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4 min read | अपडेटेड January 28, 2026, 13:28 IST
सारांश
Union Budget 2026: बजट 2026 से पहले इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) फाइनेंसिंग और एड-टेक (Ed-tech) सेक्टर के दिग्गजों ने अपनी मांगें रखी हैं। ईवी सेक्टर ने पीएसएल वर्गीकरण (PSL classification) और क्रेडिट गारंटी की मांग की है, जबकि एड-टेक सेक्टर ने भी अपनी राय रखी है।

बजट 2026 में ईवी और एड-टेक जैसे उभरते सेक्टर्स के लिए बड़े नीतिगत बदलावों की उम्मीद है।
Union Budget 2026: भारत एक बहुत ही तेजी से बढ़ने वाला देश है और यहां के लिए सरकारी बजट सिर्फ कुछ आंकड़ों का जोड़-घटाव नहीं होता। यह असल में आने वाले कल की दिशा तय करने वाला एक बड़ा कागज होता है। बजट 2026 की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और इसी बीच अलग-अलग उभरते हुए सेक्टर्स के जानकारों ने अपनी बातें रखी हैं। इस बार सबका ध्यान मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक गाड़ियों और पढ़ाई की तकनीक से जुड़े स्टार्टअप्स पर है। यह दोनों सेक्टर आज के आधुनिक भारत की पहचान बन चुके हैं। इनसे न सिर्फ पर्यावरण को फायदा होता है बल्कि यह नौकरी देने और देश की तरक्की के लिए भी बहुत जरूरी हैं। इन सेक्टर्स के जानकारों ने वित्त मंत्री को कुछ खास सुझाव दिए हैं ताकि उनके रास्ते में आने वाली रुकावटें दूर हो सकें।
मुफिन ग्रीन फाइनेंस के सीबीओ धीरज अग्रवाल ने इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने के लिए मिलने वाले लोन की मुश्किलों पर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि इस काम से जुड़ी फाइनेंस कंपनियों को पैसा जुटाने में काफी ज्यादा खर्च करना पड़ता है और उनके पास लंबे समय के लिए फंड की कमी रहती है। अग्रवाल ने बजट 2026 के लिए एक बड़ा सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि इलेक्ट्रिक गाड़ी के लिए मिलने वाले लोन को 'प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग' का दर्जा मिलना चाहिए। इसके साथ ही इन कंपनियों के लिए सरकार को एक खास गारंटी योजना शुरू करनी चाहिए। अगर ऐसा होता है तो लोगों को बहुत ही कम ब्याज पर और आसानी से लोन मिल सकेगा। इससे पैसा डूबने का डर भी कम होगा और लोग ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीद पाएंगे।
धीरज अग्रवाल ने एक और बहुत ही काम की बात कही है। उन्होंने बैटरी की पहचान और उसकी सेहत जानने के लिए 'बैटरी पासपोर्ट' जैसा एक सिस्टम बनाने की सलाह दी है। इसे आप 'बैटरी पैक आधार' की तरह समझ सकते हैं। इस सिस्टम के आने से यह पता चल सकेगा कि बैटरी की हालत कैसी है और उसे दोबारा कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे जो कंपनियां लोन देती हैं उन्हें भरोसा रहेगा कि गाड़ी की बैटरी सही है और इससे उनका रिस्क भी कम होगा। यह छोटी सी लगने वाली बात पूरे इलेक्ट्रिक गाड़ी बाजार की तस्वीर बदल सकती है।
अब बात करते हैं पढ़ाई की तकनीक यानी एड-टेक सेक्टर की। स्टेमरोबो के संस्थापक और सीएफओ राजीव तिवारी ने इस क्षेत्र की परेशानियों को दुनिया के सामने रखा है। उन्होंने बताया कि पढ़ाई से जुड़े स्टार्टअप्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती सही समय पर पैसा मिलना है। अक्सर इन कंपनियों को ऐसे निवेश की जरूरत होती है जो लंबे समय तक उनके साथ रहे क्योंकि शिक्षा का असर दिखने में वक्त लगता है। तिवारी का मानना है कि बजट में नई तरह की पढ़ाई के लिए सरकार को खास मदद और इनाम देने चाहिए। उन्होंने मांग की है कि डिजिटल पढ़ाई को सरकारी स्कूलों और कॉलेजों के साथ बेहतर तरीके से जोड़ा जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चे इसका फायदा उठा सकें।
स्कूलों और कॉलेजों के साथ बढ़ेगी दोस्ती
राजीव तिवारी ने छोटे शहरों और गांवों में इंटरनेट और कंप्यूटर की कमी का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि आने वाले बजट में डिजिटल ढांचे को और भी मजबूत करने के लिए नई शिक्षा नीति के हिसाब से एक खास ढांचा बनाना चाहिए। इसमें बच्चों के डेटा की सुरक्षा और पढ़ाई के नतीजों को जांचने के साफ नियम होने चाहिए। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई स्किल्स सिखाने वाले प्लेटफॉर्म्स को भी सरकार की तरफ से बढ़ावा मिलना चाहिए। इन जानकारों का कहना है कि अगर सरकार स्टार्टअप्स और स्कूलों के बीच पार्टनरशिप को बढ़ावा देती है तो इससे करोड़ों बच्चों को फायदा होगा।
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