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3 min read | अपडेटेड September 10, 2026, 16:12 IST
सारांश
पब्लिक इंश्योरेंस रजिस्ट्री यानी PIR को इंश्योरेंस सेक्टर के लिए डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। यह एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा, जहां किसी व्यक्ति की अलग-अलग इंश्योरेंस कंपनियों में मौजूद पॉलिसियों की जानकारी को उसकी सहमति के आधार पर एक जगह देखा जा सकेगा।

IRDAI का मकसद इंश्योरेंस सिस्टम को ज्यादा आसान, पारदर्शी और ग्राहकों के लिए सुविधाजनक बनाना है।
भारत में अगर किसी व्यक्ति के पास अलग-अलग कंपनियों की कई इंश्योरेंस पॉलिसी हैं, तो उनकी जानकारी एक जगह देखना आसान नहीं होता। इसी समस्या को दूर करने के लिए इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने पब्लिक इंश्योरेंस रजिस्ट्री (PIR) का प्रस्ताव रखा है। IRDAI ने इसे लेकर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। इसका मकसद इंश्योरेंस सिस्टम को ज्यादा आसान, पारदर्शी और ग्राहकों के लिए सुविधाजनक बनाना है।
पब्लिक इंश्योरेंस रजिस्ट्री यानी PIR को इंश्योरेंस सेक्टर के लिए डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। यह एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा, जहां किसी व्यक्ति की अलग-अलग इंश्योरेंस कंपनियों में मौजूद पॉलिसियों की जानकारी को उसकी सहमति के आधार पर एक जगह देखा जा सकेगा।
IRDAI ने इसके लिए देश में पहले से सफल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के उदाहरणों से सीख लेने की बात कही है। इनमें जन-धन, आधार और मोबाइल की JAM ट्रिनिटी, UPI, DigiLocker, DigiYatra, PM GatiShakti, Ayushman Bharat Digital Mission और Co-WIN जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
PIR के जरिए किसी व्यक्ति को अलग-अलग इंश्योरेंस कंपनियों में मौजूद अपनी पॉलिसियों का एक यूनिफाइड व्यू मिल सकता है। इससे लोगों के लिए अपनी इंश्योरेंस पोर्टफोलियो को समझना और मैनेज करना आसान होगा।
इसका फायदा उन परिवारों को भी मिल सकता है, जिन्हें किसी सदस्य की पुरानी या अनजान इंश्योरेंस पॉलिसी के बारे में जानकारी नहीं होती। खासकर किसी पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद उसके नॉमिनी या परिवार के सदस्य इस सिस्टम की मदद से अनक्लेम्ड इंश्योरेंस रकम या दूसरी पॉलिसियों का पता लगा सकते हैं।
अगर किसी व्यक्ति ने एक इंश्योरेंस कंपनी के साथ KYC पूरी कर ली है, तो प्रस्तावित व्यवस्था के तहत नई पॉलिसी खरीदते समय उसे बार-बार वही जानकारी देने की जरूरत नहीं पड़ सकती है। इससे पॉलिसी खरीदने की प्रक्रिया आसान और तेज हो सकती है।
क्लेम के मामले में भी PIR मददगार हो सकता है। उदाहरण के लिए, किसी पॉलिसीधारक की मृत्यु के बाद एक इंश्योरर में डेथ क्लेम प्रोसेस होता है। क्लेम करने वाले की सहमति के बाद इसकी जानकारी PIR में रिपोर्ट होने पर सिस्टम उस व्यक्ति के नाम पर मौजूद दूसरी पॉलिसियों की पहचान करने में मदद कर सकता है। इसके बाद संबंधित इंश्योरेंस कंपनियां परिवार को क्लेम प्रक्रिया शुरू करने के लिए जानकारी दे सकती हैं।
अगर परिवार के पास पॉलिसी नंबर मौजूद नहीं है, तब भी दूसरी उपलब्ध जानकारियों के आधार पर अनक्लेम्ड रकम या पॉलिसी खोजने की सुविधा मिल सकती है। इसके अलावा फोन नंबर, बैंक अकाउंट और नॉमिनी जैसी जानकारी अपडेट करना और शिकायत दर्ज करना भी आसान बनाने का प्रस्ताव है। PIR में “Know Your Agent” जैसी सुविधा का भी प्रस्ताव है। इसके जरिए ग्राहक किसी एजेंट या इंटरमीडियरी का रिकॉर्ड, ग्राहक शिकायतों और बिक्री की गुणवत्ता जैसी जानकारी देख सकेंगे।
IRDAI ने इस कंसल्टेशन पेपर पर स्टेकहोल्डर्स से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। इन्हें 30 सितंबर तक भेजा जा सकता है। इन सुझावों के आधार पर PIR के अंतिम नियम और ढांचे को तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य इंश्योरेंस सेक्टर में सुविधा और इनोवेशन बढ़ाने के साथ-साथ ग्राहकों की सुरक्षा, अफोर्डेबिलिटी और लंबे समय की वित्तीय स्थिरता का भी ध्यान रखना है।
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