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4 min read | अपडेटेड July 31, 2026, 18:18 IST
सारांश
अगर आप छोटे कारोबारी, फ्रीलांसर या प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन वाले टैक्सपेयर हैं, तो आईटीआर-4 से जुड़े नियम जानना आपके लिए जरूरी है। इस साल सरकार ने आईटीआर-4 फॉर्म में कुछ बड़े बदलाव किए हैं।

एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आईटीआर-4 फाइलिंग के नियम और नई बदलावों की पूरी जानकारी।
अगर आप छोटा बिजनेस चलाते हैं, फ्रीलांसिंग करते हैं या किसी प्रोफेशन से जुड़े हैं, तो इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले आपको आईटीआर-4 यानी सुगम फॉर्म से जुड़े नियमों को अच्छे से समझ लेना चाहिए। आयकर विभाग ने एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आईटीआर-4 भरने के पात्रता मापदंड, नए बदलाव और टैक्स रिजीम से जुड़े जरूरी दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। सही फॉर्म का चुनाव न करने पर आपका रिटर्न अमान्य हो सकता है।
एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए आईटीआर-4 फॉर्म ऐसे निवासी व्यक्ति (रेसिडेंट इंडिविजुअल), हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) और पार्टनरशिप फर्म (LLP को छोड़कर) दाखिल कर सकते हैं, जिनकी पूरे वित्त वर्ष के दौरान कुल कमाई 50 लाख रुपये से अधिक नहीं है। इसके साथ ही उनकी बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाली कमाई सेक्शन 44AD, 44ADA या 44AE के तहत प्रिजम्प्टिव बेसिस पर गिनी जाती हो। इस फॉर्म में सैलरी या पेंशन, दो हाउस प्रॉपर्टी, कृषि से 5,000 रुपये तक की आय और सेक्शन 112A के तहत 1.25 लाख रुपये तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन को दिखाया जा सकता है। अन्य स्रोतों से होने वाली आय जैसे सेविंग्स अकाउंट का ब्याज, बैंक या पोस्ट ऑफिस एफडी का ब्याज, टैक्स रिफंड पर मिला ब्याज, फैमिली पेंशन या अन्य अनसिक्योर्ड लोन से मिले ब्याज वाले लोग भी इसे भर सकते हैं। हालांकि इसमें लॉटरी या रेसकोर्स से हुई कमाई शामिल नहीं होनी चाहिए।
कई तरह के टैक्सपेयर्स को आईटीआर-4 भरने की इजाजत नहीं दी गई है। अगर आपकी कुल कमाई 50 लाख रुपये से ज्यादा है या आप नॉन-रेसिडेंट इंडियन (NRI) या आरएनओआर (RNOR) हैं, तो आप इसे नहीं भर सकते। इसके अलावा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स वाले, सेक्शन 112A के तहत 1.25 लाख रुपये से अधिक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स वाले और 5,000 रुपये से अधिक की कृषि आय वाले लोग भी इस फॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर सकते। अगर आप किसी कंपनी में डायरेक्टर हैं, दो से अधिक हाउस प्रॉपर्टी से कमाई करते हैं, या आपके पास किसी अनलिस्टेड कंपनी के इक्विटी शेयर रहे हैं, तो भी आप आईटीआर-4 के पात्र नहीं हैं। लॉटरी से जीत, घोड़ों की रेस से कमाई, विशेष दरों पर टैक्स योग्य आय, और स्टार्टअप ईएसओपी पर टैक्स टालने वाले टैक्सपेयर्स भी इस दायरे से बाहर रखे गए हैं।
इस साल आईटीआर-4 फॉर्म में कुछ बड़े और राहत देने वाले बदलाव किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि टैक्सपेयर्स अब एक के बजाय दो हाउस प्रॉपर्टी से होने वाली आय की जानकारी दे सकते हैं। इसके अलावा किराए की संपत्ति से जुड़ा एक नया कॉलम जोड़ा गया है, जिसमें आप न मिल सके किराए यानी अनरियलाइज्ड रेंट की जानकारी अलग से दर्ज कर सकते हैं। वहीं विदेशी रिटायरमेंट बेनिफिट्स से जुड़ी रिपोर्टिंग की शर्त को अब इस फॉर्म से हटा दिया गया है, जिससे टैक्सपेयर्स को फॉर्म भरने में आसानी होगी।
बिजनेस आय वाले व्यक्ति अगर पुरानी टैक्स व्यवस्था यानी ओल्ड टैक्स रिजीम चुनना चाहते हैं, तो वे ऐसा कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 139(1) के तहत तय आखिरी तारीख से पहले फॉर्म 10-IEA भरना अनिवार्य होगा। हालांकि, बिजनेस आय वाले लोग हर साल अपनी मर्जी से ओल्ड और न्यू टैक्स रिजीम के बीच बदलाव नहीं कर सकते। यदि आपने एक बार ओल्ड टैक्स रिजीम चुन लिया है, तो अपने पूरे जीवनकाल में आपको केवल एक बार ही वापस न्यू टैक्स रिजीम में लौटने का मौका मिलेगा। एक बार न्यू टैक्स रिजीम में वापस आने के बाद आप फिर कभी ओल्ड टैक्स रिजीम का चयन नहीं कर पाएंगे। इसके लिए बिजनेस आय वाले लोगों को दो बार फॉर्म 10-IEA जमा करना पड़ता है, एक बार ओल्ड रिजीम चुनने के लिए और दूसरी बार न्यू रिजीम में वापस आने के लिए।
आईटीआर-4 दाखिल करने वाले ऐसे टैक्सपेयर्स, जिन्हें अपने खातों का टैक्स ऑडिट कराने की जरूरत नहीं होती है, उनके लिए इनकम टैक्स रिटर्न जमा करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त है। इस तय समयसीमा के भीतर ही आपको अपना रिटर्न भरकर ई-वेरिफाई भी करना होता है। यदि आप 31 अगस्त की आखिरी तारीख तक अपना आईटीआर-4 दाखिल नहीं कर पाते हैं, तो आपको लेट फीस और ब्याज के साथ बिलेटेड रिटर्न भरना पड़ सकता है।
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