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4 min read | अपडेटेड April 20, 2026, 09:58 IST
सारांश
आज भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत मामूली बढ़त के साथ हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए भारी उछाल के बावजूद बाजार में न तो बहुत ज्यादा तेजी दिखी और न ही भारी गिरावट। ऐसे में सवाल ये खड़ा हो रहा है कि आखिर निवेशकों के मन में ऐसा क्या चल रहा है

सोमवार को सेंसेक्स और निफ्टी सपाट खुले हैं।
भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है। सोमवार सुबह जब बाजार खुला तो निवेशकों के मन में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को लेकर काफी शंकाएं थीं। इसके बावजूद, सेंसेक्स और निफ्टी ने मामूली बढ़त के साथ शुरुआत की। सेंसेक्स करीब 139.36 पॉइंट बढ़कर 78,632.90 के लेवल पर खुला, जबकि निफ्टी 37.95 पॉइंट की बढ़त के साथ 24,391.50 पर खुला। बैंकिंग सेक्टर में भी थोड़ी तेजी दिखी और बैंक निफ्टी 138 पॉइंट ऊपर खुला। बाजार की इस चाल को देखकर साफ लग रहा है कि निवेशक फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में हैं और कोई बड़ा रिस्क नहीं लेना चाहते।
मिडिल ईस्ट में हालात काफी बिगड़ गए हैं और इसका असर पूरी दुनिया के बाजारों पर दिख रहा है। पिछले वीकेंड के दौरान खबर आई कि अमेरिका ने ईरान के एक मालवाहक जहाज को जबरन अपने कब्जे में ले लिया है। यह जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पास से गुजरने की कोशिश कर रहा था। इस घटना के बाद ईरान के कमांडरों ने कड़ी जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। इस अनिश्चितता के कारण अमेरिकी फ्यूचर्स में गिरावट दिखी है और एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है।
बता दें कि जब पिछले हफ्ते ये खबर आई थी कि ईरान ने सभी के लिए होर्मुज को ओपेन करने का फैसला लिया है तो अमेरिका और दुनिया के बाकी बाजारों ने इसका जबरदस्त तरीके से स्वागत किया था, लेकिन उसके बाद अमेरिका के तरफ से की गई कार्रवाई ने ईरान के इरादे को फिर से बदल दिया। जिसका एक बड़ा नुकसान भारत के दो जहाजों को भी उठाना पड़ा है। सबसे बड़ी चिंता शांति वार्ता को लेकर है, क्योंकि ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत में शामिल होने से फिलहाल इनकार कर दिया है। पाकिस्तान में होने वाली इस बातचीत से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन अब उन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौती कच्चे तेल की कीमतों का अचानक बढ़ना है। ईरान द्वारा हॉरमुज जलडमरूमध्य को व्यावहारिक रूप से बंद करने की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें 6.10 पर्सेंट बढ़कर 95.89 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 7.49 पर्सेंट उछलकर 90.13 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। तेल की कीमतों में यह उछाल भारत जैसी अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर नहीं है क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। कच्चे तेल में आई इस तेजी के कारण ही बाजार आज बहुत ज्यादा ऊपर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है और निवेशकों में घबराहट बनी हुई है।
जब दुनिया भर में तनाव बढ़ता है तो अक्सर सोने की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन आज डॉलर के मजबूत होने के कारण सोने के दाम नीचे गिरे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 1.4 पर्सेंट गिरकर 4762.09 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। चांदी भी 1.7 पर्सेंट टूटकर 79.42 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती आने के कारण निवेशक सोने से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं। इस वजह से बुलियन मार्केट में आज दबाव देखा जा रहा है।
ग्लोबल संकेतों के बीच चीन से भी एक बड़ी खबर आई है। पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने लगातार 11वें महीने अपनी ब्याज दरों यानी LPR में कोई बदलाव नहीं किया है। चीन ने अपनी एक साल और पांच साल की ब्याज दरों को पुराने स्तर पर ही रखा है। इससे साफ है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। भारतीय निवेशकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि मिडिल ईस्ट में कल खत्म होने वाले युद्धविराम के बाद क्या स्थिति बनती है। फिलहाल बाजार में सावधानी बरतना ही सबसे सही रणनीति मानी जा रही है क्योंकि आने वाले दिनों में वोलैटिलिटी और बढ़ सकती है। यही वजह है कि आज भारतीय बाजार वेट एंड वॉच की स्थिति में नजर आ रहा है।
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