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  1. AI और डेटा सेंटर की रफ्तार से भागेगा केबल कारोबार, इन 3 कंपनियों को मिल रहा बड़ा मौका

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AI और डेटा सेंटर की रफ्तार से भागेगा केबल कारोबार, इन 3 कंपनियों को मिल रहा बड़ा मौका

विकास तिवारी

4 min read | अपडेटेड July 29, 2026, 11:17 IST

सारांश

भारत की 1 लाख करोड़ रुपये की वायर्स एंड केबल्स इंडस्ट्री को डेटा सेंटर के विस्तार से नया बूस्ट मिल रहा है। AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से अगले 6 से 8 सालों में 57,400 करोड़ रुपये का नया बाजार बनेगा।

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डेटा सेंटर और एआई के विस्तार से वायर्स एंड केबल्स इंडस्ट्री में मांग की नई लहर आई है।| Image: Shutterstock.

भारत की 1 लाख करोड़ रुपये की वायर्स एंड केबल्स इंडस्ट्री के लिए एक नया ग्रोथ इंजन सामने आया है। पावर, रियल एस्टेट और इंडस्ट्रियल कैपेक्स के साथ-साथ अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से डेटा सेंटर्स केबल्स की मांग बढ़ाने वाले प्रमुख जरिया बन गए हैं। केबल मैन्युफैक्चरिंग कंपनी पॉलीकैब के अनुसार, डेटा सेंटर की हर 1 मेगावाट क्षमता के लिए लगभग 3.5 करोड़ रुपये के खास केबल की जरूरत पड़ती है। अगले 6 से 8 सालों में 16.4 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता जुड़ने से इस सेक्टर में 57,400 करोड़ रुपये का नया बाजार तैयार होने का अनुमान है। क्रिसिल के मुताबिक इससे इंडस्ट्री का रेवेन्यू ग्रोथ 28 से 30% रह सकता है।

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आरआर केबल का केबल सेगमेंट पर है फोकस

वायर्स एंड केबल्स में काम करने वाली आरआर केबल ने पहली तिमाही में शानदार शुरुआत की है। पहली तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू साल दर साल 54% बढ़कर 3,168.2 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का EBITDA 99% बढ़कर 285.3 करोड़ रुपये रहा और मार्जिन 9% हो गया। वहीं नेट प्रॉफिट 129% बढ़कर 205.2 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। कंपनी के केबल बिजनेस का रेवेन्यू 57% बढ़कर 2,880 करोड़ रुपये रहा। कंपनी डेटा सेंटर्स को ग्रोथ का प्रमुख जरिया मान रही है। अपनी कैपेसिटी बढ़ाने के लिए आरआर केबल वित्त वर्ष 2026 से 2028 के बीच 1,200 करोड़ रुपये का कैपेक्स निवेश कर रही है, जिसका बड़ा हिस्सा केबल बिजनेस में लगेगा।

मार्केट लीडर पॉलीकैब इंडिया का बढ़ रहा दबदबा

इंडस्ट्री की लीडर पॉलीकैब इंडिया का रेवेन्यू पहली तिमाही में 39% बढ़कर 8,209.7 करोड़ रुपये रहा। कंपनी का EBITDA 32% बढ़कर 1,136.2 करोड़ रुपये और नेट प्रॉफिट 33% बढ़कर 796.7 करोड़ रुपये दर्ज हुआ। पॉलीकैब के मुताबिक, भारत में वर्तमान 1.6 गीगावाट के डेटा सेंटर बढ़कर अगले 5 से 8 सालों में 8 से 18 गीगावाट हो सकते हैं। 1 मेगावाट पर 3.5 करोड़ रुपये के केबल के हिसाब से यह 20,000 से 57,400 करोड़ रुपये का बड़ा अवसर है। इसमें 50 से 60% पारंपरिक केबल और बाकी ऑप्टिकल फाइबर की मांग रहती है। पॉलीकैब ने वोडाफोन आइडिया के डेटा सेंटर्स के लिए भी केबल सप्लाई की है।

HFCL का ऑप्टिकल फाइबर में कमाल

देश की प्रमुख ऑप्टिकल फाइबर केबल सप्लायर HFCL ने पहली तिमाही में जबरदस्त टर्नअराउंड दिखाया है। पिछले साल के 29.3 करोड़ रुपये के घाटे के मुकाबले कंपनी को इस बार 245.6 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ है। कंपनी का रेवेन्यू 120% बढ़कर 1,915 करोड़ रुपये और EBITDA बढ़कर 445.3 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन 23.3% पर पहुंच गया। डेटा सेंटर्स में ऑप्टिकल कनेक्टिविटी की मांग पूरी करने के लिए कंपनी अपनी क्षमता का विस्तार कर रही है और 580 करोड़ रुपये का बैकवर्ड इंटीग्रेशन प्रोजेक्ट लगा रही है। पहली तिमाही के अंत में कंपनी के पास 26,665 करोड़ रुपये का मजबूत ऑर्डर बुक था।

वैल्यूएशन और रिटर्न रेशियो के मामले में तीनों कंपनियों का प्रदर्शन अलग-अलग रणनीति को दिखाता है। इंडस्ट्री लीडर पॉलीकैब 33.2% ROCE और 23% ROE के साथ सबसे मजबूत स्थिति में है। वहीं आरआर केबल का ROCE 28.1% और ROE 21.3% बना हुआ है। एचएफसीएल के रिटर्न रेशियो फिलहाल सीमित हैं, लेकिन कंपनी के पास मौजूद बड़ा ऑर्डर बुक आगे रेवेन्यू विजिबिलिटी देता है। वैल्यूएशन के लिहाज से तीनों कंपनियां अपने तीन साल के मीडियन पीई मल्टीपल के आसपास कारोबार कर रही हैं। पॉलीकैब अपने बड़े पैमाने के दम पर आगे है, आरआर केबल प्रोजेक्ट कैपेसिटी बढ़ाने पर जोर दे रही है, जबकि एचएफसीएल ऑप्टिकल फाइबर सेक्टर में अपनी स्थिति मजबूत कर रही है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

विकास तिवारी
Vikash Tiwary is a finance journalist with 6+ years of newsroom experience. He is currently growing Upstox Hindi, crafting data-driven stories on stocks, personal finance, mutual funds, and global markets, while exploring how AI can simplify finance. His work spans Zee Business, TV9 Bharatvarsh, ABP News, India TV, and Inshorts. He also holds NISM certification.

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