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3 min read | अपडेटेड August 21, 2026, 16:12 IST
सारांश
भारत में 10% तक चीनी हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को ऑटोमैटिक रूट से निवेश की मंजूरी मिलने के बाद 4,895.65 करोड़ रुपये के 29 FDI प्रस्ताव मिले हैं। वित्त मंत्रालय ने 1 मई 2026 को फेमा के तहत यह ढील दी थी।

ऑटोमैटिक रूट से विदेशी निवेश की ढील के बाद भारत में 4,895 करोड़ रुपये के 29 FDI प्रस्ताव आए।
भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और बिजनस करने को आसान बनाने के लिए सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों के सकारात्मक नतीजे दिखने लगे हैं। 10% तक चीनी हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को ऑटोमैटिक रूट से निवेश की अनुमति देने के फैसले के बाद से अब तक देश में लगभग 4,895.65 करोड़ रुपये के 29 प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI प्रस्ताव मिल चुके हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी है। वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम यानी फेमा के तहत नियमों में बदलाव को 1 मई 2026 को अधिसूचित किया था। इस नए कदम से भारत में विदेशी पूंजी के आने का रास्ता काफी आसान और तेज हो गया है।
अधिकारी के अनुसार यह पूरा निवेश किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई प्रमुख और आधुनिक सेक्टर्स में हुआ है। इनमें सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई, सूचना और संचार, मैन्युफैक्चरिंग, फार्मास्यूटिकल, डेटा सेंटर और ट्रांसपोर्ट सर्विसेज जैसे कई बड़े सेक्टर्स शामिल हैं। इन सेक्टर्स में आ रहे विदेशी फंड से देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी को नई मजबूती मिलेगी। नए नियमों के आने के बाद इन क्षेत्रों में काम करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए भारत में एंट्री करना जियादा आसान हो गया है।
भारत में आए यह 29 निवेश प्रस्ताव दुनिया के अलग अलग हिस्सों में स्थित निवेशकों और संस्थाओं से प्राप्त हुए हैं। इनमें मुख्य रूप से मॉरीशस, अमेरिका, कोरिया, जापान, सिंगापुर, लक्जमबर्ग और केमैन आइलैंड्स में स्थित निवेशक शामिल हैं। मई 2026 में अधिसूचित किए गए संशोधित नियमों से ऐसे मामलों में पहले से सरकारी मंजूरी लेने की जरूरत पूरी तरह से खत्म हो गई है। अब निवेशक तय रिपोर्टिंग आवश्यकताओं का पालन करते हुए ऑटोमैटिक रूट से सीधा निवेश कर सकते हैं। इससे सौदों में लगने वाला समय घटा है और निवेशकों के बीच अनिश्चितता कम हुई है।
संशोधित फेमा नियमों के अनुसार चीन या हांगकांग की 10% तक हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियां उन सभी सेक्टर्स में भारत में निवेश करने के लिए पात्र होंगी, जहां सेक्टर से जुड़ी शर्तों के तहत ऑटोमैटिक रूट से FDI की अनुमति दी गई है। हालांकि FDI नियमों में दी गई यह ढील चीन या हांगकांग में सीधे रजिस्टर्ड संस्थाओं पर लागू नहीं होगी। इसके अलावा भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले किसी भी अन्य देश में रजिस्टर्ड संस्थाओं पर यह छूट लागू नहीं की जाएगी। इससे भारत की सुरक्षा और आर्थिक हितों का संतुलन बना रहेगा।
भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले पड़ोसी देशों में चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान शामिल हैं। पहले लागू नियमों के मुताबिक इन देशों के शेयरधारकों की एक भी शेयर की हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को भारत के किसी भी सेक्टर में निवेश करने के लिए अनिवार्य रूप से सरकार से मंजूरी लेनी पड़ती थी। नए बदलावों से सिर्फ उन विदेशी कंपनियों को राहत मिली है जिनमें चीनी या हांगकांग की हिस्सेदारी केवल 10% तक सीमित है और वे किसी तीसरे देश में रजिस्टर्ड हैं। इससे भारत में कारोबार करने की सुगमता यानी ईज ऑफ डूइंग बिजनस को काफी बढ़ावा मिला है।
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