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  1. Loss Carry Forward क्या होता है? ITR फाइल न करने पर क्यों खत्म हो जाता है फायदा?

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Loss Carry Forward क्या होता है? ITR फाइल न करने पर क्यों खत्म हो जाता है फायदा?

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड June 18, 2026, 17:01 IST

सारांश

Loss Carry Forward का मतलब है कि अगर किसी वित्त वर्ष में आपको निवेश पर नुकसान हुआ है और उस नुकसान को उसी साल पूरी तरह एडजस्ट नहीं किया जा सका, तो आप उसे आने वाले वर्षों के लिए आगे ले जा सकते हैं।

ITR

समय पर ITR दाखिल करके नुकसान को भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।

Loss Carry Forward: शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या अन्य निवेशों में नुकसान होने पर कई लोग सोचते हैं कि अब ITR भरने की जरूरत नहीं है। लेकिन ऐसा करना महंगा पड़ सकता है। इसकी वजह है लॉस कैरी फॉरवर्ड का नियम, जो निवेशकों को भविष्य में टैक्स बचाने का मौका देता है। यहां हम समझेंगे कि लॉस कैरी फॉरवर्ड क्या है और इसकी क्या अहमियत है।
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क्या होता है Loss Carry Forward?

Loss Carry Forward का मतलब है कि अगर किसी वित्त वर्ष में आपको निवेश पर नुकसान हुआ है और उस नुकसान को उसी साल पूरी तरह एडजस्ट नहीं किया जा सका, तो आप उसे आने वाले वर्षों के लिए आगे ले जा सकते हैं। भविष्य में जब आपको मुनाफा होगा, तब उस पुराने नुकसान को मुनाफे से घटाकर टैक्स योग्य आय कम की जा सकती है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी निवेशक को एक साल में 3 लाख रुपये का कैपिटल लॉस हुआ और अगले साल 6 लाख रुपये का कैपिटल गेन हुआ, तो वह पुराने 3 लाख रुपये के नुकसान को मुनाफे से घटाकर केवल 3 लाख रुपये पर टैक्स दे सकता है।

ITR फाइल करना क्यों जरूरी है?

आयकर नियमों के मुताबिक नुकसान को आगे ले जाने का लाभ तभी मिलता है जब टैक्सदाता तय समय सीमा के भीतर ITR दाखिल करे। अगर रिटर्न समय पर फाइल नहीं किया गया, तो नुकसान को Carry Forward करने का अधिकार खत्म हो जाता है।

यानी भले ही आपने वास्तव में नुकसान उठाया हो, लेकिन समय पर ITR न भरने की वजह से भविष्य में उस नुकसान का कोई टैक्स लाभ नहीं मिलेगा।

ITR नहीं भरा तो क्या होगा?

मान लीजिए FY26 में आपको 3 लाख रुपये का नुकसान हुआ और आपने ITR दाखिल नहीं किया। अगले साल आपको 6 लाख रुपये का मुनाफा हो जाता है। ऐसी स्थिति में आप पुराने नुकसान को मुनाफे से नहीं घटा पाएंगे और पूरे 6 लाख रुपये पर टैक्स देना पड़ सकता है। वहीं, अगर आपने समय पर ITR फाइल किया होता, तो केवल 3 लाख रुपये के शुद्ध मुनाफे पर टैक्स देना पड़ता।

किन निवेशों पर लागू होता है यह नियम?

यह नियम शेयरों, इक्विटी और डेट म्यूचुअल फंड, गोल्ड ETF समेत लगभग सभी कैपिटल एसेट्स पर लागू होता है। इसलिए किसी भी निवेश में नुकसान होने पर उसे नजरअंदाज करने के बजाय ITR में दिखाना बेहतर माना जाता है।

कितने साल तक आगे ले जा सकते हैं नुकसान?

आमतौर पर कैपिटल लॉस को 8 साल तक आगे ले जाकर भविष्य के मुनाफे के साथ एडजस्ट किया जा सकता है। हालांकि, सट्टा कारोबार से जुड़े नुकसान के लिए अलग नियम हैं और उन्हें केवल 4 साल तक ही आगे ले जाया जा सकता है।

अगर आपको किसी साल निवेश में नुकसान हुआ है, तो उसे बेकार समझने की गलती न करें। समय पर ITR दाखिल करके उस नुकसान को भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है। यही Loss Carry Forward का सबसे बड़ा फायदा है, जो आने वाले वर्षों में आपकी टैक्स देनदारी कम करने में मदद कर सकता है।

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