पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड April 20, 2026, 16:16 IST
सारांश
पर्सनल लोन की अर्जी खारिज होना निराशाजनक हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको दोबारा लोन नहीं मिल सकता। रिजेक्शन के बाद बिना सोचे-समझे दोबारा अप्लाई करने के बजाय इन 6 जरूरी बातों का ध्यान रखें।

पर्सनल लोन रिजेक्ट होने पर क्या करना चाहिए?
पर्सनल लोन आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में पैसों की कमी को पूरा करने का सबसे आसान जरिया बन गया है। लेकिन जब बैंक आपकी लोन एप्लीकेशन को रिजेक्ट कर देता है, तो न केवल आपकी प्लानिंग बिगड़ती है बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ता है। कई लोग रिजेक्शन के तुरंत बाद दूसरे बैंक में अप्लाई कर देते हैं, जो उनकी सबसे बड़ी गलती होती है। लोन रिजेक्ट होने का मतलब यह है कि आपकी प्रोफाइल में कहीं न कहीं कोई कमी है जिसे ठीक करना बहुत जरूरी है। अगर आप भी ऐसी स्थिति से गुजर रहे हैं, तो दोबारा अप्लाई करने से पहले इन 6 जरूरी स्टेप्स को फॉलो करें ताकि अगली बार आपका लोन एक बार में ही अप्रूव हो जाए।
सबसे पहला और जरूरी कदम यह है कि आप अपने बैंक से संपर्क करें और उनसे लिखित में या फोन पर रिजेक्शन का कारण पूछें। बैंक अक्सर क्रेडिट स्कोर कम होने, इनकम की कमी या दस्तावेजों में गलती की वजह से लोन मना कर देते हैं। जब तक आपको असली वजह पता नहीं होगी, आप उसे सुधार नहीं पाएंगे। इसलिए बैंक के जवाब को ध्यान से समझें और उसी हिसाब से अपनी तैयारी शुरू करें।
कई बार आपका सिबिल स्कोर आपकी गलती की वजह से नहीं, बल्कि बैंक की तकनीकी गलती की वजह से गिर जाता है। अपनी क्रेडिट रिपोर्ट निकालें और देखें कि कहीं उसमें कोई ऐसा लोन तो नहीं दिख रहा जिसे आप पहले ही चुका चुके हैं। अगर रिपोर्ट में कोई गलत जानकारी दर्ज है, तो उसे तुरंत ठीक करवाएं। एक साफ-सुथरी क्रेडिट रिपोर्ट लोन मिलने के चांस को काफी हद तक बढ़ा देती है।
पर्सनल लोन एक अनसिक्योर्ड लोन है, इसलिए बैंक सबसे पहले आपका क्रेडिट स्कोर देखते हैं। अगर आपका स्कोर 700 से कम है, तो लोन मिलने में दिक्कत आ सकती है। स्कोर सुधारने के लिए अपने क्रेडिट कार्ड के बिल और पुरानी ईएमआई का भुगतान समय पर करना शुरू करें। अपने पुराने कर्जों को धीरे-धीरे खत्म करें। याद रखें कि एक अच्छा क्रेडिट स्कोर रातों-रात नहीं बनता, इसके लिए आपको कुछ महीनों तक अनुशासन दिखाना होगा।
जब आपका लोन एक जगह से रिजेक्ट होता है और आप तुरंत दूसरी जगह अप्लाई करते हैं, तो बैंक इसे 'क्रेडिट हंग्री' व्यवहार मानते हैं। जितनी बार आप लोन के लिए अप्लाई करते हैं, बैंक आपकी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करता है जिसे 'हार्ड इंक्वायरी' कहा जाता है। ज्यादा हार्ड इंक्वायरी होने से आपका सिबिल स्कोर और गिर जाता है। बेहतर होगा कि एक बार रिजेक्शन मिलने के बाद कम से कम 3 से 6 महीने का इंतजार करें और फिर से अप्लाई करें।
बैंक लोन देते वक्त यह जरूर देखते हैं कि आपकी कुल कमाई का कितना हिस्सा पहले से चल रहे कर्जों को चुकाने में जा रहा है। इसे डेट-टू-इनकम रेशियो कहा जाता है। अगर आपकी आधी से ज्यादा सैलरी पुरानी ईएमआई में जा रही है, तो बैंक नया लोन देने से कतराएंगे। कोशिश करें कि नया लोन मांगने से पहले अपने कुछ छोटे-मोटे कर्ज चुका दें ताकि आपकी हाथ में आने वाली सैलरी (इन-हैंड सैलरी) ज्यादा दिखे और बैंक को आप पर भरोसा हो सके।
हर बैंक और NBFC के लोन देने के नियम अलग-अलग होते हैं। अगर बड़े बैंक आपकी अर्जी ठुकरा रहे हैं, तो आप डिजिटल लेंडर्स या NBFC का रुख कर सकते हैं जो थोड़े लचीले नियमों पर लोन देते हैं। साथ ही, अपनी क्षमता से ज्यादा बड़ा लोन न मांगें। उतना ही अमाउंट चुनें जिसे आप अपनी मंथली इनकम के हिसाब से आसानी से चुका सकें। सही प्लानिंग और इन स्टेप्स को फॉलो करने से आपके लोन अप्रूवल की संभावना शत-प्रतिशत बढ़ जाएगी।
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