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4 min read | अपडेटेड May 28, 2026, 14:03 IST
सारांश
PPF अकाउंट से आंशिक निकासी सातवें वित्त वर्ष से की जा सकती है। इसका मतलब है कि अकाउंट खुलने के बाद 6 पूरे वित्त वर्ष पूरे होने जरूरी हैं। एक वित्त वर्ष में केवल एक बार आंशिक निकासी की अनुमति होती है। यह निकासी मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की उच्च शिक्षा या अकाउंट होल्डर के NRI बनने जैसी जरूरतों के लिए की जा सकती है।

अगर आप PPF से आंशिक निकासी करना चाहते हैं, तो आपको Form C भरना होगा।
पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF भारत सरकार की एक लोकप्रिय लंबी अवधि की बचत योजना है। इसमें फिलहाल 7.1% सालाना ब्याज मिलता है, जो हर साल कंपाउंड होता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें टैक्स का E-E-E फायदा मिलता है। यानी निवेश पर टैक्स छूट, ब्याज पर टैक्स नहीं और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम भी पूरी तरह टैक्स फ्री होती है।
PPF अकाउंट की अवधि 15 साल होती है। इस दौरान आपका पैसा धीरे-धीरे बढ़ता रहता है और लंबी अवधि में अच्छा फंड तैयार हो जाता है। हालांकि जरूरत पड़ने पर इसमें से कुछ रकम निकालने की सुविधा भी मिलती है, लेकिन इसके कुछ नियम हैं।
PPF अकाउंट से आंशिक निकासी सातवें वित्त वर्ष से की जा सकती है। इसका मतलब है कि अकाउंट खुलने के बाद 6 पूरे वित्त वर्ष पूरे होने जरूरी हैं। एक वित्त वर्ष में केवल एक बार आंशिक निकासी की अनुमति होती है। यह निकासी मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की उच्च शिक्षा या अकाउंट होल्डर के NRI बनने जैसी जरूरतों के लिए की जा सकती है। निकासी की रकम पर भी सीमा होती है। इसलिए जरूरत होने पर ही पैसे निकालना बेहतर माना जाता है, क्योंकि बार-बार निकासी से कंपाउंडिंग का फायदा कम हो जाता है।
अगर आप PPF से आंशिक निकासी करना चाहते हैं, तो आपको Form C भरना होगा। इसमें अकाउंट डिटेल, निकासी राशि और जरूरी घोषणा भरकर साइन करना होता है। इसके साथ PPF पासबुक की कॉपी लगाकर बैंक या पोस्ट ऑफिस में जमा करना होता है। जांच के बाद निकासी की अनुमति दी जाती है।
PPF अकाउंट को समय से पहले बंद करने यानी प्रीमैच्योर क्लोजर की सुविधा भी मिलती है। यह अकाउंट खुलने के 5 साल बाद किया जा सकता है। लेकिन इसमें ब्याज पर 1% की पेनाल्टी लगती है। यानी जितना ब्याज मिला है, उसमें कुछ हिस्सा कट जाता है। समय से पहले अकाउंट बंद करने की अनुमति कुछ खास परिस्थितियों में ही मिलती है। जैसे अकाउंट होल्डर, उसके जीवनसाथी या बच्चों की गंभीर बीमारी, बच्चों की उच्च शिक्षा या अकाउंट होल्डर का NRI बन जाना।
प्रीमैच्योर क्लोजर में पूरा पैसा निकाला जा सकता है। इसके लिए Form C और Form SB-7B भरकर बैंक या पोस्ट ऑफिस में जमा करना होता है। अगर आप 15 साल की मैच्योरिटी पूरी होने के बाद पैसा निकालते हैं, तो कोई पेनाल्टी नहीं लगती। आप पूरा 100% पैसा निकाल सकते हैं। इसके लिए सिर्फ Form C भरना होता है।
मैच्योरिटी के बाद PPF अकाउंट को 5 साल के ब्लॉक में आगे भी बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए Form H जमा करना होता है। ऐसे में निकासी के नियम इस बात पर निर्भर करते हैं कि आप आगे निवेश जारी रखते हैं या नहीं।
अगर आप एक्सटेंशन पीरियड में निवेश जारी रखते हैं, तो 5 साल के उस ब्लॉक की शुरुआत में मौजूद कुल रकम का अधिकतम 60% ही निकाला जा सकता है। साथ ही एक वित्त वर्ष में केवल एक बार निकासी की अनुमति होती है। अगर आप एक्सटेंशन के दौरान नया निवेश नहीं करते, तो 60% की सीमा लागू नहीं होती। ऐसे में आप जरूरत के हिसाब से पूरी रकम भी निकाल सकते हैं। बची हुई रकम पर ब्याज मिलता रहता है।
PPF से निकाली गई रकम पूरी तरह टैक्स फ्री होती है। चाहे वह आंशिक निकासी हो, समय से पहले अकाउंट बंद करना हो, मैच्योरिटी पर निकासी हो या एक्सटेंशन के दौरान निकासी। इसे ITR में दिखाने की भी जरूरत नहीं होती। PPF लंबी अवधि में सुरक्षित तरीके से धन बनाने का अच्छा विकल्प माना जाता है। इसलिए इसमें निवेश और निकासी सोच-समझकर करनी चाहिए, ताकि लंबे समय तक कंपाउंडिंग का फायदा मिलता रहे।
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