पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड October 05, 2026, 19:54 IST
सारांश
पेंशन की रकम बिना रुकावट पाने के लिए पेंशनर्स को हर साल जीवन प्रमाण पत्र यानी लाइफ सर्टिफिकेट जमा करना होता है। 80 साल या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्गों के लिए 1 अक्टूबर से यह सुविधा शुरू हो गई है। वहीं 80 साल से कम उम्र के पेंशनर्स 1 नवंबर से अपना सर्टिफिकेट जमा कर सकेंगे।

पेंशनर्स के लिए जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
पेंशन पाने वाले सभी बुजुर्गों के लिए एक जरूरी अपडेट सामने आया है। पेंशन की रकम बिना किसी रुकावट के खाते में आती रहे, इसके लिए पेंशनर्स को हर साल अपना जीवन प्रमाण पत्र यानी लाइफ सर्टिफिकेट जमा करना होता है। सरकार ने उम्र के हिसाब से सर्टिफिकेट जमा करने का अलग समय तय किया है। इसमें 80 साल और उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्ग पेंशनर्स को पहले मौका दिया जाता है ताकि उन्हें किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
नियमों के मुताबिक 80 साल और उससे ज्यादा उम्र के सीनियर पेंशनर्स 1 अक्टूबर से ही अपना लाइफ सर्टिफिकेट जमा कर सकते हैं। वहीं 80 साल से कम उम्र वाले पेंशनर्स के लिए यह प्रक्रिया आमतौर पर 1 नवंबर से शुरू होती है। सभी पेंशनर्स के लिए जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की आखिरी तारीख 30 नवंबर रखी गई है। 80 साल से ऊपर के बुजुर्गों को 1 अक्टूबर से मिलने वाली यह शुरुआती छूट पिछले सालों की तरह ही इस बार भी दी जा रही है।
जीवन प्रमाण एक आधार पर आधारित और बायोमेट्रिक डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट है। इसके जरिए पात्र पेंशनर्स अपने पेंशन बांटने वाली एजेंसी के पास खुद जाने या फिजिकल पेपर देने के बजाय डिजिटल तरीके से लाइफ वेरिफिकेशन पूरा कर सकते हैं। यह सुविधा उन पेंशनर्स को मिलती है जिनकी पेंशन मंजूर करने वाली अथॉरिटी जीवन प्रमाण प्लेटफॉर्म से जुड़ी हुई है। हालांकि जो पेंशनर्स फिर से नौकरी कर रहे हैं या जिन्होंने दोबारा शादी की है, वे डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट सुविधा का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। ऐसे लोगों को पुरानी और पारंपरिक प्रक्रिया का पालन करना होता है।
पेंशनर की पहचान आधार से जुड़े बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के जरिए वेरिफाई की जाती है। ऑथेंटिकेशन सफल होने पर डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बन जाता है। इसके बाद यह सर्टिफिकेट जीवन प्रमाण रिपॉजिटरी में स्टोर हो जाता है। वहां से पेंशन बांटने वाली एजेंसी इसे इलेक्ट्रॉनिक तरीके से हासिल कर सकती है। पेंशनर्स कॉमन सर्विस सेंटर, बैंक और सरकारी दफ्तरों में मौजूद जीवन प्रमाण सेंटर्स पर जाकर यह सर्टिफिकेट बनवा सकते हैं। इसके अलावा पेंशनर्स चाहें तो जीवन प्रमाण एप्लीकेशन और जरूरी डिवाइस की मदद से घर बैठे भी यह काम पूरा कर सकते हैं।
डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जिंदगी भर के लिए वैलिड नहीं होता है। इसकी वैलिडिटी संबंधित पेंशन अथॉरिटी के नियमों से तय होती है। जब वैलिडिटी की अवधि पूरी हो जाती है, तो पेंशनर को दोबारा नया सर्टिफिकेट जमा करना पड़ता है। हर बार नया डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बनने पर एक नया प्रमाण आईडी जेनरेट होता है। इसलिए समय पूरा होने पर इसे दोबारा जमा करना बेहद जरूरी होता है।
जीवन प्रमाण पत्र बनवाते समय पेंशनर्स को कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट्स और डिटेल्स पास रखनी चाहिए। इनमें आधार नंबर, मोबाइल नंबर और पेंशन से जुड़ी जानकारियां शामिल हैं। जैसे पेंशन पेमेंट ऑर्डर यानी पीपीओ नंबर, पेंशन अकाउंट नंबर और पेंशन देने वाले बैंक की पूरी डिटेल। इसके अलावा वेरिफिकेशन के लिए फिंगरप्रिंट, आईरिस यानी आंखों की पुतली या फेस ऑथेंटिकेशन की जरूरत पड़ती है।
अगर गलत या अधूरी जानकारी के कारण डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट रिजेक्ट हो जाता है, तो पेंशनर को तुरंत अपनी पेंशन देने वाली एजेंसी से संपर्क करना चाहिए। वहां जाकर रिकॉर्ड में अपनी जानकारी चेक कराएं। इसके बाद सही जानकारी दर्ज कराकर नया सर्टिफिकेट बनवाया जा सकता है। पेंशनर्स को सलाह दी जाती है कि वे सर्टिफिकेट जमा करने से पहले अपने बैंक या एजेंसी से किसी अन्य जरूरी नियम की जानकारी भी जरूर ले लें।
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