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US हाउस में पास हुआ रशिया सैन्क्शन्स बिल, भारत ने दिया जवाब, चार पॉइंट्स में क्लियर की अपनी बात

Namita Shukla

4 min read | अपडेटेड September 17, 2026, 14:25 IST

सारांश

हाउस में हुई वोटिंग से दोनों पार्टियों का समर्थन दिखा; कुल 58 डेमोक्रेट्स ने बिल के पक्ष में वोट किया, जबकि 152 ने इसके खिलाफ वोट किया। रिपब्लिकन में से 203 ने पक्ष में और सात ने विरोध में वोट किया।

भारत-अमेरिका

रशिया सैंक्शन्स बिल को लेकर क्या आया भारत सरकार का रिऐक्शन? (Photo: Shutterstock)

US हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाला एक बिल पास किया है। इस बिल से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत और चीन समेत रूस के तेल और गैस के बड़े खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा। बुधवार को 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' को 262-159 वोटों से मंजूरी मिली, जिसके बाद इसे ट्रंप के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया। सीनेट ने अगस्त में भारी बहुमत (86-11 वोटों) से इस कानून को मंजूरी दी थी। दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा आगे बढ़ाए गए इस कानून का मकसद यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। भारत सरकार की ओर से इस मामले में जवाब आया है। भारत सरकार ने अमेरिकी कांग्रेस में रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून (Sanctioning Russia and Iran Act) के पारित होने पर क्या कुछ कहा है, चलिए समझते हैं। भारत सरकार की ओर से आए बयान में चार अहम बातें हैं, 1- हम इस मामले में आगे होने वाली गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं।

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2- जैसा कि पहले भी कई बार कहा गया है, भारत अपने 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वह अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा प्राप्त करके और बाजार की बदलती स्थितियों के आधार पर ऐसा करना जारी रखेगा।
3- हाल के महीनों में अमेरिकी अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। भारतीय पक्ष ने बहुत स्पष्ट रूप से बताया है कि इसके न केवल द्विपक्षीय संबंधों पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी क्या असर पड़ सकते हैं।
4- भारतीय पक्ष ने अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का अपना संकल्प भी स्पष्ट कर दिया है। सरकार इन घटनाक्रमों के असर से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी।

क्या है पूरा मामला?

ग्राहम ने अप्रैल 2025 में यह मूल कानून पेश किया था और जुलाई में अपनी मृत्यु से पहले व्हाइट हाउस का समर्थन हासिल करने के लिए ट्रंप प्रशासन के साथ इसमें बदलावों पर बातचीत की थी। इस बिल के तहत, US राष्ट्रपति को उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार होगा जो रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं। इस उपाय में उन देशों को छूट दी गई है जो रूस से कुल नेचुरल गैस एक्सपोर्ट का 15% से कम हिस्सा इम्पोर्ट करते हैं और जो इस इम्पोर्ट को कम करने के लिए अहम कदम उठा रहे हैं।

भारत और चीन की बढ़ सकती हैं मुश्किलें?

भारत और चीन रूसी कच्चे तेल के बड़े खरीदार हैं, इसलिए वे उन देशों में शामिल हैं जिन पर अतिरिक्त टैरिफ लग सकता है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के आंकड़ों के अनुसार, चीन रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, जबकि भारत दूसरे नंबर पर है। यह कानून खुद 100% टैरिफ नहीं लगाता, बल्कि ट्रंप को इन्हें लगाने का अधिकार देता है। यह बिल रूसी अधिकारियों, रईस कारोबारियों (ओलिगार्क्स), उनके परिवार के सदस्यों, बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ-साथ मॉस्को के युद्ध प्रयासों का समर्थन करने वाली संस्थाओं पर भी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाता है। यह खास तौर पर रूस के तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ को निशाना बनाता है, जिसमें पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने के लिए रूसी तेल और अन्य सामानों की ढुलाई में शामिल जहाज, मालिक, ऑपरेटर, बीमाकर्ता और अन्य संस्थाएं शामिल हैं।

वोटिंग का नतीजा

हाउस में हुई वोटिंग से दोनों पार्टियों का समर्थन दिखा; कुल 58 डेमोक्रेट्स ने बिल के पक्ष में वोट किया, जबकि 152 ने इसके खिलाफ वोट किया। रिपब्लिकन में से 203 ने पक्ष में और सात ने विरोध में वोट किया। बहस के दौरान रिपब्लिकन प्रतिनिधि माइकल मैककॉल ने कहा, ‘इन देशों को यह तय करना है कि क्या वे पुतिन की आक्रामकता को बढ़ावा देते रहेंगे।’ डेमोक्रेटिक हाउस माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफरीज ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेट्स यूक्रेन का समर्थन जारी रखेंगे, लेकिन तर्क दिया कि यह बिल उस लक्ष्य को हासिल करने का रास्ता नहीं दिखाता है। ग्राहम ने प्रतिबंधों के पैकेज पर एक साल से ज्यादा समय तक काम किया था और अपनी मौत से कुछ समय पहले, वे ट्रंप प्रशासन के साथ इसके अपडेटेड वर्शन को आगे बढ़ाने पर सहमत हो गए थे। उस में वोटिंग के बाद, डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह कानून रूस की अर्थव्यवस्था और उससे तेल खरीदने वालों पर दबाव डालेगा। वोटिंग के बाद ब्लूमेंथल ने कहा, ‘चीन और भारत... बेहतर होगा कि आप अपना रवैया सुधारें। अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदें।’

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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