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4 min read | अपडेटेड May 27, 2026, 16:16 IST
सारांश
अगर आप जिंदगी में पहली बार इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने जा रहे हैं तो आपको बहुत सावधान रहने की जरुरत है। जरा सी लापरवाही आपको भारी पड़ सकती है और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपको नोटिस भेज सकता है। इस समय ऑनलाइन पोर्टल पर ITR फॉर्म 1, 2 और 4 भरने के लिए मिल रहे हैं।

पहली बार ITR फाइल करते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां वरना आ सकता है टैक्स नोटिस। | Image: Shutterstock.
नया फाइनेंशियल ईयर खत्म होने के बाद अब टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स रिटर्न यानी ITR फाइल करने का समय आ गया है। अगर आप अपनी जिंदगी में पहली बार ITR फाइल करने जा रहे हैं, तो आपके मन में एक अलग ही उत्साह और थोड़ा डर भी होगा। पहली बार टैक्स भरने वाले अक्सर जोश में आकर कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो बाद में उनके लिए बड़ी मुसीबत बन जाती हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इन दिनों बहुत अलर्ट है और जरा सी गड़बड़ी दिखने पर सीधे नोटिस थमा देता है। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले नियमों को अच्छी तरह समझ लेना बहुत जरुरी है। अच्छी बात यह है कि इस समय ई-पाइलिंग पोर्टल पर ITR फॉर्म 1, 2 और 4 ऑनलाइन उपलब्ध करा दिए गए हैं, जिससे आप अपना रिटर्न आसानी से फाइल कर सकते हैं।
ITR फाइल करते समय सबसे पहली और बड़ी चुनौती सही फॉर्म का चुनाव करना होता है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट अलग-अलग इनकम सोर्स के हिसाब से फॉर्म तय करता है। इस समय ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म 1, 2 और 4 लाइव हैं जिन्हें आप भर सकते हैं। फॉर्म 1 उन लोगों के लिए है जिनकी सैलरी से इनकम है और कुल कमाई 50 लाख रुपये तक है। वहीं फॉर्म 2 उनके लिए है जिन्हें कैपिटल गेन्स या एक से ज्यादा घर से इनकम होती है। फॉर्म 4 बिजनेस और प्रोफेशनल्स के लिए होता है जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन चुनते हैं। अगर आपने अपनी इनकम के मुताबिक गलत फॉर्म चुन लिया, तो आपका रिटर्न डिफेक्टिव माना जाएगा और टैक्स डिपार्टमेंट आपको नोटिस भेज देगा।
कई बार लोग सोचते हैं कि सैलरी के अलावा होने वाली छोटी-मोटी कमाई को छिपाया जा सकता है, लेकिन यह बहुत बड़ी गलतफहमी है। आपके सेविंग्स बैंक अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD से होने वाली कमाई और शेयर्स या म्यूचुअल फंड से मिला डिविडेंड भी टैक्स के दायरे में आता है। भले ही इन पर थोड़ा बहुत TDS कटा हो, फिर भी इन्हें ITR में दिखाना जरुरी होता है। अगर आप इन जानकारियों को छिपाते हैं, तो डिपार्टमेंट के कंप्यूटर सिस्टम इसे तुरंत पकड़ लेते हैं क्योंकि उनके पास आपके पैन कार्ड से जुड़ी हर ट्रांजैक्शन की पूरी खबर होती है।
आजकल इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट यानी AIS और फॉर्म 26AS के जरिए आपकी हर बड़ी वित्तीय लेनदेन का पूरा डेटा मौजूद रहता है। ITR फाइल करने से पहले इन दोनों डॉक्यूमेंट्स को पोर्टल से डाउनलोड करके अपनी सैलरी स्लिप के साथ जरुर मैच कर लें। अगर आपके दावों और AIS के डेटा में कोई अंतर पाया जाता है, तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इसे मिसमैच मानता है। डेटा मिसमैच होने की स्थिति में टैक्स असेसमेंट ऑफिसर आपको स्पष्टीकरण मांगने के लिए नोटिस जारी कर सकता है।
ITR फाइल करते समय अपने बैंक अकाउंट नंबर और IFSC कोड को बहुत ध्यान से भरें। इसी अकाउंट में आपका टैक्स रिफंड वापस आता है। साथ ही उस बैंक अकाउंट का प्री-वैलिडेट होना भी जरुरी है। इसके अलावा, एक और बड़ी गलती जो लोग करते हैं, वह है ITR को फाइल करने के बाद उसे वेरीफाई न करना। रिटर्न अपलोड करने के बाद उसे 30 दिनों के भीतर ई-वेरीफाई करना अनिवार्य होता है। अगर आप ई-वेरीफाई करना भूल जाते हैं, तो आपका भरा हुआ ITR अमान्य घोषित कर दिया जाता है, यानी मान लिया जाता है कि आपने रिटर्न भरा ही नहीं। इसके बाद आपको पेनाल्टी और नोटिस का सामना करना पड़ सकता है।
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