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  1. क्या है NSE का नया Electronic Gold Receipts? कैसे करता है काम? शेयर की तरह कर सकेंगे खरीद-बिक्री

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क्या है NSE का नया Electronic Gold Receipts? कैसे करता है काम? शेयर की तरह कर सकेंगे खरीद-बिक्री

Shubham Singh Thakur

3 min read | अपडेटेड May 05, 2026, 12:25 IST

सारांश

Electronic Gold Receipts: EGR असल में एक डिजिटल सिक्योरिटी है। अगर आप इसमें निवेश करते हैं तो आपके लिए असली सोना SEBI से मान्यता प्राप्त वॉल्ट में सुरक्षित रखा जाएगा। हर EGR पूरी तरह असली सोने से बैक्ड होगा और इसे एक्सचेंज पर शेयर की तरह आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है।

Gold

Gold: आपका सोना SEBI की मान्यता वाले वॉल्ट में रखा जाएगा।

Electronic Gold Receipts: अगर आप सोने में निवेश करना चाहते हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसिप्ट (EGR) नाम का नया सेगमेंट लॉन्च किया है। यह उन लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है, जो सोने में सुरक्षित तरीके से निवेश करना चाहते हैं। NSE की इस पहल का मकसद फिजिकल सोने और फाइनेंशियल मार्केट के बीच की दूरी को खत्म करना है, ताकि लोग सुरक्षित और रेगुलेटेड तरीके से सोने में निवेश कर सकें।
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क्या है EGR?

EGR असल में एक डिजिटल सिक्योरिटी है। अगर आप इसमें निवेश करते हैं तो आपके लिए असली सोना SEBI से मान्यता प्राप्त वॉल्ट में सुरक्षित रखा जाएगा। हर EGR पूरी तरह असली सोने से बैक्ड होगा और इसे एक्सचेंज पर शेयर की तरह आसानी से खरीदा-बेचा जा सकता है।

इस नई व्यवस्था से NSE एक मजबूत और पारदर्शी गोल्ड ट्रेडिंग सिस्टम बनाना चाहता है। इससे सोने की सही कीमत तय करना आसान होगा, बाजार में भागीदारी बढ़ेगी और ज्वेलर्स, रिफाइनर्स, ट्रेडर्स और बड़े निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

मान लो आपने EGR के जरिए 10 ग्राम सोना खरीदा। आपका यह सोना SEBI की मान्यता वाले वॉल्ट में रखा जाएगा। इसके बदले में आपको एक रिसिप्ट दी जाएगी, जो इस बात का सबूत होगा कि वह सोना आपका है। आप चाहें तो अपना यह सोना बेच सकते हैं या फिजिकल गोल्ड भी ले सकते हैं।

NSE ने इस सिस्टम की सफलता का उदाहरण भी दिखाया, जिसमें 1000 ग्राम सोने की एक बार को EGR में बदला गया। इससे यह साबित हुआ कि फिजिकल सोने को आसानी से डिजिटल फॉर्म में बदला जा सकता है और जरूरत पड़ने पर इसे वापस फिजिकल गोल्ड में भी कन्वर्ट किया जा सकता है। यह पूरी प्रक्रिया सुरक्षित, पारदर्शी और डिलीवरी-बेस्ड है।

क्या हैं इसके फायदे?

NSE के अधिकारी Sriram Krishnan ने कहा कि यह पहल भारत में सोने के इस्तेमाल और निवेश के तरीके को बदल देगी। NSE की मजबूत टेक्नोलॉजी और लिक्विडिटी के जरिए अब देशभर के निवेशक आसानी से सोने में ट्रेड कर सकेंगे। इससे सोना एक मॉडर्न और डिजिटल एसेट क्लास के रूप में उभरेगा और लोगों की भागीदारी बढ़ेगी।

इसका फायदा यह भी है कि इससे घर पर सोना रखने का झंझट खत्म हो जाएगा। इसके साथ ही अगर आपके पास पैसा कम है तो भी आप इसमें निवेश कर सकेंगे। EGR की खास बात यह है कि इसमें इलेक्ट्रॉनिक होल्डिंग, शुद्धता की गारंटी और फिजिकल व डिजिटल के बीच आसान कन्वर्जन मिलता है। इसमें शेयर की तरह लिक्विडिटी और फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है।

NSE के बारे में

NSE भारत का पहला एक्सचेंज है जिसने 1994 में इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग सिस्टम शुरू किया था। सेबी के डेटा के अनुसार 1995 से यह टर्नओवर के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। NSE लिस्टिंग, ट्रेडिंग, क्लियरिंग, सेटलमेंट, इंडेक्स, मार्केट डेटा, टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल एजुकेशन जैसी कई सेवाएं देता है और बाजार के नियमों का पालन भी सुनिश्चित करता है।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

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