return to news
  1. BRICS Summit 2026: इन मुद्दों पर पूरी बात करने दिल्ली आ रहे दुनिया की आधी आबादी के नेता, भारत के लिए क्यों है खास?

बिजनेस न्यूज़

BRICS Summit 2026: इन मुद्दों पर पूरी बात करने दिल्ली आ रहे दुनिया की आधी आबादी के नेता, भारत के लिए क्यों है खास?

Upstox

3 min read | अपडेटेड September 10, 2026, 14:36 IST

सारांश

नई दिल्ली का भारत मंडपम 12 और 13 सितंबर 2026 को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत इस साल ब्रिक्स का अध्यक्ष है। इस दो दिवसीय सम्मेलन में दुनिया के 11 प्रमुख देशों के नेता वैश्विक मुद्दों और आपस में आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।

18th-brics-summit-new-delhi

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी।

नई दिल्ली में इस वीकेंड 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का भव्य आयोजन होने जा रहा है। 12 और 13 सितंबर 2026 को प्रगति मैदान के भारत मंडपम में यह बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। भारत इस साल ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता कर रहा है। इस बार सम्मेलन की थीम "बिल्डिंग फॉर रेजिजेंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी" तय की गई है। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में ब्रिक्स के सदस्य देशों, पार्टनर देशों और आमंत्रित राष्ट्रों के शीर्ष नेता शामिल होंगे। सभी नेता वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे और आपसी सहयोग को नया आयाम देंगे।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

ब्रिक्स के सफर में भारत की भूमिका

ब्रिक्स की शुरुआत साल 2006 में एक अनौपचारिक समूह के रूप में हुई थी और इसका पहला औपचारिक सम्मेलन 2009 में आयोजित किया गया था। साल 2026 ब्रिक्स की स्थापना का 20वां साल है, जो इसके सफर का एक बड़ा पड़ाव है। भारत इस समूह का संस्थापक सदस्य रहा है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में भी इसकी अध्यक्षता कर चुका है। 1 जनवरी 2026 को भारत ने चौथी बार यह जिम्मेदारी संभाली। इस साल भारत की अध्यक्षता में देश के 25 से ज्यादा शहरों में करीब 350 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। सम्मेलन की शुरुआत से ठीक पहले 9 और 10 सितंबर को मुंबई में ब्रिक्स देशों के वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक के गवर्नरों की अंतिम बैठक भी रखी गई।

दुनिया की आधी आबादी की आवाज है ये समिट

ब्रिक्स दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाने वाला बेहद मजबूत मंच है। जनवरी 2024 में हुए नए विस्तार के बाद अब इसमें भारत, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। आंकड़ों के हिसाब से देखें तो यह समूह दुनिया की लगभग 49% आबादी और वैश्विक जीडीपी के 39% हिस्से को कवर करता है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी इसकी 23% हिस्सेदारी है।

भारत के लिए ब्रिक्स एक ऐसा जरिया है जिससे वह चीन और रूस जैसी बड़ी ताकतों के साथ-साथ विकासशील देशों से सीधा जुड़ा रहता है। इसके माध्यम से भारत ग्लोबल साउथ की आवाज बनकर सामने आता है और संयुक्त राष्ट्र, आईएमएफ तथा वर्ल्ड बैंक जैसी संस्थाओं में जरूरी सुधारों की वकालत करता है।

व्यापारिक लक्ष्य और वैश्विक चुनौतियां

अपनी अध्यक्षीय अवधि के दौरान भारत ने सदस्य देशों के बीच संतुलित व्यापार, सर्विसेज में ट्रेड बढ़ाने और छोटे बिजनेस के लिए आसानी से फाइनेंस उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। हाल ही में जयपुर में हुई व्यापार मंत्रियों की बैठक में MSME को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने के सिद्धांतों को मंजूरी दी गई थी। हालांकि, इस समय मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने तेल बाजार और शिपिंग रूट्स को प्रभावित किया है, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ा है। ऐसे माहौल में ईरान और यूएई जैसे अलग-अलग हितों वाले देशों को एक साथ लेकर चलना और वैश्विक सप्लाई चेन को बनाए रखना भारत की कूटनीतिक कुशलता की बड़ी परीक्षा होगी।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

अगला लेख