पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड October 28, 2026, 17:03 IST
सारांश
घरेलू शेयर बाजार के अलावा कई इक्विटी म्यूचुअल फंड्स अपने पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करने के लिए विदेशी सिक्योरिटीज, REIT और InvITs में निवेश कर रहे हैं। वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक व्हाइटओक, एडलवाइस और फ्रैंकलिन के फंड्स इनमें टॉप पर हैं।

भारतीय इक्विटी म्यूचुअल फंड्स अब सिर्फ घरेलू शेयरों तक सीमित नहीं हैं।
इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के दिमाग में सिर्फ घरेलू कंपनियों के शेयर आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई ऐसे इक्विटी म्यूचुअल फंड्स भी हैं जो विदेशी शेयरों के साथ-साथ रियल एस्टेट और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी आपका पैसा लगाते हैं। म्यूचुअल फंड रिसर्च प्लेटफॉर्म वैल्यू रिसर्च के ताजा डाटा के मुताबिक, भारत में कुछ चुनिंदा इक्विटी स्कीम्स ऐसी हैं जो सामान्य इक्विटी और डेट के दायरे से बाहर निकलकर विदेशी सिक्योरिटीज, REIT और InvITs में बड़ा निवेश कर रही हैं। इस लिस्ट में व्हाइटओक कैपिटल डिविडेंड यील्ड फंड सबसे आगे है, जिसने अपने कुल एसेट्स का लगभग 80% हिस्सा ऐसे अलग तरह के एसेट्स में लगाया हुआ है।
इन अलग तरह के एसेट्स को समझना काफी आसान है। विदेशी सिक्योरिटीज में दुनिया भर के बाजारों में लिस्टेड ग्लोबल कंपनियों के शेयर और विदेशी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ईटीएफ शामिल होते हैं। वहीं REIT यानी रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट ऐसी संपत्तियों का संचालन करते हैं जिनसे नियमित कमाई होती है, जैसे कि बड़े ऑफिस स्पेस और शॉपिंग मॉल। इनके यूनिट्स भी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज जैसे बाजारों में खरीदे और बेचे जाते हैं। इसके अलावा InvITs यानी इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट हाईवे और बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क जैसे बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स से जुड़े होते हैं। म्यूचुअल फंड्स इनके जरिए इन प्रोजेक्ट्स से होने वाली कमाई में हिस्सेदारी हासिल करते हैं।
वैल्यू रिसर्च के सितंबर 2026 के पोर्टफोलियो आंकड़ों के अनुसार, व्हाइटओक कैपिटल डिविडेंड यील्ड फंड ने अपनी कुल नेट एसेट्स का 79.4% हिस्सा REIT और InvITs में लगाया है। इसमें बागमाने प्राइम ऑफिस REIT, नेक्सस सेलेक्ट ट्रस्ट, माइंडस्पेस बिजनेस पार्क्स REIT और नॉलेज रियल्टी ट्रस्ट जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके InvITs पोर्टफोलियो में क्यूब हाईवेज फंड, नेशनल हाईवेज इंफ्रा ट्रस्ट और वर्टिस इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट शामिल हैं। दूसरी ओर, एडलवाइस टेक्नोलॉजी फंड ने 26.9% और फ्रैंकलिन इंडिया टेक्नोलॉजी फंड ने 20.2% निवेश पूरी तरह विदेशी सिक्योरिटीज में किया है। एडलवाइस के पोर्टफोलियो में एनवीडिया और एप्पल जैसी दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां शामिल हैं।
इस लिस्ट में फ्रैंकलिन इंडिया डिविडेंड यील्ड फंड भी शामिल है, जिसका विदेशी सिक्योरिटीज और REIT में 19.8% एलोकेशन है। इसके मुख्य इनवेस्टमेंट्स में ताइवान की मीडियाटेक और एम्बेसी ऑफिस पार्क्स REIT हैं। इसके बाद व्हाइटओक कैपिटल मल्टी एसेट एलोकेशन फंड 19.6% हिस्सेदारी के साथ मौजूद है, जिसके पास वैनगार्ड एसएंडपी 500 ईटीएफ और क्यूब हाईवेज जैसी संपत्तियां हैं। इसके अलावा पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड ने 18.2%, कोटक पायनियर फंड ने 17.3%, डीएसपी मल्टी एसेट एलोकेशन फंड ने 17.2%, इनवेस्को इंडिया मल्टी एसेट एलोकेशन फंड ने 16.8% और व्हाइटओक कैपिटल इक्विटी सेविंग्स फंड ने 16.2% निवेश इन खास एसेट्स में किया हुआ है।
पारंपरिक इक्विटी म्यूचुअल फंड्स मुख्य रूप से भारतीय शेयर बाजार पर निर्भर रहते हैं। लेकिन इन विदेशी सिक्योरिटीज, REIT और InvITs के जरिए निवेशकों को विदेशों की बड़ी कंपनियों, कमर्शियल रियल एस्टेट और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में एक साथ हिस्सेदारी मिल जाती है। इससे निवेशकों का रिस्क केवल एक बाजार तक सीमित नहीं रहता और पोर्टफोलियो को अलग-अलग एसेट क्लास का मजबूत सपोर्ट मिलता है। यह उन निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है जो पारंपरिक तौर-तरीकों से हटकर नया डाइवर्सिफिकेशन तलाश रहे हैं।
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