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4 min read | अपडेटेड August 11, 2026, 13:21 IST
सारांश
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ फसलों के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 16 अगस्त तय की गई है। प्राकृतिक आपदाओं से फसल बर्बाद होने पर सरकार किसानों को आर्थिक मदद देती है। हालांकि तय नियमों का पालन न करने या अधूरी जानकारी देने पर क्लेम रिजेक्ट भी हो सकता है।

पीएम फसल बीमा योजना में 16 अगस्त तक कर सकते हैं आवेदन, अप्लाई करने से पहले नियम जानना है जरूरी। Image: Shutterstock
खेती किसानी पूरी तरह से मौसम पर निर्भर करती है और मौसम का कोई पक्का भरोसा नहीं होता है। कभी बहुत तेज बारिश तो कभी सूखा, ओलावृष्टि या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं किसानों की महीनों की कड़ी मेहनत को पल भर में बर्बाद कर देती हैं। ऐसी स्थिति में फसल का खराब होना किसानों के लिए बहुत बड़ी आर्थिक परेशानी का कारण बन जाता है। किसानों को इसी भारी नुकसान से बचाने और उन्हें संबल देने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत किसानों की फसलों को तय जोखिमों के खिलाफ बीमा सुरक्षा दी जाती है। खरीफ सीजन की फसलों के लिए बीमा कराने की आखिरी तारीख 16 अगस्त तय की गई है। हालांकि किसानों को यह समझना होगा कि सिर्फ फसल बर्बाद हो जाने से ही हर मामले में क्लेम की रकम नहीं मिल जाती है। योजना के तहत कई कड़े नियम और शर्तें तय हैं, जिनका ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का सबसे बड़ा मकसद प्राकृतिक आपदाओं और अन्य तय कारणों से फसल खराब होने पर किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाना है। जब फसल नष्ट होती है तो सरकार इस योजना के जरिए किसानों को वित्तीय सहायता देती है ताकि उनकी आय स्थिर बनी रहे। इसके अलावा यह योजना किसानों को खेती के नए और आधुनिक तरीकों को अपनाने के लिए भी बढ़ावा देती है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि लोन का फ्लो बनाए रखने में भी इस योजना से काफी मदद मिलती है, जिससे किसान अगली फसल की तैयारी बिना किसी रुकावट के कर सकें।
इस योजना के अंतर्गत किसानों की कई तरह की फसलों को बीमा कवर दिया जाता है। इसमें मुख्य रूप से खाद्य फसलें शामिल हैं, जैसे कि अनाज, बाजरा और सभी तरह की दालें। इसके साथ ही तिलहन की फसलों और सालाना कमर्शियल व बागवानी फसलों को भी बीमा सुरक्षा के दायरे में शामिल किया जाता है। प्रति हेक्टेयर बीमा की रकम तय नियमों और वित्तमान के आधार पर तय की जाती है। बैंक से लोन लेने वाले और लोन न लेने वाले दोनों तरह के किसानों के लिए प्रति हेक्टेयर बीमा राशि एक समान रखी जाती है। किसान द्वारा बीमा के लिए बताई गई नोटिफाइड फसल के कुल क्षेत्रफल के हिसाब से ही पूरी बीमा राशि तय होती है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में हर स्थिति में क्लेम पास नहीं होता है। अगर फसल खराब होने के बाद किसान तय समय सीमा में इसकी जानकारी नहीं देते हैं, तो क्लेम अटक सकता है। इसके अलावा जमीन या पहचान से जुड़े जरूरी दस्तावेजों में नाम या अन्य जानकारी का सही मिलान न होने पर भी आवेदन खारिज हो सकता है। यदि किसान ने बीमा में किसी एक फसल का नाम दर्ज कराया है और खेत में कोई दूसरी फसल बो दी है, तो भी बीमा का लाभ नहीं मिलेगा। बैंक खाते की गलत जानकारी देना भी क्लेम फंसने का बड़ा कारण बनता है। इसके साथ ही युद्ध, दंगों, चोरी, जानबूझकर किए गए नुकसान, परमाणु खतरे या पालतू और जंगली जानवरों द्वारा फसल नष्ट किए जाने पर कोई मुआवजा नहीं मिलता है क्योंकि यह योजना के दायरे में नहीं आते हैं।
योजना के तहत प्राकृतिक कारणों से हुए नुकसान की पूरी भरपाई की जाती है। इसमें आकाशीय बिजली गिरने, प्राकृतिक आग लगने, तूफान, ओलावृष्टि, चक्रवात, आंधी और बवंडर से हुए नुकसान को शामिल किया गया है। इसके अलावा बाढ़ आने, खेत में पानी भर जाने, जमीन धंसने, सूखा पड़ने और फसलों में भयानक कीट या बीमारियां लगने से हुए नुकसान पर भी किसानों को बीमा क्लेम दिया जाता है। ऐसे में किसान 16 अगस्त की डेडलाइन से पहले अपने सभी कागजात जांचकर ही आवेदन करें।
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