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  1. VB-G RAM G 1 जुलाई से होगी लागू, निरस्त हो जाएगी Mahatma Gandhi NREGA स्कीम, क्या-क्या बदलेगा?

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VB-G RAM G 1 जुलाई से होगी लागू, निरस्त हो जाएगी Mahatma Gandhi NREGA स्कीम, क्या-क्या बदलेगा?

Namita Shukla

3 min read | अपडेटेड May 11, 2026, 16:37 IST

सारांश

कई दशकों से मजदूरी-आधारित रोजगार कार्यक्रम भारत की ग्रामीण विकास रणनीति का अभिन्न हिस्सा रहे हैं, जिन्होंने अल्प-रोजगार और आजीविका असुरक्षा का सामना कर रहे ग्रामीण परिवारों को आय सहायता दी है।

VB-G RAM G योजना

1 जुलाई से लागू होगी VB-G RAM G योजना

भारत सरकार ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin): VB–G RAM G) अधिनियम, 2025 को देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में 1 जुलाई 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम के लागू होने के साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (महात्मा गांधी नरेगा, Mahatma Gandhi NREGA), 2005 उसी डेट से निरस्त हो जाता है। यह भारत के ग्रामीण विकास के फ्रेमवर्क में बड़ा ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है और विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन के हिसाब से एक इंटीग्रेटेड, फ्यूचर रेडी और प्रोडक्टिविटी बेस्ड ग्रामीण बदलाव के रूप में भी देखा जा रहा है। इस अधिनियम का लागू होना महात्मा गांधी नरेगा व्यवस्था से एक आधुनिक ग्रामीण विकास संरचना की ओर ऐतिहासिक ट्रांजिशन का संकेत माना जा है, जो आजीविका सुरक्षा, स्थायी परिसंपत्ति निर्माण, प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशासन, कन्वर्जेंस-आधारित योजना और जलवायु अनुकूलनता को एक साथ जोड़ती है।

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यह अधिनियम हर ग्रामीण परिवार, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, को हर फाइनेंशियल ईयर में 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी देता है। इस बढ़ी हुई गारंटी से ग्रामीण परिवारों की आय, आजीविका सुरक्षा, ग्राम स्तर की अवसंरचना (इन्फ्रॉस्ट्रक्चर) निर्माण और सतत ग्रामीण विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही, इसका उद्देश्य ऐसी स्थायी और उत्पादक ग्रामीण अवसंरचना का निर्माण करना है, जो जल सुरक्षा, रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रामीण आजीविका, स्थानीय आर्थिक विकास और जलवायु संबंधी चुनौतियों के खिलाफ अनुकूलनता को मजबूत करे।

क्या है पूरा बैकग्राउंड और क्यों पड़ी सुधार की जरूरत?

कई दशकों से मजदूरी-आधारित रोजगार कार्यक्रम भारत की ग्रामीण विकास रणनीति का अभिन्न हिस्सा रहे हैं, जिन्होंने अल्प-रोजगार और आजीविका असुरक्षा का सामना कर रहे ग्रामीण परिवारों को आय सहायता दी है। समय के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सामाजिक सुरक्षा के विस्तार, फिजिकल और डिजिटल संपर्क में सुधार, वित्तीय समावेशन की मजबूती और आजीविका के विविधीकरण के कारण अहम बदलाव हुए हैं। इन बदलावों ने मौजूदा ग्रामीण रोजगार के फ्रेमवर्क को समकालीन आवश्यकताओं, आकांक्षाओं और विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन के हिसाब से फिर से संतुलित करने की जरूरत पैदा की है। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए आजीविका गारंटी के फ्रेमवर्क को मजबूत करने के लिए वैधानिक रोजगार गारंटी को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करने का प्रस्ताव किया गया है। इस बढ़ी हुई गारंटी का उद्देश्य ग्रामीण विकास की तेज गति को समर्थन देना, अधिक आय सुरक्षा प्रदान करना और विस्तारित रोजगार अवसरों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को सशक्त बनाना है।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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