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  1. RBI Draft Rules: NPA बनने पर ही बैंक जब्त कर सकेंगे गिरवी प्रॉपर्टी, 7 साल में बेचना जरूरी

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RBI Draft Rules: NPA बनने पर ही बैंक जब्त कर सकेंगे गिरवी प्रॉपर्टी, 7 साल में बेचना जरूरी

Shubham Singh Thakur

2 min read | अपडेटेड May 05, 2026, 19:06 IST

सारांश

RBI Draft Rules: नए प्रस्तावित नियम के तहत जब कोई व्यक्ति या कंपनी बैंक का लोन नहीं चुका पाती और लोन NPA बन जाता है, तो बैंक पैसे वापस पाने के लिए उसकी गिरवी रखी प्रॉपर्टी अपने नाम कर सकता है। ऐसे मामलों में उस प्रॉपर्टी को SNFA (Specified Non-financial Asset) कहा जाएगा।

RBI

RBI ने नए नियमों पर 26 मई 2026 तक लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं।

RBI Draft Rules: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों के लिए एक ड्राफ्ट नियम जारी किया है। इसमें डूबे हुए लोन (NPA) के मामलों में गिरवी रखी प्रॉपर्टी को लेकर साफ गाइडलाइन दी गई है। RBI के मुताबिक, आम तौर पर बैंक जमीन या मकान जैसी गैर-वित्तीय संपत्तियां अपने पास नहीं रखते। लेकिन अगर कोई लोन NPA बन जाता है और पैसे वसूलने के बाकी सभी तरीके काम नहीं करते, तो बैंक उस लोन के बदले गिरवी रखी प्रॉपर्टी अपने नाम कर सकता है। ऐसी संपत्तियों को SNFA (Specified Non-financial Asset) कहा जाएगा।
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नए नियमों में क्या कहा गया है?

RBI ने इसके लिए कुछ साफ नियम बनाए हैं। इसके तहत बैंक तभी प्रॉपर्टी अपने पास ले सकता है, जब लोन NPA बन जाए और बाकी सभी रिकवरी के तरीके फेल हो जाएं। बैंक इस प्रॉपर्टी को पूरे या आंशिक बकाया के बदले ले सकता है। अगर पूरा लोन खत्म नहीं हुआ, तो बचा हुआ लोन “रिस्ट्रक्चर्ड” माना जाएगा।

अकाउंटिंग के मामले में SNFA को हमेशा दो में से कम वैल्यू पर दर्ज किया जाएगा। या तो जिस लोन का बकाया खत्म किया गया उसकी नेट बुक वैल्यू (NBV), या फिर उस संपत्ति की मौजूदा डिस्ट्रीस सेल वैल्यू (यानी जल्दी बेचने पर मिलने वाली कीमत)। आगे हर रिपोर्टिंग डेट पर भी इसकी वैल्यू दो में से कम ही मानी जाएगी। पिछली डिस्ट्रीस वैल्यू या फिर संशोधित NBV (जिसमें काल्पनिक प्रावधान घटाए गए हों, मानो लोन अभी भी बैलेंस शीट में होता)।

7 साल के अंदर बेचनी होगी प्रॉपर्टी

RBI ने यह भी कहा है कि ऐसी संपत्तियों को लंबे समय तक नहीं रखा जा सकता। इन्हें अधिकतम 7 साल के अंदर बेच देना जरूरी होगा, ताकि बैंक जल्द से जल्द अपनी रिकवरी कर सकें। गलत फायदा उठाने की संभावना को रोकने के लिए यह साफ किया गया है कि REs इन संपत्तियों को वापस उसी बॉरोअर या उसके किसी संबंधित व्यक्ति को नहीं बेच सकतीं। साथ ही, REs को अपने बैलेंस शीट में यह भी बताना होगा कि उनके पास कितनी SNFAs हैं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

अभी ये सिर्फ ड्राफ्ट है, और RBI ने लोगों से 26 मई 2026 तक सुझाव मांगे हैं। सुझाव RBI की वेबसाइट के ‘Connect2Regulate’ सेक्शन के जरिए भेजे जा सकते हैं, या फिर मुंबई स्थित RBI के ऑफिस (शहीद भगत सिंह मार्ग, फोर्ट) में डाक या ईमेल के माध्यम से भी भेजे जा सकते हैं।

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