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4 min read | अपडेटेड September 30, 2026, 12:55 IST
सारांश
PPF अकाउंट की मैच्योरिटी अवधि 15 साल होती है। इसमें हर वित्त वर्ष कम से कम ₹500 और अधिकतम ₹1.5 लाख जमा किए जा सकते हैं। 15 साल पूरे होने के बाद आप अपने खाते को 5-5 साल के ब्लॉक में कितनी भी बार आगे बढ़ा सकते हैं।

PPF अकाउंट से आंशिक निकासी सातवें वित्त वर्ष से की जा सकती है।
पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF में निवेश करने वालों के लिए आज 30 सितंबर 2026 का दिन अहम है। वित्त मंत्रालय आज अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों का ऐलान करेगा। PPF की ब्याज दर लगातार 25 तिमाहियों से 7.1% पर बनी हुई है। यानी ब्याज दर में आखिरी बार बदलाव अप्रैल 2020 में हुआ था, जब इसे 7.9% से घटाकर 7.1% कर दिया गया था। अगर इस बार भी PPF की ब्याज दर में बदलाव नहीं होता है, तो यह लगातार 25वीं तिमाही होगी जब दर 7.1% पर बनी रहेगी।
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) की ब्याज दर पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा तय की जाती है। यह बैंक FD की तरह फिक्स नहीं होती, बल्कि बाजार के रुख के अनुसार बदलती रहती है। इसकी ब्याज दरें सीधे तौर पर G-Sec के यील्ड से जुड़ी होती हैं। श्यामला गोपीनाथ समिति (2011) की सिफारिशों के अनुसार पीपीएफ की ब्याज दर समान टेन्योर वाले 10 साल के सरकारी बॉन्ड की औसत यील्ड से 0.25% अधिक होनी चाहिए।
उदारहण के लिए अगर बाजार में 10 साल के सरकारी बॉन्ड्स का औसत रिटर्न 6.85% चल रहा है, तो फॉर्मूले के हिसाब से पीपीएफ की दर 6.85% + 0.25% = 7.1% तय की जाती है। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए ब्याज दर तय करने में जुलाई से सितंबर के दौरान 10-ईयर G-sec की यील्ड अहम होगी। 2026 की पहली छमाही में 10-ईयर G-sec यील्ड करीब 6.7-6.9% के आसपास रही थी, लेकिन सितंबर में इसमें तेजी देखने को मिली।
G-sec यील्ड में हालिया तेजी के बावजूद अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में PPF की दर बढ़ने की संभावना फिलहाल सीमित मानी जा रही है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि श्यामला गोपीनाथ समिति का फॉर्मूला सरकार के लिए अनिवार्य नियम नहीं, बल्कि एक सिफारिश है।
सरकार आमतौर पर छोटी बचत योजनाओं की दरों में अचानक बड़े बदलाव से बचती है, ताकि आम निवेशकों पर ज्यादा असर न पड़े। इसके अलावा PPF जैसी योजनाओं से मिलने वाली रकम National Small Savings Fund में जाती है, जिसका इस्तेमाल केंद्र और राज्यों को फंड देने में भी किया जाता है। ध्यान रहे कि स्मॉल सेविंग स्कीम की ब्याज दरों पर अंतिम फैसला सरकार ही लेती है।
PPF अकाउंट की मैच्योरिटी अवधि 15 साल होती है। इसमें हर वित्त वर्ष कम से कम ₹500 और अधिकतम ₹1.5 लाख जमा किए जा सकते हैं। 15 साल पूरे होने के बाद आप अपने खाते को 5-5 साल के ब्लॉक में कितनी भी बार आगे बढ़ा सकते हैं। इस पर मिलने वाला ब्याज सालाना कंपाउंड होता है और PPF को EEE यानी Exempt-Exempt-Exempt टैक्स स्टेटस प्राप्त है। यानी निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम तीनों टैक्स के दायरे से बाहर हैं।
PPF अकाउंट से आंशिक निकासी सातवें वित्त वर्ष से की जा सकती है। इसका मतलब है कि अकाउंट खुलने के बाद 6 पूरे वित्त वर्ष पूरे होने जरूरी हैं। एक वित्त वर्ष में केवल एक बार आंशिक निकासी की अनुमति होती है। यह निकासी मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की उच्च शिक्षा या अकाउंट होल्डर के NRI बनने जैसी जरूरतों के लिए की जा सकती है। निकासी की रकम पर भी सीमा होती है। इसलिए जरूरत होने पर ही पैसे निकालना बेहतर माना जाता है।
PPF अकाउंट को समय से पहले बंद करने यानी प्रीमैच्योर क्लोजर की सुविधा भी मिलती है। यह अकाउंट खुलने के 5 साल बाद किया जा सकता है। लेकिन इसमें ब्याज पर 1% की पेनाल्टी लगती है। समय से पहले अकाउंट बंद करने की अनुमति कुछ खास परिस्थितियों में ही मिलती है। जैसे अकाउंट होल्डर, उसके जीवनसाथी या बच्चों की गंभीर बीमारी, बच्चों की उच्च शिक्षा या अकाउंट होल्डर का NRI बन जाना।
प्रीमैच्योर क्लोजर में पूरा पैसा निकाला जा सकता है। इसके लिए Form C और Form SB-7B भरकर बैंक या पोस्ट ऑफिस में जमा करना होता है। अगर आप 15 साल की मैच्योरिटी पूरी होने के बाद पैसा निकालते हैं, तो कोई पेनाल्टी नहीं लगती। आप पूरा 100% पैसा निकाल सकते हैं। इसके लिए सिर्फ Form C भरना होता है।
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