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  1. जॉइंट होम लोन लेने वाले एक व्यक्ति की मौत हो जाए तो क्या होगा? कौन चुकाएगा बाकी लोन? समझिए नियम

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जॉइंट होम लोन लेने वाले एक व्यक्ति की मौत हो जाए तो क्या होगा? कौन चुकाएगा बाकी लोन? समझिए नियम

Shubham Singh Thakur

4 min read | अपडेटेड October 29, 2026, 14:47 IST

सारांश

अगर होम लोन लेने वाले व्यक्ति की लोन चुकाने की अवधि पूरी होने से पहले मौत हो जाती है, तो बैंक सबसे पहले यह देख सकता है कि लोन के साथ होम लोन इंश्योरेंस लिया गया था या नहीं। होम लोन इंश्योरेंस को होम लोन प्रोटेक्शन प्लान भी कहा जाता है।

Home Loan

जॉइंट होम लोन लेते समय बीमा की शर्तों को समझना, लोन एग्रीमेंट पढ़ना जरूरी है।

Home Loan: घर खरीदना ज्यादातर लोगों के जीवन का बड़ा सपना होता है। लेकिन आज के समय में प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतों और महंगाई के कारण बिना लोन के घर खरीदना आसान नहीं है। ऐसे में होम लोन लोगों को कई सालों में किस्तों के जरिए घर की कीमत चुकाने की सुविधा देता है। कई लोग अपने पति या पत्नी अथवा परिवार के किसी दूसरे सदस्य के साथ मिलकर जॉइंट होम लोन लेते हैं। इससे लोन मिलने की संभावना बढ़ सकती है और दोनों लोग मिलकर EMI चुकाते हैं।
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लेकिन होम लोन की अवधि 15 से 30 साल तक हो सकती है। इस दौरान अगर लोन लेने वाले किसी एक व्यक्ति की मौत हो जाए, तो परिवार के सामने कई तरह की आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बाकी लोन कौन चुकाएगा और क्या बैंक घर पर कब्जा कर सकता है?

होम लोन लेने वाले की मौत होने पर क्या होगा?

अगर होम लोन लेने वाले व्यक्ति की लोन चुकाने की अवधि पूरी होने से पहले मौत हो जाती है, तो बैंक सबसे पहले यह देख सकता है कि लोन के साथ होम लोन इंश्योरेंस लिया गया था या नहीं। होम लोन इंश्योरेंस को होम लोन प्रोटेक्शन प्लान भी कहा जाता है। यह एक तरह की बीमा पॉलिसी होती है, जिसका उद्देश्य बीमित व्यक्ति की मौत होने पर बकाया होम लोन चुकाने में मदद करना है।

अगर लोन पर लागू बीमा पॉलिसी मौजूद है, तो उसकी शर्तों के मुताबिक बीमा कंपनी बकाया लोन का भुगतान कर सकती है। इससे परिवार पर लोन चुकाने का आर्थिक बोझ कम हो सकता है। हालांकि, बीमा कंपनी कितना भुगतान करेगी, यह पॉलिसी के कवरेज, नियमों और बाकी बकाया राशि पर निर्भर करता है।

जॉइंट होम लोन में दूसरे व्यक्ति की क्या जिम्मेदारी होगी?

अगर पति-पत्नी या परिवार के दो सदस्यों ने मिलकर जॉइंट होम लोन लिया है और उनमें से किसी एक की मौत हो जाती है, तो दूसरे को लोन की ईएमआई चुकाते रहना पड़ सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि जॉइंट लोन में दोनों सह-उधारकर्ताओं की जिम्मेदारी लोन एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार होती है।

उदाहरण के लिए, अगर पति और पत्नी ने मिलकर घर खरीदने के लिए 40 लाख रुपये का लोन लिया है और पति की मौत हो जाती है, तो पत्नी को बकाया लोन चुकाना पड़ सकता है। अगर होम लोन इंश्योरेंस मौजूद है, तो पॉलिसी के तहत मिलने वाली राशि से बकाया कर्ज कम या पूरा हो सकता है।

EMI नहीं चुका पाए तो क्या बैंक घर बेच सकता है?

अगर जीवित सह-उधारकर्ता आर्थिक परेशानी के कारण ईएमआई नहीं चुका पाता है, तो बैंक गारंटर से भुगतान की मांग कर सकता है। कानूनी वारिसों की जिम्मेदारी उनकी कानूनी स्थिति और विरासत में मिली संपत्ति जैसे पहलुओं पर निर्भर करती है। केवल परिवार का सदस्य होने के कारण हर व्यक्ति अपने आप कर्ज चुकाने के लिए जिम्मेदार नहीं हो जाता।

ऐसी स्थिति में परिवार बैंक से संपर्क करके अतिरिक्त समय, लोन की शर्तों में बदलाव या कुछ समय के लिए राहत देने का अनुरोध कर सकता है। बैंक मामले और लागू नियमों के आधार पर इस पर विचार कर सकता है।

हालांकि, अगर लंबे समय तक लोन का भुगतान नहीं होता और बकाया वसूलने के दूसरे उपाय सफल नहीं होते, तो बैंक लागू कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरवी रखी प्रॉपर्टी को बेचकर अपना पैसा वसूल सकता है। इसलिए जॉइंट होम लोन लेते समय बीमा की शर्तों को समझना, लोन एग्रीमेंट पढ़ना और परिवार के लिए आपातकालीन फंड रखना जरूरी है। इससे किसी अनहोनी की स्थिति में घर को आर्थिक संकट से बचाने में मदद मिल सकती है।

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