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  1. RBI Loan Rules: सस्ते और महंगे लोन का खेल खत्म? बैंक और NBFC के लिए RBI का बड़ा ऐलान

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RBI Loan Rules: सस्ते और महंगे लोन का खेल खत्म? बैंक और NBFC के लिए RBI का बड़ा ऐलान

Upstox

3 min read | अपडेटेड August 13, 2026, 14:10 IST

सारांश

आरबीआई ने बैंकों और NBFC के लिए लोन पर ब्याज दरें तय करने का नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क पेश किया है। इसका मकसद कर्ज देने की प्रक्रिया को पारदर्शी और बेहतर बनाना है। यह नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का प्रस्ताव है, जिस पर 11 सितंबर 2026 तक सुझाव मांगे गए हैं।

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने लोन पर ब्याज दरें तय करने के लिए नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया। | Image: Shutterstock

भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने बैंकों और अन्य रेगुलेटेड लेंडर्स के लिए लोन पर ब्याज दरें तय करने का एक कॉमन और पारदर्शी फ्रेमवर्क पेश किया है। इस ड्राफ्ट फ्रेमवर्क का मुख्य मकसद कर्ज देने के तरीकों में पारदर्शिता लाना और सभी बैंकों में एक समान व्यवस्था तैयार करना है। आरबीआई का मानना है कि इस कदम से मॉनिटरी पॉलिसी का फायदा आम ग्राहकों तक आसानी से पहुंचेगा और लोन की कीमतें जोखिम के हिसाब से तय होंगी। इस ड्राफ्ट नियम पर 11 सितंबर 2026 तक जनता और एक्सपर्ट्स से सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद इन नियमों को 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है।

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लोन की कीमत तय करने का नया नियम

प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत बैंकों और वित्तीय संस्थानों को एक व्यापक बोर्ड अप्रूव्ड पॉलिसी बनानी होगी। यह पॉलिसी तय करेगी कि लोन पर ब्याज दरें कैसे तय की जाएंगी और उसमें बेंचमार्क तथा स्प्रेड के कौन से हिस्से शामिल होंगे। इस बोर्ड पॉलिसी की समीक्षा साल में कम से कम एक बार करना जरूरी होगा। फिक्स्ड और फ्लोटिंग दोनों तरह के लोन के लिए आरबीआई ने बेंचमार्क और रिस्क बेस्ड स्प्रेड पर आधारित ढांचा प्रस्तावित किया है। कोई भी बैंक या लेंडर तय बेंचमार्क से नीचे लोन की कीमत नहीं रख पाएगा। फ्लोटिंग रेट लोन के लिए बेंचमार्क और उसे रीसेट करने की तारीख लोन एग्रीमेंट में साफ लिखी होगी। आमतौर पर बेंचमार्क को हर तीन महीने से ज्यादा के अंतराल पर रीसेट नहीं किया जाएगा। इसके अलावा ब्याज की गणना डेली रिड्यूसिंग बैलेंस के आधार पर की जाएगी।

ग्राहकों के लिए क्या बदल जाएगा

बैंक ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा बदलाव फ्लोटिंग रेट लोन में आएगा। नए नियमों के अनुसार कमर्शियल बैंकों द्वारा दिए जाने वाले सभी फ्लोटिंग रेट पर्सनल या रिटेल लोन और MSME लोन को एक्सटर्नल बेंचमार्क से जोड़ना अनिवार्य होगा। एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़ने के कारण आरबीआई द्वारा नीतिगत दरों में किए गए बदलावों का असर सीधे ग्राहकों के लोन पर दिखेगा। पुराने लोन को इस नए ढांचे में शिफ्ट करने के लिए 1 अप्रैल 2029 तक का समय दिया जाएगा। हालांकि NBFC, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और कॉपरेटिव बैंकों को यह छूट होगी कि वे एक्सटर्नल बेंचमार्क से लोन जोड़ते हैं या नहीं। यानी NBFC से लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए यह अनिवार्य नहीं होगा।

छोटे लोन और किसानों के लिए खास राहत

आरबीआई ने छोटे लोन और माइक्रोफाइनेंस लोन लेने वालों के लिए खास सुरक्षा का प्रावधान किया है। लेंडर्स को एनुअल पर्सेंटेज रेट यानी APR की एक ऊपरी सीमा तय करनी होगी ताकि ग्राहकों से जरूरत से ज्यादा ब्याज या फीस न वसूली जाए। इस नियम के तहत 50,000 रुपये तक के पर्सनल लोन को छोटा लोन माना जाएगा। इसके अलावा छोटे और सीमांत किसानों को मिलने वाले शॉर्ट टर्म एग्री लोन के लिए भी एक बड़ा नियम बनाया गया है। ऐसे लोन पर कुल ब्याज, फीस और चार्ज की कुल रकम किसी भी हाल में मूलधन यानी प्रिंसिपल अमाउंट से ज्यादा नहीं हो सकती है। 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा डिपॉजिट वाले लेंडर्स के लिए इंटरनल बेंचमार्क मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स पर आधारित होगा और इसे हर महीने की पहली तारीख को पब्लिश करना होगा।

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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