पर्सनल फाइनेंस

3 min read | अपडेटेड May 11, 2026, 16:12 IST
सारांश
अप्रैल महीने में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के आंकड़ों में बड़ा बदलाव दिखा है। इक्विटी स्कीम्स में निवेश में मामूली गिरावट आई है, लेकिन स्मॉलकैप और मिडकैप फंड्स में निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। कुल एयूएम 11 पर्सेंट बढ़कर 81.92 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जो एक नया रिकॉर्ड है।

शेयर बाजार की अनिश्चितता के बावजूद म्यूचुअल फंड निवेशकों ने अपना उत्साह कम नहीं किया है। | Image: Shutterstock.
भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए अप्रैल का महीना काफी हलचल भरा रहा है। शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितता के बावजूद निवेशकों ने अपना भरोसा बनाए रखा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी एयूएम अब 81.92 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। मार्च के मुकाबले इसमें करीब 11.1 पर्सेंट की शानदार बढ़त देखी गई है।
अप्रैल के दौरान इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में कुल 38,426 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया है। मार्च महीने में यह आंकड़ा 40,366 करोड़ रुपये था, जिसका मतलब है कि महीने-दर-महीने आधार पर इसमें लगभग 4.8 पर्सेंट की गिरावट आई है। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा हाथ लार्जकैप फंड्स का रहा है। लार्जकैप कैटेगरी में आने वाला निवेश मार्च के 2,997.8 करोड़ रुपये से घटकर अप्रैल में 2,524.6 करोड़ रुपये रह गया है, जो करीब 15.8 पर्सेंट की बड़ी गिरावट को दिखाता है।
भले ही लार्जकैप से निवेश कम हुआ हो, लेकिन छोटे और मझोले शेयरों वाली स्कीम्स में निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया है। स्मॉलकैप फंड्स में अप्रैल के दौरान 6,885.9 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो मार्च के मुकाबले लगभग 9.9 पर्सेंट ज्यादा है। इसी तरह मिडकैप फंड्स में भी 8 पर्सेंट की बढ़त के साथ 6,551.4 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। यह आंकड़े बताते हैं कि निवेशक अब भी बेहतर रिटर्न की उम्मीद में रिस्क लेने को तैयार हैं और उन्हें छोटी कंपनियों की ग्रोथ पर पूरा भरोसा है। सेक्टर और थीम आधारित फंड्स में हालांकि निवेश थोड़ा कम हुआ है, जो मार्च के 2,699 करोड़ से गिरकर 1,949.4 करोड़ रुपये पर आ गया है।
ग्लोबल मार्केट में बढ़ती अनिश्चितता और सोने की कीमतों में आए बदलाव का असर गोल्ड ईटीएफ पर भी साफ दिखा है। अप्रैल में गोल्ड ईटीएफ में 3,040.3 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जो मार्च के 2,266 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी ज्यादा है। सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की डिमांड बढ़ती दिख रही है। वहीं डेट फंड्स की बात करें तो कॉर्पोरेट बॉन्ड फंड्स में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मार्च में जहां इस कैटेगरी से 15,292.6 करोड़ रुपये बाहर निकले थे, वहीं अप्रैल में इसमें 6,196.5 करोड़ रुपये का नया निवेश आया है। हालांकि, लिक्विड फंड्स से 1.65 लाख करोड़ रुपये की बड़ी निकासी भी देखी गई है।
म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के इस ट्रेंड पर एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह स्थिति सामान्य है। ट्रस्ट म्यूचुअल फंड के सीईओ संदीप बागला का कहना है कि दुनिया भर में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बनी अनिश्चितता की वजह से इक्विटी इनफ्लो में थोड़ी नरमी आई है। उनके मुताबिक, निवेशक अब एक साथ पैसा लगाने के बजाय तीन से चार महीनों में अपना निवेश बांट रहे हैं। वहीं एसबीआई म्यूचुअल फंड के डिप्टी एमडी डीपी सिंह का कहना है कि इक्विटी फ्लो मोटे तौर पर स्थिर बना हुआ है। उनके अनुसार एसआईपी का ट्रेंड लगातार जारी है और अप्रैल के आंकड़े किसी कमजोरी का संकेत नहीं हैं, बल्कि यह बिजनेस का एक सामान्य हिस्सा है।
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