return to news
  1. Autism के इलाज में स्टेम सेल थेरेपी पर रोक, स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी जारी

बिजनेस न्यूज़

Autism के इलाज में स्टेम सेल थेरेपी पर रोक, स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवाइजरी जारी

Upstox

3 min read | अपडेटेड September 17, 2026, 15:14 IST

सारांश

मंत्रालय ने ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। ऑटिज्म के इलाज के लिए किसी भी तरह की स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल अभी सिर्फ ऐसे क्लिनिकल ट्रायल में किया जा सकता है, जिन्हें जरूरी नियामकीय मंजूरी मिली हो।

Cell Therapy

मंत्रालय ने ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्टेम सेल थेरेपी को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नया एडवाइजरी जारी किया है। 16 सितंबर 2026 को जारी इस एडवाइजरी में साफ किया गया है कि स्टेम सेल थेरेपी को सामान्य या नियमित इलाज के तौर पर सिर्फ उन्हीं बीमारियों और स्थितियों में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिन्हें मंत्रालय ने मंजूरी दी है। बता दें कि स्टेम सेल थेरेपी शरीर की खराब हो चुकी कोशिकाओं को नई और स्वस्थ कोशिकाओं से बदलने का एक आधुनिक इलाज है।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

ऑटिज्म के इलाज में स्टेम सेल थेरेपी पर रोक

मंत्रालय ने ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। ऑटिज्म के इलाज के लिए किसी भी तरह की स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल अभी सिर्फ ऐसे क्लिनिकल ट्रायल में किया जा सकता है, जिन्हें जरूरी नियामकीय मंजूरी मिली हो। यानी इसे सामान्य इलाज, रूटीन मेडिकल सर्विस या कमर्शियल ट्रीटमेंट के तौर पर मरीजों को नहीं दिया जा सकता।

यह निर्देश नेशनल गाइडलाइंस फॉर स्टेम सेल रिसर्च, 2017 के तहत लागू हैं। ये गाइडलाइंस इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (DBT) ने मिलकर जारी की थीं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एडवाइजरी

स्वास्थ्य मंत्रालय की यह एडवाइजरी सुप्रीम कोर्ट के 30 जनवरी 2026 के फैसले के बाद जारी की गई है। यह फैसला Yash Charitable Trust & Ors. बनाम Union of India & Ors. मामले में आया था। मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को सभी संबंधित राज्य और जिला नियामक अधिकारियों के साथ-साथ सरकारी और निजी क्लिनिकल संस्थानों तक पहुंचाया जाए।

बिना मंजूरी इलाज देने पर कार्रवाई

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्टेम सेल थेरेपी से जुड़े नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि कानून और तय नियमों का पालन नहीं करने पर पेशेवर कदाचार के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा Clinical Establishments Act, 2010 की संबंधित धाराओं के तहत रजिस्ट्रेशन रद्द करने और जुर्माने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।

NMC ने भी जारी किया था एडवाइजरी

नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने भी 5 सितंबर 2026 को जारी अपनी एडवाइजरी में स्टेम सेल थेरेपी को लेकर इसी तरह की स्थिति दोहराई थी। NMC के मुताबिक, स्टेम सेल थेरेपी को सामान्य इलाज के तौर पर सिर्फ मंत्रालय से मंजूर संकेतों यानी approved indications के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है।

मंजूर दायरे से बाहर स्टेम सेल थेरेपी की बिना अनुमति देना, लिखना, प्रचार करना या विज्ञापन करना पेशेवर कदाचार माना जा सकता है। NMC ने राज्य मेडिकल काउंसिलों से कहा है कि नियमों के उल्लंघन की शिकायत मिलने पर मामले की जांच करें और प्रक्रिया के तहत उल्लंघन साबित होने पर उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करें।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

अगला लेख