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  1. क्या होता है बल्क डिपॉजिट और नॉर्मल डिपॉजिट में अंतर? एक के लिए RBI ने बदले हैं नियम

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क्या होता है बल्क डिपॉजिट और नॉर्मल डिपॉजिट में अंतर? एक के लिए RBI ने बदले हैं नियम

Upstox

4 min read | अपडेटेड September 29, 2026, 18:08 IST

सारांश

भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों में जमा होने वाले बल्क डिपॉजिट को लेकर नए नियम जारी किए हैं, जो 1 अक्टूबर से लागू हो रहे हैं। इसके तहत बैंकों को अपनी वेबसाइट पर रोजाना सुबह 10:10 बजे तक लागू ब्याज दरें पब्लिश करनी होंगी।

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आरबीआई ने देश के बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

बैंक में पैसे जमा करने वाले ग्राहकों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। 1 अक्टूबर से लागू होने वाले इन नए दिशानिर्देशों का सीधा असर बैंकों की जमा योजनाओं पर पड़ेगा। आरबीआई ने खासतौर पर बल्क डिपॉजिट के मामले में नियमों को काफी सख्त कर दिया है ताकि बैंकों की मनमानी पर लगाम लगाई जा सके और ग्राहकों को सही समय पर सही ब्याज दर की जानकारी मिल सके। इस फैसले के बाद अब ग्राहकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर बल्क डिपॉजिट और नॉर्मल डिपॉजिट में क्या अंतर होता है और केंद्रीय बैंक ने इसके लिए क्या नए आदेश जारी किए हैं।

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क्या होता है बल्क और नॉर्मल डिपॉजिट में अंतर?

साधारण शब्दों में समझें तो बैंक में एक बार में जमा की जाने वाली बड़ी रकम को बल्क डिपॉजिट कहा जाता है। शेड्यूल कमर्शियल बैंकों और स्मॉल फाइनेंस बैंकों के लिए 3 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की सिंगल फिक्स्ड डिपॉजिट को बल्क डिपॉजिट माना जाता है। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए यह सीमा 1 करोड़ रुपये रखी गई है। दूसरी तरफ 3 करोड़ रुपये से कम की जमा राशि को नॉर्मल डिपॉजिट या रिटेल डिपॉजिट कहा जाता है, जिसमें आम लोग अपनी छोटी छोटी बचत का पैसा बैंक में रखते हैं। आमतौर पर बल्क डिपॉजिट पर बैंक नॉर्मल डिपॉजिट की तुलना में थोड़ी अलग ब्याज दरें ऑफर करते हैं, क्योंकि यह बैंकों के लिए बड़ा फंड जुटाने का जरिया होता है।

आरबीआई ने क्यों बदले बल्क डिपॉजिट के नियम?

आरबीआई के ध्यान में यह बात आई थी कि कई बैंक बल्क डिपॉजिट पर ग्राहकों को अलग अलग ब्याज दरें दे रहे थे। कभी कभी वेबसाइट पर दिखाई गई दर कुछ और होती थी और ब्रांच में बातचीत के आधार पर ग्राहकों को अलग ब्याज दर ऑफर कर दी जाती थी। इसके अलावा अलग अलग ब्रांचों में भी एक ही दिन जमा की जाने वाली समान राशि पर अलग रेट मिल जाते थे। इसी अस्पष्टता को खत्म करने और बैंकिंग सिस्टम में पूरी पारदर्शिता लाने के लिए आरबीआई ने 1 अक्टूबर से नए नियम लागू करने का फैसला किया है। इससे बड़े निवेशकों, कंपनियों और ट्रस्टों को बैंकों के साथ काम करने में आसानी होगी।

आरबीआई के नए दिशानिर्देशों के मुताबिक अब बैंकों को हर कारोबारी दिन अपनी वेबसाइट पर जमा राशि की ब्याज दरें पहले से बतानी होंगी। बल्क डिपॉजिट के मामले में बैंकों को रोज सुबह 10 बजे तक लागू होने वाली ब्याज दर वेबसाइट पर पब्लिश करनी होगी। बैंकों की सुविधा के लिए 10 मिनट का अतिरिक्त समय दिया गया है, यानी सुबह 10:10 बजे तक हर हाल में नई दरें वेबसाइट पर दिखनी चाहिए। जो ब्याज दर सुबह वेबसाइट पर पब्लिश होगी, उसी दर पर पूरे दिन बल्क डिपॉजिट स्वीकार किए जाएंगे। बैंक किसी भी ग्राहक को वेबसाइट पर बताई गई दर से अलग ब्याज नहीं दे सकेंगे।

सभी ब्रांचों में समान रहेगी ब्याज दर

नए नियमों का एक और बड़ा फायदा यह होगा कि बैंक अब अलग अलग ब्रांचों के हिसाब से ब्याज दरों में भेदभाव नहीं कर पाएंगे। अगर दो ग्राहक एक ही दिन समान अवधि और समान रकम का बल्क डिपॉजिट किसी बैंक की अलग अलग शाखाओं में जमा करते हैं, तो दोनों को एक ही ब्याज दर दी जाएगी। बैंक अब बातचीत के आधार पर किसी खास ग्राहक को अलग फायदा नहीं दे पाएंगे। हालांकि आरबीआई ने यह छूट दी है कि बैंक लिक्विडिटी के रिस्क और फंड के रुकने की अवधि के हिसाब से दरों में अंतर तय कर सकते हैं, लेकिन उसका आधार नियमों के मुताबिक ही होना चाहिए।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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