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6 min read | अपडेटेड August 14, 2026, 19:32 IST
सारांश
Tata Group की शुरुआत 1868 में जमशेदजी नुसरवानजी टाटा ने महज 21 हजार रुपये की पूंजी से एक ट्रेडिंग कंपनी के रूप में की थी। उनका सपना सिर्फ कारोबार करना नहीं, बल्कि भारत को औद्योगिक रूप से मजबूत बनाना था।

Amul की कहानी 1946 में गुजरात के आनंद से शुरू हुई।
15 अगस्त 2026 को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। आजादी के बाद से भारत ने आर्थिक मोर्चे पर लंबा सफर तय किया है। देश की अर्थव्यवस्था आज करीब 4 ट्रिलियन डॉलर की हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की अप्रैल 2026 की वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, भारत वित्त वर्ष 2025-26 में दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था रहा। इस दौरान भारत की नॉमिनल GDP 3.92 ट्रिलियन डॉलर रही।
भारत इस मुकाम तक कई उतार-चढ़ाव से गुजरते हुए पहुंचा है। इस आर्थिक सफर में देश की कई कंपनियों और स्वदेशी ब्रांड्स ने अहम भूमिका निभाई है। Tata Group, Amul, Reliance Industries, Adani Group और Larsen & Toubro जैसे बड़े कारोबारी समूहों ने न सिर्फ देश में रोजगार और कारोबार को बढ़ावा दिया, बल्कि भारत की वैश्विक पहचान बनाने में भी योगदान दिया। आइए एक नजर डालते हैं उन प्रमुख भारतीय कंपनियों और ब्रांड्स पर, जिन्होंने अलग-अलग दौर में भारत की अर्थव्यवस्था और उसकी बदलती तस्वीर को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है।
Tata Group की शुरुआत 1868 में जमशेदजी नुसरवानजी टाटा ने महज 21 हजार रुपये की पूंजी से एक ट्रेडिंग कंपनी के रूप में की थी। उनका सपना सिर्फ कारोबार करना नहीं, बल्कि भारत को औद्योगिक रूप से मजबूत बनाना था। उन्होंने कपड़ा उद्योग से शुरुआत की और आगे चलकर स्टील, बिजली, होटल और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में कदम रखा। 1907 में Tata Steel की स्थापना हुई, जबकि 1903 में मुंबई में Taj Mahal Palace Hotel शुरू हुआ।
1938 में JRD Tata के नेतृत्व में समूह ने विमानन, रिसर्च और टेक्नोलॉजी सहित कई नए क्षेत्रों में विस्तार किया। 1968 में TCS की शुरुआत हुई, जिसने भारत के IT सेक्टर को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
इसके बाद 1991 में Ratan Tata के नेतृत्व में समूह ने वैश्विक विस्तार किया। Tetley, Corus और Jaguar Land Rover जैसे बड़े अधिग्रहणों ने Tata को एक ग्लोबल ब्रांड बनाया। आज Tata Group कई सेक्टर में कारोबार करता है और भारत की आर्थिक विकास यात्रा का अहम हिस्सा है।

बाद में डॉ. वर्गीज कुरियन ने इस सहकारी मॉडल को मजबूत किया और भारत में श्वेत क्रांति की नींव रखी। 1970 में शुरू हुए Operation Flood ने देश के लाखों किसानों को संगठित किया और भारत को दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादकों में शामिल करने में अहम भूमिका निभाई। Amul ने किसानों को सीधे बाजार से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने और बिचौलियों की भूमिका कम करने में मदद की।
Reliance Industries की शुरुआत 1966 में धीरूभाई अंबानी ने की थी। उन्होंने गुजरात के नरोदा में एक छोटी टेक्सटाइल यूनिट से कारोबार शुरू किया। बाद में Reliance ने पॉलिएस्टर, पेट्रोकेमिकल्स और रिफाइनिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार किया। कंपनी ने 1977 में अपना IPO लाया, जिसे आम निवेशकों के बीच काफी लोकप्रियता मिली।
2002 में धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद Reliance का कारोबार उनके बेटों मुकेश और अनिल अंबानी के बीच बंट गया। मुकेश अंबानी के नेतृत्व में Reliance Industries ने ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल्स से आगे बढ़कर टेलीकॉम, डिजिटल सेवाओं और रिटेल में बड़ा विस्तार किया।
2016 में Jio की लॉन्चिंग ने भारत के टेलीकॉम सेक्टर को पूरी तरह बदल दिया। सस्ते डेटा और किफायती टैरिफ के कारण इंटरनेट आम लोगों तक तेजी से पहुंचा। आज Reliance Industries भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल है और ऊर्जा से लेकर डिजिटल और रिटेल तक कई क्षेत्रों में कारोबार करती है।
Adani Group की शुरुआत 1988 में गौतम अदानी ने गुजरात के अहमदाबाद में एक कमोडिटी ट्रेडिंग कंपनी के रूप में की थी। शुरुआती दौर में कंपनी ने प्लास्टिक और कृषि उत्पादों जैसी कमोडिटीज के कारोबार से शुरुआत की। इसके बाद समूह ने तेजी से विस्तार करते हुए पोर्ट, लॉजिस्टिक्स, बिजली, कोयला, एयरपोर्ट, ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में कदम रखा।
1990 के दशक में मुंद्रा पोर्ट के विकास ने Adani Group के विस्तार को नई दिशा दी। इसके बाद समूह ने भारत के अलग-अलग हिस्सों में बंदरगाहों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निवेश किया। पिछले दशक में Adani Group ने रिन्यूएबल एनर्जी और एयरपोर्ट कारोबार में भी बड़ा विस्तार किया। आज समूह भारत के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबारी समूहों में शामिल है और देश की पोर्ट, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Infosys की शुरुआत 1981 में एन. आर. नारायण मूर्ति और उनके छह साथियों ने मिलकर की थी। कंपनी की शुरुआत महज 10,000 रुपये की पूंजी से हुई थी। इसका उद्देश्य भारतीय IT टैलेंट को दुनिया तक पहुंचाना और भारत को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में मजबूत पहचान दिलाना था।
शुरुआत में Infosys ने सॉफ्टवेयर सेवाएं देने पर ध्यान दिया। 1993 में कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट हुई और बाद के वर्षों में अमेरिका और दूसरे देशों में तेजी से विस्तार किया। Infosys ने पारदर्शिता, कॉरपोरेट गवर्नेंस और प्रोफेशनल मैनेजमेंट को अपनी पहचान बनाया।
1999 में Infosys NASDAQ पर लिस्ट होने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी, जिससे भारतीय IT सेक्टर को वैश्विक पहचान मिली। कंपनी ने भारत में बड़े पैमाने पर IT रोजगार पैदा करने के साथ देश के सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट को बढ़ावा दिया।
Larsen & Toubro (L&T) की शुरुआत 1938 में मुंबई में दो डेनिश इंजीनियरों ने की थी। हालांकि, आज L&T एक प्रमुख भारतीय कंपनी है। आजादी के बाद देश के औद्योगिक विकास में L&T ने अहम भूमिका निभाई। कंपनी ने भाखड़ा-नांगल डैम जैसे शुरुआती बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में काम किया। भारत के परमाणु कार्यक्रम में भी L&T का योगदान रहा और कंपनी ने ‘अप्सरा’ परमाणु रिएक्टर के निर्माण के लिए अहम उपकरण और इंजीनियरिंग सहायता दी।
बाद में L&T ने गुजरात के हजीरा में बड़ा इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स विकसित किया। हाल के वर्षों में कंपनी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (अटल सेतु) जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में भी काम किया। आज L&T इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन, डिफेंस, पावर और टेक्नोलॉजी समेत कई क्षेत्रों में भारत के विकास में योगदान दे रही है।
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