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3 min read | अपडेटेड January 29, 2026, 16:27 IST
सारांश
बजट 2026 के करीब आते ही मध्यम वर्ग के टैक्सपेयर्स की उम्मीदें बढ़ गई हैं। बढ़ती महंगाई के बीच लोग अपनी 'डिस्पोजेबल इनकम' बढ़ाने के लिए टैक्स स्लैब में बदलाव और स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। साथ ही निवेश पर टैक्स छूट की वापसी को लेकर भी बड़ी चर्चा है।

बजट 2026 और मध्यम वर्ग की उम्मीदों का पिटारा
भारत का मध्यम वर्ग 1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। जीवन यापन की बढ़ती लागत और महंगाई के बीच इस वर्ग को वित्त मंत्री से बड़ी राहत की उम्मीद है। मुख्य रूप से वेतनभोगी कर्मचारी चाहते हैं कि उनके हाथ में आने वाला पैसा (Take-home pay) बढ़े ताकि वे अपने खर्चों को आसानी से संभाल सकें। इसके लिए इनकम टैक्स में राहत ही सबसे बड़ा जरिया नजर आता है। टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ाती है और टैक्स स्लैब को अधिक उदार बनाती है, तो इससे करोड़ों मध्यमवर्गीय परिवारों को सीधा फायदा होगा।
सरकार पिछले कुछ समय से नई टैक्स व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है, लेकिन मध्यम वर्ग अभी भी इसमें कुछ कमियां महसूस करता है। टैक्सपेयर्स की मांग है कि नई व्यवस्था में भी कुछ प्रमुख कटौतियों को वापस लाया जाना चाहिए। विशेष रूप से होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली छूट, मेडिकल इंश्योरेंस का प्रीमियम (Section 80D) और बचत योजनाओं (Section 80C) में निवेश पर मिलने वाली राहत को नई व्यवस्था में शामिल करने की मांग जोर पकड़ रही है। लोग चाहते हैं कि नियमों को सरल रखा जाए, लेकिन टैक्स का बोझ भी कम हो। इसके अलावा इनकम टैक्स एक्ट में प्रस्तावित बदलावों को लेकर भी लोग स्पष्टता की उम्मीद कर रहे हैं ताकि फाइलिंग में कोई भ्रम न रहे।
मध्यम वर्ग के लिए एक बड़ी चिंता निवेश पर लगने वाला टैक्स भी है। स्क्रेपबॉक्स के मैनेजिंग पार्टनर सचिन जैन के अनुसार, नई टैक्स व्यवस्था ने अनुपालन (Compliance) को तो आसान बनाया है, लेकिन स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी की सख्त जरूरत है। यह विशेष रूप से उन रिटायर हो चुके लोगों के लिए जरूरी है जो केवल फिक्स्ड इनकम यानी पेंशन या ब्याज पर निर्भर हैं। अगर सरकार स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाती है, तो इन बुजुर्गों को एक बड़ी राहत मिल सकेगी। साथ ही टीडीएस (TDS) की प्रक्रियाओं को आसान बनाने की मांग भी इस बजट की 'विशलिस्ट' में शामिल है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स के बीच कम होता अंतर निवेशकों के उत्साह को कम कर रहा है। सचिन जैन का मानना है कि अगर भारत चाहता है कि घरेलू परिवार अपनी बचत को देश के विकास में लगाएं और शेयर बाजार में भागीदारी बढ़ाएं, तो लंबी अवधि के निवेश के लिए विशेष प्रोत्साहन देने होंगे। इसके लिए एलटीसीजी छूट की सीमा को बढ़ाना एक सही कदम होगा। यह न केवल लोगों को लंबे समय तक निवेश बनाए रखने के लिए प्रेरित करेगा, बल्कि इससे मध्यम वर्ग की भविष्य की आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
शिक्षा और स्वास्थ्य के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे मध्यम वर्ग की बचत पर बुरा असर पड़ रहा है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं और आवास ऋण पर मिलने वाली कटौतियों को और बढ़ाने की मांग की जा रही है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Prudence) बनाए रखते हुए ऐसी राहत देगी जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ कम हो। कुल मिलाकर, मध्यम वर्ग इस बार के बजट से केवल बड़े वादे नहीं बल्कि छोटे और सार्थक सुधारों की उम्मीद कर रहा है जो उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव ला सकें।
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