पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड May 05, 2026, 16:32 IST
सारांश
अगर आप बैंक से मोटी रकम निकालकर कुछ समय बाद वापस जमा करते हैं, तो इनकम टैक्स विभाग इसे अघोषित कमाई मानकर टैक्स लगा सकता है। हालांकि, इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) के एक नए फैसले ने टैक्सपेयर्स को राहत दी है। अगर आप सोर्स साबित कर दें, तो इसे इनकम नहीं माना जाएगा।

बैंक से कैश विड्रॉल और डिपॉजिट करने वालों के लिए टैक्स नियमों पर बड़ी अपडेट।
क्या आपने कभी किसी बड़े काम के लिए बैंक से मोटी रकम निकाली है और काम न बनने पर वही पैसा वापस खाते में जमा कर दिया है? अगर ऐसा है, तो आपको थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। अक्सर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ऐसी रकम को आपकी अघोषित कमाई यानी अनडिक्लेयर्ड इनकम मान लेता है और आपसे सवाल पूछ सकता है कि यह पैसा आखिर आया कहां से। लेकिन अब ऐसे मामलों में टैक्सपेयर्स को घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने एक बड़ा फैसला सुनाया है, जो आम लोगों के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।
यह पूरा मामला नोटबंदी के समय का है, जो अब चर्चा में आया है। एक महिला टैक्सपेयर ने नोटबंदी लागू होने से पहले अपने बैंक खाते से किस्तों में करीब 15 लाख रुपये निकाले थे। जब देश में नोटबंदी हुई, तो उन्होंने वही 15 लाख रुपये वापस अपने बैंक खाते में जमा कर दिए। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को यह बात संदिग्ध लगी। विभाग का तर्क था कि कोई भी व्यक्ति इतनी बड़ी रकम घर में नहीं रखेगा। उनका कहना था कि आमतौर पर लोग इतनी रकम को कहीं निवेश करते हैं या उस पर ब्याज कमाने की कोशिश करते हैं। इसी आधार पर डिपार्टमेंट ने इसे अनडिक्लेयर्ड इनकम मान लिया और धारा 69A के तहत टैक्स के साथ जुर्माना भी लगा दिया।
जब यह मामला इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल यानी ITAT के पास पहुंचा, तो वहां की दलीलें बिल्कुल अलग थीं। ट्रिब्यूनल ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की बातों को खारिज कर दिया। ITAT का कहना था कि टैक्स लगाने का आधार सिर्फ अंदाजा नहीं बल्कि ठोस सबूत होने चाहिए। ट्रिब्यूनल ने साफ किया कि अगर कोई व्यक्ति यह साबित कर देता है कि बैंक में जमा किया गया पैसा वही है जो उसने पहले निकाला था, तो उसे दोबारा हुई कमाई या नई इनकम नहीं माना जा सकता। यह फैसला टैक्सपेयर्स के हक में गया क्योंकि उन्होंने पैसे के सोर्स की जानकारी दे दी थी।
इस फैसले के दौरान ट्रिब्यूनल ने एक बहुत ही अहम बात कही। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपना पैसा बैंक में रखे या अपने घर की तिजोरी में, यह पूरी तरह से उसका अपना फैसला है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट यह तय करने वाला कोई नहीं होता कि किसी व्यक्ति को अपना पैसा कहां और कैसे रखना चाहिए। यह दलील उन लोगों के लिए बहुत मजबूत साबित हुई है जो अपनी जरूरत के हिसाब से कैश घर में रखते हैं। विभाग सिर्फ इस आधार पर किसी को नोटिस नहीं दे सकता कि उसने पैसा निवेश क्यों नहीं किया।
अक्सर लोग जमीन खरीदने, घर में शादी-ब्याह या किसी मेडिकल इमरजेंसी के लिए बैंक से भारी मात्रा में कैश निकालते हैं। कई बार ऐसा होता है कि सौदा कैंसिल हो जाता है या काम नहीं बन पाता, तो लोग वही पैसा कुछ हफ्तों या महीनों बाद वापस बैंक में जमा कर देते हैं। ऐसे समय में इनकम टैक्स की धारा 68 या 69A लोगों के लिए मुसीबत बन जाती है। ITAT का यह फैसला अब ऐसे लोगों के लिए एक ढाल की तरह काम करेगा। अब अगर आपके पास विड्रॉल का सबूत है, तो आप विभाग के नोटिस का मजबूती से जवाब दे सकते हैं।
भले ही कोर्ट ने राहत दी है, लेकिन आपको अपनी तरफ से रिकॉर्ड दुरुस्त रखने चाहिए। जब भी आप बैंक से बड़ा अमाउंट निकालें, तो उसकी बैंक स्टेटमेंट हमेशा अपने पास संभाल कर रखें। इसके अलावा अगर आप बिजनेस करते हैं, तो अपनी बुक्स में कैश इन हैंड का रिकॉर्ड बिल्कुल साफ रखें ताकि कैश फ्लो मैनेज रहे। कोशिश करें कि विड्रॉल और डिपॉजिट के बीच समय का अंतर ज्यादा न हो, इससे आपका केस ज्यादा मजबूत रहता है। हालांकि ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा है कि अगर समय ज्यादा भी बीत गया है लेकिन आपके पास सोर्स की पूरी जानकारी है, तब भी आपको राहत दी जाएगी।
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