पर्सनल फाइनेंस
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5 min read | अपडेटेड July 01, 2026, 13:26 IST
सारांश
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के दौरान सही फॉर्म चुनना सबसे महत्वपूर्ण काम है। अगर आपकी कमाई के सोर्स एक से ज्यादा हैं लेकिन कुल अर्निंग पचास लाख रुपये से कम है, तो आपको अपनी इनकम के नेचर के हिसाब से आईटीआर 1, 2, 3 या 4 में से सही फॉर्म चुनना होगा।

एक से ज्यादा सोर्स होने पर सही आईटीआर फॉर्म चुनने की पूरी गाइड। | Image source: Shutterstock
इनकम टैक्स रिटर्न भरने की प्रोसेस में सबसे पहला और सबसे जरूरी कदम होता है सही फॉर्म का चुनाव करना। अगर आप गलत फॉर्म चुन लेते हैं, तो आपका रिटर्न डिफेक्टिव माना जा सकता है और आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस भी मिल सकता है। कई लोगों को लगता है कि अगर उनकी कुल सालाना कमाई पचास लाख रुपये से कम है, तो वे सीधे आंख मूंदकर आईटीआर 1 यानी सहज फॉर्म भर सकते हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। फॉर्म का सिलेक्शन सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपकी कुल अर्निंग कितनी है, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपकी कमाई किन-किन जरियों से हो रही है। अगर आपके पास कमाई के एक से ज्यादा सोर्स हैं, तो पचास लाख से कम अर्निंग होने पर भी आपके लिए फॉर्म के नियम बदल जाते हैं।
अगर आपकी कमाई के सोर्स बहुत सीधे और सिंपल हैं, तो आपके लिए ITR 1 फॉर्म सबसे बेस्ट है। इसके लिए शर्त यह है कि आपकी कुल सालाना अर्निंग पचास लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अगर आपको अपनी कंपनी से सैलरी या पेंशन मिलती है, रहने के लिए सिर्फ एक घर है जिससे किराए की कोई मामूली कमाई होती है और इसके साथ बैंक अकाउंट या पोस्ट ऑफिस से मिलने वाला ब्याज या डिविडेंड आपकी इनकम का हिस्सा है, तो आप इस फॉर्म को भर सकते हैं। इस साल के नए अपडेट्स के मुताबिक, अगर आपको इक्विटी या म्यूचुअल फंड से एक लाख पच्चीस हजार रुपये तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स हुआ है, तब भी आप इस फॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन अगर आपके पास एक से ज्यादा घर हैं, तो आप इस फॉर्म को नहीं चुन सकते हैं।
कई बार ऐसा होता है कि किसी टैक्सपेयर की कुल अर्निंग तो पचास लाख रुपये से कम होती है, लेकिन उसकी कमाई के सोर्स थोड़े अलग होते हैं। मान लीजिए कि आपको सैलरी भी मिलती है और इसके साथ ही आपने कोई जमीन, मकान या शेयर बाजार में ट्रेडिंग करके शॉर्ट टर्म या ज्यादा मात्रा में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स कमाया है, तो आपके लिए आईटीआर 2 फॉर्म भरना जरूरी हो जाता है। इसके अलावा, अगर आपको एक से ज्यादा मकानों से किराए की अर्निंग हो रही है, या फिर आप किसी कंपनी में डायरेक्टर हैं या आपके पास किसी अनलिस्टेड कंपनी के इक्विटी शेयर मौजूद हैं, तो भी आपको आईटीआर 2 फॉर्म की तरफ ही जाना होगा। इस फॉर्म में आपके पूरे इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो और अलग-अलग एसेट्स से होने वाली कमाई की पूरी डिटेल मांगी जाती है।
अगर आपकी कमाई के सोर्स में कोई छोटा बिजनेस, दुकान या कोई प्रोफेशन शामिल है और आपकी कुल सालाना अर्निंग पचास लाख रुपये तक है, तो आपके लिए आईटीआर 4 यानी सुगम फॉर्म बनाया गया है। यह फॉर्म उन लोगों के लिए बेस्ट है जो सरकार की प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम का फायदा उठाते हैं। इसका मतलब यह है कि अगर आप डॉक्टर, फ्रीलांसर, दुकानदार या छोटे व्यापारी हैं और आप अपने पूरे टर्नओवर का एक निश्चित तय पर्सेंट हिस्सा नेट प्रॉफिट मानकर उस पर टैक्स चुकाना चाहते हैं, तो आपको यही फॉर्म चुनना होगा। इस फॉर्म को भरने के लिए आपको बहुत भारी-भरकम अकाउंट बुक्स या बैलेंस शीट बनाने की जरूरत नहीं होती है। आप अपनी कुल रसीदों की सीधी जानकारी देकर इसे आसानी से फाइल कर सकते हैं।
अगर आपकी कुल अर्निंग पचास लाख रुपये से कम है, लेकिन आप कोई ऐसा बिजनेस या प्रोफेशन चलाते हैं जिसमें आपको बकायदा अपने सारे अकाउंट्स मेंटेन करने पड़ते हैं और आपके पास ऑडिट की रिपोर्ट भी होती है, तो आपके लिए आईटीआर 3 फॉर्म तय किया गया है। इसके अलावा, अगर आप किसी पार्टनरशिप फर्म में पार्टनर हैं और वहां से आपको कोई सैलरी, बोनस या नेट प्रॉफिट का हिस्सा मिल रहा है, तो आप आईटीआर 1 या 4 नहीं भर सकते हैं। भले ही आपकी टोटल अर्निंग कम हो, लेकिन बिजनेस के पूरे ऑपरेशन और खर्चों का ब्योरा देने के लिए आपको आईटीआर 3 फॉर्म का ही इंप्लीमेंटेशन करना होगा। इसमें आपको अपने बिजनेस की पूरी एसेट और लायबिलिटी की जानकारी देनी पड़ती है।
अपनी कमाई के सभी सोर्सेज को समझने के बाद जब आप सही फॉर्म चुन लें, तो फाइलिंग से पहले कुछ जरूरी काम जरूर पूरे कर लें। सबसे पहले इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर अपना एआईएस यानी एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट और टीआईएस जरूर डाउनलोड करें। इसमें आपके पूरे साल के फाइनेंशियल लेन-देन का एक कंसोलिडेटेड ब्योरा होता है। आपके अलग-अलग सोर्सेज से मिलने वाला डिविडेंड, सेविंग्स अकाउंट का ब्याज या कोई भी पुराना ट्रांजैक्शन इसमें दर्ज होता है। अगर आपके पास मौजूद डॉक्यूमेंट्स और एआईएस के आंकड़ों में कोई अंतर मिलता है, तो उसे पहले ही चेक कर लें ताकि फ्यूचर में कोई गड़बड़ी न हो। इसके साथ ही अपने पैन और आधार को लिंक रखना और बैंक अकाउंट को प्री-वैलिडेट करना भी बेहद जरूरी है ताकि आपका टैक्स रिफंड सीधे आपके खाते में आ सके।
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