पर्सनल फाइनेंस
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4 min read | अपडेटेड June 02, 2026, 15:34 IST
सारांश
नौकरीपेशा लोगों के लिए अक्सर यह तय करना मुश्किल होता है कि अतिरिक्त पैसे से लोन चुकाएं या भविष्य के लिए निवेश करें। इसका सही फैसला लोन की ब्याज और निवेश के संभावित रिटर्न की तुलना पर निर्भर करता है। महंगे कर्ज को पहले चुकाना और साथ में छोटी बचत जारी रखना सबसे अच्छी रणनीति है।

लोन चुकाने और बेहतर फ्यूचर के लिए निवेश करने के बीच सही तालमेल बनाना जरूरी है। | Image: Shutterstock
नौकरीपेशा लोगों के सामने अक्सर अपनी कमाई को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि जब भी उनके पास कोई एक्स्ट्रा पैसा या बोनस आए, तो उस पैसे से वे अपना पुराना लोन चुकाएं या फिर अपने बेहतर फ्यूचर के लिए उसे कहीं निवेश करें। कई लोगों का ऐसा मानना होता है कि सिर से कर्ज का बोझ जितनी जल्दी उतर जाए, उतना ही अच्छा रहता है। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने ऊपर लोन होने के बावजूद अपना निवेश लगातार जारी रखते हैं। असल में देखा जाए तो इस उलझन का कोई एक सीधा जवाब नहीं है। इसका सही और सटीक फैसला आपके लोन की ब्याज दर और आपकी जोखिम यानी रिस्क उठाने की क्षमता पर पूरी तरह निर्भर करता है। सही प्लानिंग के जरिए ही आप अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत बना सकते हैं और अपने लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं।
कोई भी कदम उठाने से पहले आपको सबसे पहले यह देखना चाहिए कि आपके चालू लोन पर कितनी ब्याज दर लग रही है और दूसरी तरफ निवेश करने से आपको कितने पर्सेंट रिटर्न मिलने की उम्मीद है। मान लीजिए कि आपके किसी पर्सनल लोन पर 14 पर्सेंट का भारी ब्याज लग रहा है, जबकि बाजार में किसी अच्छी जगह निवेश करने से आपको केवल 10 से 12 पर्सेंट का ही रिटर्न मिलने की उम्मीद है। ऐसे माहौल में समझदारी इसी में है कि आप पहले अपने उस लोन को चुकाएं। इसका फायदा यह होगा कि लोन को पहले चुकाकर आप जो ब्याज बचाएंगे, वह आपकी एक तरह से लगभग गारंटीड कमाई के बराबर ही माना जाएगा।
क्रेडिट कार्ड का बकाया, पर्सनल लोन और बहुत महंगी EMI वाले कर्ज आमतौर पर बहुत ज्यादा ब्याज वसूलते हैं। इस तरह के लोन अगर बहुत लंबे समय तक चलते रहें, तो यह आपकी पूरी आर्थिक स्थिति को बहुत कमजोर कर सकते हैं। इसलिए समझदारी इसी में है कि इस तरह के सभी महंगे कर्जों को जितना जल्दी हो सके, पहले ही पूरा चुकाकर पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए ताकि आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
आपको इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि हर लोन को बुरा समझना पूरी तरह गलत है। उदाहरण के लिए होम लोन जैसे कर्जों की ब्याज दरें काफी कम होती हैं और इनके साथ आपको टैक्स का बड़ा बेनिफिट भी मिलता है। अगर आपका होम लोन 8 पर्सेंट की ब्याज दर पर चल रहा है और आपको लगता है कि मार्केट में निवेश करने से लंबे समय में 12 पर्सेंट तक का रिटर्न मिलने की पूरी संभावना है, तो आपको अपना निवेश कभी रोकना नहीं चाहिए। ऐसी स्थिति में आप अपने लोन की मंथली EMI भरते हुए भी अपना इनवेस्टमेंट आसानी से जारी रख सकते हैं।
कई लोग ऐसा सोचते हैं कि जब तक उनका सारा लोन पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक वे किसी भी तरह का नया निवेश शुरू नहीं करेंगे। लेकिन वित्तीय जानकारों के मुताबिक यह सोच पूरी तरह गलत साबित हो सकती है। मान लीजिए कि कोई व्यक्ति 28 साल की उम्र में निवेश शुरू करने की बजाय अगले 10 साल सिर्फ अपना लोन चुकाने में ही लगा देता है। ऐसा करने से वह व्यक्ति कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि का सबसे बड़ा फायदा पूरी तरह खो देता है, जिसे भविष्य में दोबारा हासिल करना नामुमकिन होता है।
अगर कोई व्यक्ति 28 साल की शुरुआती उम्र में ही हर महीने 15,000 रुपये का एसआईपी शुरू कर देता है और उसे औसतन 12 पर्सेंट का सालाना रिटर्न मिलता है, तो आने वाले 30 सालों में वह एक बहुत बड़ी संपत्ति खड़ी कर सकता है। निवेश जितनी जल्दी शुरू किया जाता है, कंपाउंडिंग को अपना काम करने के लिए फ्यूचर में उतना ही ज्यादा समय मिल पाता है।
इस बड़ी उलझन से निकलने का सबसे बेहतर तरीका यह है कि आप सबसे पहले अपने 6 महीने के खर्च के बराबर एक मजबूत जिम्मेदारी के साथ इमरजेंसी फंड तैयार करें। इसके बाद अपने हाई इंटरेस्ट वाले सभी कर्जों को तेजी से चुकाना शुरू करें। इसके साथ ही चाहे छोटी राशि से ही सही, लेकिन अपना निवेश हमेशा चालू रखें। उदाहरण के लिए अगर आपके पास हर महीने खर्च के बाद 30,000 रुपये बचते हैं, तो आप उसमें से 20,000 रुपये लोन चुकाने के लिए रख सकते हैं और बाकी बचे 10,000 रुपये से एसआईपी में निवेश कर सकते हैं।
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