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3 min read | अपडेटेड September 23, 2026, 18:05 IST
सारांश
सरकार ने EPFO की वेज सीलिंग को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति महीने कर दिया है। इस फैसले से लगभग 51 लाख नए कर्मचारियों को सोशल सिक्योरिटी का फायदा मिलेगा। हालांकि जिन कर्मचारियों का पीएफ 15,000 रुपये की सीमा पर कट रहा था, उनकी टेक होम सैलरी हर महीने घट सकती है।

EPFO वेज सीलिंग बढ़कर 25,000 रुपये होने से कर्मचारियों की इन हैंड सैलरी और पेंशन पर असर पड़ेगा।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO के वेज सीलिंग नियमों में 12 साल बाद बड़ा बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार ने पीएफ कवरेज के लिए जरूरी वेज सीलिंग को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति महीने कर दिया है। इससे पहले साल 2014 में इस सीमा को 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये किया गया था। सरकार के इस फैसले से औपचारिक क्षेत्र के लगभग 51 लाख से ज्यादा नए कर्मचारियों को सोशल सिक्योरिटी के दायरे में लाया जा सकेगा। इस फैसले से कर्मचारियों की हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी यानी टेक होम पे और उनके फ्यूचर रिटायरमेंट फंड पर बड़ा असर पड़ने वाला है।
जिन कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से ज्यादा और 25,000 रुपये तक है और अब तक उनका पीएफ 15,000 रुपये की पुरानी सीमा पर कट रहा था, उनकी इन हैंड सैलरी में कमी आ सकती है। पुराने नियमों के तहत 15,000 रुपये की वेज सीलिंग पर 12% के हिसाब से कर्मचारी का पीएफ अंशदान 1,800 रुपये महीना कटता था। अब 25,000 रुपये की नई सीलिंग लागू होने पर 12% के हिसाब से कर्मचारी का पीएफ कटौती बढ़कर 3,000 रुपये प्रति महीने हो जाएगी। इसका सीधा मतलब यह है कि कर्मचारी की सैलरी से हर महीने 1,200 रुपये अतिरिक्त कटेंगे, जिससे उनकी हर महीने की टेक होम सैलरी 1,200 रुपये कम हो जाएगी।
भले ही हर महीने इन हैंड सैलरी में थोड़ी कटौती होगी, लेकिन लंबे समय में कर्मचारियों का PF कॉर्पस काफी तेजी से बढ़ेगा। जिस तरह कर्मचारी का कटौती अमाउंट 1,800 रुपये से बढ़कर 3,000 रुपये होगा, उसी तरह एम्प्लॉयर यानी कंपनी का अंशदान भी 1,800 रुपये से बढ़कर 3,000 रुपये हो जाएगा। यानी हर महीने पीएफ खाते में कुल 3,600 रुपये के बजाय 6,000 रुपये जमा होंगे। एम्प्लॉयर की तरफ से मिलने वाले अतिरिक्त 1,200 रुपये से कर्मचारी का कुल रिटायरमेंट फंड काफी बड़ा बनेगा और उस पर मिलने वाले कंपाउंड ब्याज का भी फायदा मिलेगा।
वेज सीलिंग बढ़ने का बड़ा फायदा एम्प्लॉई पेंशन स्कीम यानी EPS और एम्प्लॉई डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस यानी EDLI स्कीम में भी देखने को मिलेगा। एम्प्लॉयर के 12% हिस्से में से 8.33% हिस्सा ईपीएस पेंशन फंड में जाता है। पुरानी 15,000 रुपये की सीमा में पेंशन फंड में अधिकतम 1,250 रुपये महीना जमा होता था, जो अब 25,000 रुपये की सीमा पर बढ़कर लगभग 2,083 रुपये महीना हो जाएगा। इससे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली मासिक पेंशन राशि में भी बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा ईडीएलआई के तहत मिलने वाला अधिकतम लाइफ इंश्योरेंस कवर भी 7 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 10.50 लाख रुपये तक हो सकता है, जिससे किसी अप्रिय घटना की स्थिति में कर्मचारी के परिवार को ज्यादा वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।
इस नए नियम के इंप्लिमेंटेशन से कंपनियों के पेरोल और बजट पर भी असर पड़ेगा। 15,000 रुपये से 25,000 रुपये के बीच सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए कंपनियों को अब ज्यादा पीएफ कंट्रिब्यूशन देना होगा, जिससे उनका प्रति कर्मचारी खर्च लगभग 1,200 रुपये महीना बढ़ जाएगा। लेबर कोड के नियमों के अनुसार कंपनियां इस अतिरिक्त खर्च को कर्मचारी की बेसिक सैलरी से आसानी से नहीं घटा सकती हैं।
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