्जा में मार्च 2025 तक 106 गीगावाट क्षमता हासिल हो चुकी है, जिसे 2030 तक 280 गीगावाट करने का लक्ष्य है।

नीति आयोग की अगस्त 2026 की अन्य रिपोर्ट्स में सर्विस सेक्टर और केयर इकोनॉमी को मजबूत बनाने का प्लान दिया गया है। वित्त वर्ष 2024 में सर्विस सेक्टर ने जीडीपी में 55% का योगदान दिया है और भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा सर्विस एक्सपोर्टर है। इसके अलावा देश में बुजुर्गों की बढ़ती संख्या को देखते हुए केयरगिविंग को एक औपचारिक पेशे के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए राष्ट्रीय केयरगिवर काउंसिल के गठन के साथ शतायु डैशबोर्ड और जीवन ऐप जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किए जा रहे हैं। इन सभी कदमों से विकसित भारत 2047 का सपना साकार हो रहा है।
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