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  1. पोस्ट ऑफिस में जमा हैं पैसे? तुरंत सुधार लें ये 7 गलतियां वरना फंस जाएगा पूरा क्लेम

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पोस्ट ऑफिस में जमा हैं पैसे? तुरंत सुधार लें ये 7 गलतियां वरना फंस जाएगा पूरा क्लेम

Upstox

5 min read | अपडेटेड September 30, 2026, 14:53 IST

सारांश

पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं में पैसा लगाने वाले अक्सर नॉमिनी और कागजों की जांच करना भूल जाते हैं। नाम में गलती, नॉमिनी अपडेट न करना और जॉइंट अकाउंट की अधूरी जानकारी से डेथ क्लेम की प्रक्रिया अटक सकती है।

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पोस्ट ऑफिस खातों में नॉमिनी और जरूरी कागजात समय पर अपडेट न कराने से डेथ क्लेम की प्रक्रिया में रुकावट आ सकती है।

देश में लाखों लोग अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने के लिए पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं का सहारा लेते हैं। इनमें बचत खाता, आवर्ती जमा, टाइम डिपॉजिट, मासिक आय योजना, सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम और पब्लिक प्रोविडेंट फंड जैसी कई लोकप्रिय योजनाएं शामिल हैं। आमतौर पर लोग निवेश करते समय केवल मिलने वाले ब्याज और कुल रिटर्न पर ही ध्यान देते हैं। लेकिन बहुत से खाताधारक अपने नॉमिनी और खाते से जुड़े जरूरी कागजात की सही तरीके से जांच करना भूल जाते हैं। किसी खाताधारक की मृत्यु होने के बाद यही छोटी-छोटी भूलें परिवार के लिए डेथ क्लेम की प्रक्रिया को बहुत मुश्किल बना देती हैं। इसलिए समय रहते खाते से जुड़ी सात मुख्य बातों पर ध्यान देना और उन्हें ठीक करना बहुत जरूरी है।

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नॉमिनी के नाम और जानकारी में गलती

खाते में नॉमिनी का नाम, जन्मतिथि या अन्य महत्वपूर्ण जानकारी दर्ज कराते समय कई बार गलतियां हो जाती हैं। यदि खाते में नॉमिनी का नाम या उम्र सही नहीं लिखी होगी, तो खाताधारक के न रहने पर क्लेम लेते समय पोस्ट ऑफिस में अतिरिक्त सत्यापन की जरूरत पड़ सकती है। इससे क्लेम पास होने में काफी समय लग सकता है। इसलिए हर खाताधारक को अपने खाते की पासबुक में दर्ज नॉमिनी की पूरी जानकारी को समय-समय पर जरूर चेक कर लेना चाहिए ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को तुरंत ठीक किया जा सके।

बदलते समय के साथ नॉमिनी अपडेट न करना

जीवन में कई तरह के बदलाव आते हैं जैसे शादी होना, तलाक होना या परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु होना। इसके अलावा यदि पहले से तय किए गए नॉमिनी की ही मृत्यु हो जाती है, तो खाते में नया नॉमिनी बनाना जरूरी हो जाता है। बहुत से लोग यह बदलाव करना भूल जाते हैं और पुराना रिकॉर्ड ही पोस्ट ऑफिस में दर्ज रहता है। इस तरह की लापरवाही के कारण बाद में असली हकदार को पैसा मिलने में बड़ी कानूनी अड़चनें आ सकती हैं। इसलिए जरूरत पड़ने पर तुरंत पोस्ट ऑफिस जाकर नॉमिनी का नाम बदलवा लेना चाहिए।

जॉइंट अकाउंट के नियमों की अधूरी समझ

जॉइंट अकाउंट खोलते समय यह स्पष्ट होना बहुत आवश्यक है कि खाता किस संचालन व्यवस्था के तहत चलाया जा रहा है। खाते को दोनों लोग मिलकर चला रहे हैं या फिर कोई एक व्यक्ति भी इसे ऑपरेट कर सकता है, इसका असर क्लेम प्रक्रिया पर पड़ता है। किसी एक खाताधारक की मृत्यु हो जाने पर दूसरे खाताधारक के अधिकार और क्लेम पाने का तरीका खाते के तय नियमों पर ही निर्भर करता है। जानकारी के अभाव में दूसरे खाताधारक को अपने ही जमा पैसे निकालने के लिए परेशान होना पड़ सकता है।

डेथ क्लेम के लिए जरूरी दस्तावेज अधूरे होना

किसी खाताधारक की मृत्यु के बाद जब परिवार के लोग पैसा निकालने के लिए आवेदन करते हैं, तो सही और पूरे कागजात जमा करना बेहद जरूरी होता है। मृत खाताधारक का मृत्यु प्रमाण पत्र, खाते की पासबुक या प्रमाण पत्र, नॉमिनी के पहचान पत्र और अन्य जरूरी फॉर्म सही तरीके से भरकर जमा न करने पर पूरी प्रक्रिया बीच में ही अटक जाती है। जब तक सभी आवश्यक दस्तावेज सही रूप में जमा नहीं किए जाते, तब तक पोस्ट ऑफिस अधिकारी क्लेम को आगे नहीं बढ़ाते हैं।

पहचान पत्रों और खाते के नाम में अंतर

कई बार देखने में आता है कि पोस्ट ऑफिस खाते में दर्ज नाम की स्पेलिंग और खाताधारक या नॉमिनी के आधार कार्ड, पैन कार्ड या अन्य पहचान पत्रों में दर्ज नाम में अंतर होता है। नाम या पते में जरा सा भी फर्क होने पर पोस्ट ऑफिस की तरफ से जांच और सत्यापन की मांग की जाती है। इस दस्तावेजी अंतर को दूर करने में परिवार का काफी समय और मेहनत खराब होती है। इसलिए अपने सभी सरकारी पहचान पत्रों और पोस्ट ऑफिस खाते की जानकारी को हमेशा एक समान रखना चाहिए।

परिवार के सदस्यों को खातों की जानकारी न देना

अक्सर लोग अपने निवेश के बारे में परिवार के दूसरे लोगों से बात नहीं करते हैं। कई बार परिवार के सदस्यों को यह पता ही नहीं होता कि मृत व्यक्ति ने पोस्ट ऑफिस की किस योजना में कितना पैसा जमा कर रखा था। ऐसी स्थिति में जमा पैसा बिना किसी दावे के सालों तक पड़ा रह सकता है। इस समस्या से बचने के लिए अपने सभी खातों और निवेश से जुड़े जरूरी कागजात एक सुरक्षित जगह पर रखने चाहिए और परिवार के किसी भरोसेमंद सदस्य को इनकी पूरी जानकारी देकर रखनी चाहिए।

नॉमिनी और कानूनी उत्तराधिकारी को एक समझना

ज्यादातर लोग यह मान लेते हैं कि खाते में नॉमिनी का नाम दर्ज होने से वही उस पैसे का मालिक बन जाता है। लेकिन कानूनी रूप से नॉमिनी केवल पैसे प्राप्त करने वाला एक जरिया होता है, जबकि वास्तविक अधिकार कानूनी उत्तराधिकारी का ही होता है। नॉमिनी और उत्तराधिकारी से जुड़े नियम कई बार अलग हो सकते हैं। इसलिए केवल नॉमिनी बनाकर निश्चिंत होने के बजाय परिवार को संबंधित योजना और उससे लागू होने वाले सभी क्लेम नियमों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए ताकि बाद में कोई पारिवारिक विवाद खड़ा न हो।

लेखकों के बारे में

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Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

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