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चरखे से शुरू हुई आजाद भारत की आत्मनिर्भरता की कहानी 79 सालों में पहुंची चिप तक…

Namita Shukla

4 min read | अपडेटेड August 14, 2026, 09:14 IST

सारांश

पिछले दशक में भारत की कहानी एक और बड़े बदलाव की ओर बढ़ी है, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI योजनाओं के तहत 14 क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन, निवेश, निर्यात और रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है।

स्वतंत्रता दिवस

आजाद भारत की आत्मनिर्भरता की कहानी है चरखे से चिप तक... (Photo: Shutterstock)

भारत को अंग्रेजों से आजादी मिले हुए कुल 79 साल हो गए हैं। 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ था, और इस साल 15 अगस्त को हम सभी भारतीय 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहे हैं। इन 79 सालों में क्या कुछ बदला है, किस तरह से भारत ने अपनी आत्मनिर्भरता से दुनिया भर में मिसाल कायम की है और किस तरह से वह प्रगति के पथ पर सवार है, इसके तमाम उदाहरण हैं। 15 अगस्त सिर्फ आजादी का जश्न नहीं है, बल्कि यह उस भारत की कहानी को याद करने का दिन भी है, जिसने पिछले 79 सालों में अपनी अर्थव्यवस्था और कारोबारी क्षमता को एक नई पहचान दी है। 1947 में देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी, अपने पैरों पर खड़ा होना। उस दौर में चरखा आत्मनिर्भरता, स्वदेशी और स्थानीय उत्पादन का प्रतीक था। आज वही भारत सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन और हाई-टेक मैनुफैक्चरिंग की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत की अर्थव्यवस्था की चरखे से चिप तक की कहानी बहुत दिलचस्प भी है।

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1947: चरखे से शुरू हुआ आत्मनिर्भरता का सपना

आजादी के समय भारत की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि और छोटे स्तर के उत्पादन पर निर्भर थी। महात्मा गांधी के स्वदेशी विचारों में चरखे की खास जगह थी। चरखा सिर्फ कपड़ा बनाने का साधन नहीं था, बल्कि यह संदेश देता था कि भारत अपनी जरूरतों के लिए खुद उत्पादन करने की क्षमता विकसित कर सकता है।

आजादी के बाद इसी सोच ने देश की औद्योगिक नीति को प्रभावित किया। सरकार ने भारी उद्योग, मशीनरी, बिजली, इस्पात और पब्लिक सेक्टर की कंपनियों के विकास पर जोर दिया। मकसद था कि भारत धीरे-धीरे आयात पर निर्भरता कम करे और अपनी औद्योगिक क्षमता तैयार करे।

1960 से 1999: औद्योगिक भारत की नींव

1961 से लेकर 1999 के बीच भारत की औसत सालाना औद्योगिक वृद्धि 5.6% थी। इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशन्स (ICRIER) 2003 में छपी एक रिपोर्ट भारतः इकोनॉमिक ग्रोथ में दिए आंकड़ों के मुताबिक 1961-70 के दौरान भारत के उद्योग क्षेत्र की औसत सालाना वृद्धि 5.5% रही, जबकि 1971-80 के दौरान यह 4.1% रही। 1961-1999 की लंबी अवधि में औद्योगिक क्षेत्र की औसत सालाना वृद्धि 5.6% दर्ज की गई। सरकार के पुराने इकोनॉमिक सर्वे के आंकड़ों में भी उस दौर की उद्योग और मैनुफैक्चरिंग गतिविधियों की साल-दर-साल तस्वीर मिलती है। इस दौर में भारत ने इस्पात, इंजीनियरिंग, मशीनरी, बिजली और अन्य बुनियादी उद्योगों की क्षमता बढ़ाई। यह वह समय था जब देश की औद्योगिक नींव तैयार हो रही थी।

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1991: कारोबार के लिए बदला माहौल

1991 भारत की आर्थिक यात्रा का एक बड़ा मोड़ बना। आर्थिक संकट के बीच देश ने आर्थिक सुधारों और उदारीकरण का रास्ता अपनाया। निजी सेक्टर की भूमिका बढ़ी, विदेशी निवेश के लिए रास्ते खुले और भारतीय कंपनियों को ग्लोबल मार्केट से जुड़ने के नए मौके मिले।

2000 के बाद: आईटी सर्विसेज का ग्लोबल टैलेंट हब बना भारत

21वीं सदी में भारत की पहचान सिर्फ पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रही। आईटी ने भारत को दुनिया के सर्विस मार्केट में मजबूत जगह दिलाई। सॉफ्टवेयर, डिजिटल सर्विसेज और टेक्नोलॉजी आधारित कारोबार तेजी से बढ़े। भारत की आर्थिक कहानी में यह बदलाव महत्वपूर्ण था। जिस देश ने कभी विदेशी मशीनों और तकनीक पर निर्भरता कम करने के लिए औद्योगिक आधार बनाया था, वही देश अब दुनिया के लिए डिजिटल सर्विसेज उपलब्ध कराने लगा।

मोबाइल से सेमीकंडक्टर तक

पिछले दशक में भारत की कहानी एक और बड़े बदलाव की ओर बढ़ी है, इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI योजनाओं के तहत 14 क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन, निवेश, निर्यात और रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। 31 दिसंबर 2025 तक इन योजनाओं के तहत 2.16 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश, 20.41 लाख करोड़ रुपये से अधिक उत्पादन/बिक्री, 8.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक निर्यात और 14.39 लाख से ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार दर्ज किए गए। भारत की औद्योगिक कहानी सिर्फ बड़ी कंपनियों की कहानी नहीं है। छोटे और मध्यम कारोबार भी इसकी रीढ़ हैं।

इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार MSME क्षेत्र देश के GDP में 31.1%, मैन्युफैक्चरिंग में 35.4% और निर्यात में लगभग 48.58% योगदान देता है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसी साल जुलाई में देश के सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैनुफैक्चरिंग इकोसिस्टम डेवलप करने के लिए सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी है। इसके लिए कुल 1,27,500 करोड़ रुपये का बजट अलॉट किया गया है। सेमीकॉन 2.0 चिप डिजाइन में मिली शुरुआती सफलता पर आधारित होगा। 105 स्टार्टअप पहले ही चिप्स विकसित करना शुरू कर चुके हैं और अब डिजाइन प्रणाली को और मजबूत बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इसके अलावा, रणनीतिक और व्यावसायिक उत्पादों के विकास के लिए मूलभूत तत्वों की पहचान की जा चुकी है।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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