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  1. IRDAI Guidelines: अब 28-45% के बजाय मिलेगा सिर्फ 2% का कमीशन, इन कंपनियों पर दिखेगा असर

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IRDAI Guidelines: अब 28-45% के बजाय मिलेगा सिर्फ 2% का कमीशन, इन कंपनियों पर दिखेगा असर

Upstox

3 min read | अपडेटेड September 29, 2026, 16:50 IST

सारांश

बीमा क्षेत्र के रेगुलेटर IRDAI ने जीवन बीमा कंपनियों के लिए मैनेजमेंट खर्च घटाने का नया खाका पेश किया है। इससे LIC और SBI लाइफ जैसी कंपनियों को फायदा मिलेगा और ग्राहकों को बेहतर रिटर्न मिल सकेगा।

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IRDAI ने बीमा कंपनियों के मैनेजमेंट खर्च में कटौती और कमीशन सीमित करने के नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।

बीमा क्षेत्र की नियामक संस्था IRDAI ने जीवन बीमा कंपनियों के कामकाज के तरीके में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर ली है। रेगुलेटर के इस नए कदम से देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी एलआईसी समेत कई अन्य कंपनियों के वर्किंग मॉडल पर सीधा असर पड़ेगा। IRDAI के चेयरमैन अजय सेठ ने यह साफ कर दिया है कि इंश्योरेंस कंपनियों को अपने मैनेजमेंट खर्च यानी EOM में बड़ी कटौती करनी होगी। कंपनियों की लागत कम होने का सबसे बड़ा फायदा सीधे पॉलिसीधारकों को मिलेगा, क्योंकि इससे ग्राहकों को उनकी पॉलिसी पर बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद बढ़ जाएगी। इसके साथ ही जो कंपनियां पहले से ही कम लागत में काम कर रही हैं।

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मैनेजमेंट खर्च घटाने के लिए नया टारगेट

फिलहाल बीमा बाजार में काम कर रही कंपनियों का औसत मैनेजमेंट खर्च लगभग 16% के पास रहता है। रेगुलेटर ने अगले पांच सालों के भीतर इसे घटाकर 12.5% पर लाने का प्रस्ताव रखा है। अजय सेठ का मानना है कि जो कंपनियां अभी 12% के स्तर पर काम कर रही हैं, वे इसे आसानी से 10% से नीचे ला सकती हैं। वर्तमान आंकड़ों के हिसाब से SBI लाइफ का मैनेजमेंट खर्च लगभग 11% और LIC का खर्च 12% के करीब है। हालांकि ये दोनों दिग्गज कंपनियां पहले से तय मानकों के दायरे में हैं, फिर भी रेगुलेटर चाहता है कि अगले पांच सालों में ये अपना खर्च 10% के पास लेकर आएं। SBI लाइफ के कम लागत वाले बैंक एश्योरेंस मॉडल और LIC के विशाल नेटवर्क को देखते हुए यह लक्ष्य हासिल करना आसान माना जा रहा है।

बैंकों की कमाई और कमीशन पर लगेगा ब्रेक

इस नए रेगुलेटरी ढांचे का सबसे बड़ा असर बैंकों के जरिए बेची जाने वाली बीमा पॉलिसियों और उनके पेआउट पर पड़ेगा। प्रस्ताव के तहत क्रेडिट-लाइफ इंश्योरेंस पर मिलने वाले कमीशन को 2% तक सीमित किया जा सकता है, जो अभी 28% से लेकर 45% के उच्च स्तर पर रहता है। कमीशन में इतनी बड़ी कटौती होने से बैंकों की बैलेंस शीट पर गहरा असर पड़ेगा। मैक्वेरी की रिपोर्ट के मुताबिक इस फैसले से एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। वित्त वर्ष 2026 में एक्सिस बैंक की कुल कमाई में बैंक एश्योरेंस फीस की हिस्सेदारी 2.4% और मुनाफे में योगदान 12.5% रहा था। वहीं HDFC बैंक की कुल कमाई में इंश्योरेंस फीस का हिस्सा 1.9% और मुनाफे में 7.3% दर्ज किया गया था।

छोटी बीमा कंपनियों के लिए खुला बड़ा मौका

इसके विपरीत आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और SBI पर इसका असर काफी सीमित देखने को मिलेगा। वित्त वर्ष 2026 में आईसीआईसीआई बैंक के मुनाफे में इंश्योरेंस फीस का योगदान केवल 0.6%, कोटक महिंद्रा बैंक के मुनाफे में 5.8% और SBI के मुनाफे में 2.6% ही रहा था। हालांकि अन्य एनबीएफसी कंपनियों को 4 से 8% तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है। IRDAI का यह नया नियम पूरे इंश्योरेंस मार्केट की तस्वीर बदल सकता है। अजय सेठ के अनुसार यह व्यवस्था केवल बड़ी कंपनियों के लिए नहीं है, बल्कि अगर छोटी इंश्योरेंस कंपनियां अपना इंप्लीमेंटेशन बेहतर करती हैं, तो वे स्थापित कंपनियों को पीछे छोड़कर बाजार में नई पहचान बना सकती हैं।

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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