return to news
  1. फ्लैट का पजेशन लेते वक्त न करें ये गलती, वरना उठाना पड़ सकता है नुकसान, यहां समझें पूरी कहानी

पर्सनल फाइनेंस

फ्लैट का पजेशन लेते वक्त न करें ये गलती, वरना उठाना पड़ सकता है नुकसान, यहां समझें पूरी कहानी

Upstox

4 min read | अपडेटेड August 10, 2026, 12:58 IST

सारांश

मुंबई के पास 1.05 करोड़ रुपये के फ्लैट का पजेशन 2 साल देरी से मिलने पर भी खरीदार को मुआवजा नहीं मिल सका। MahaRERA ने याचिका खारिज कर दी क्योंकि परिवार ने पजेशन लेते समय कोई औपचारिक विरोध दर्ज नहीं कराया था।

maharera-rejects-flat-delay-compensation

पजेशन लेते समय लिखित आपत्ति दर्ज न कराना एक घर खरीदार को भारी पड़ गया।

शहर में अपना खुद का घर खरीदना हर इंसान का सबसे बड़ा सपना होता है। लोग अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई लगाकर सपनों का आशियाना तैयार करते हैं। लेकिन कई बार थोड़ी सी लापरवाही या अनजाने में की गई गलती के कारण भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ जाता है। ऐसा ही एक मामला मुंबई के पास सामने आया है, जहां एक परिवार को फ्लैट मिलने में 2 साल से भी ज्यादा की देरी हुई। देरी होने के बाद भी परिवार को बिल्डर की तरफ से कोई मुआवजा नहीं मिल सका। इस पूरे मामले में महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी MahaRERA ने याचिका खारिज करते हुए साफ किया कि पजेशन लेते वक्त की गई एक गलती के कारण खरीदार मुआवजे का हकदार नहीं रहा।

Open FREE Demat Account within minutes!
Join now

1.05 करोड़ के फ्लैट और पजेशन का पूरा मामला

यह पूरा मामला मुंबई के करीब बने 1.05 करोड़ रुपये के एक फ्लैट से जुड़ा हुआ है। एक परिवार ने 25 फरवरी 2022 को बिल्डर के साथ सेल एग्रीमेंट पर दस्तखत किए थे। एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार बिल्डर को फ्लैट का पजेशन 30 जून 2022 तक देना था। लेकिन बिल्डर तय समय पर पजेशन देने में नाकाम रहा और उसने परिवार को 15 मार्च 2025 को फ्लैट का पजेशन सौंपा। यानी परिवार को अपने फ्लैट के लिए लगभग 2 साल और 8 महीने का लंबा इंतजार करना पड़ा। इतने लंबे समय की देरी की वजह से परिवार को मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने मुआवजे के लिए MahaRERA का रुख किया।

MahaRERA में दायर की गई थी 50 लाख की याचिका

परिवार ने बिल्डर की देरी के खिलाफ MahaRERA में शिकायत दर्ज कराई और मुआवजे की मांग की। अपनी शिकायत में परिवार ने कहा कि देरी से पजेशन मिलने की वजह से उन्हें काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने अपने द्वारा किए गए भुगतान पर 18% सालाना ब्याज के हिसाब से मुआवजे का दावा पेश किया। 15 मार्च 2025 तक यह रकम लगभग 50.6 लाख रुपये बनती थी। इसके अलावा परिवार ने यह आरोप भी लगाया कि बिल्डर ने सेल एग्रीमेंट में बताए गए कॉमन एरिया और वादे के मुताबिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई हैं।

इस एक गलती के कारण खारिज हुई मुआवजे की मांग

मामले की सुनवाई करते हुए MahaRERA ने परिवार की मुआवजे वाली याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया। अथॉरिटी ने अपने फैसले में कहा कि परिवार ने पजेशन लेते समय देरी के खिलाफ कोई औपचारिक लिखित आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी। परिवार ने बिना किसी विरोध के फ्लैट का पजेशन स्वीकार कर लिया था। MahaRERA के मुताबिक, अगर घर खरीदार को पजेशन में देरी के लिए मुआवजा या ब्याज चाहिए, तो उसे पजेशन स्वीकार करने से पहले ही अपनी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए। पजेशन लेने के काफी समय बाद इस तरह की मांग नहीं उठाई जा सकती। साथ ही सुविधाएं न देने के आरोपों पर भी परिवार पर्याप्त फोटो या दस्तावेज सबूत के तौर पर पेश नहीं कर सका।

इस फैसले से उन सभी लोगों को बड़ी सीख मिलती है जो नया फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे हैं। अगर बिल्डर पजेशन देने में देरी करता है, तो पजेशन लेते समय लिखित में अपना विरोध दर्ज कराना बहुत जरूरी है। पजेशन से जुड़े सभी कागजात ध्यान से पढ़ें और फ्लैट में कमियां होने पर उनकी फोटो और वीडियो बनाकर रखें। इसके अलावा भुगतान की रसीदें और पजेशन लेटर जैसे सभी जरूरी दस्तावेज संभालकर रखें ताकि जरूरत पड़ने पर कानूनी मदद ली जा सके।

(डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें।)

लेखकों के बारे में

Upstox
Upstox Hindi News Desk पत्रकारों की एक टीम है जो शेयर बाजारों, अर्थव्यवस्था, वस्तुओं, नवीनतम व्यावसायिक रुझानों और व्यक्तिगत वित्त को उत्साहपूर्वक कवर करती है।

अगला लेख