पर्सनल फाइनेंस
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3 min read | अपडेटेड May 27, 2026, 10:35 IST
सारांश
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए अपने ऑफिशियल ई-फाइलिंग पोर्टल पर आईटीआर-2 की ऑनलाइन फाइलिंग और एक्सेल यूटिलिटी सर्विस को चालू कर दिया है। इससे पहले डिपार्टमेंट की तरफ से आईटीआर-1 और आईटीआर-4 की सर्विस को भी एक्टिव किया जा चुका है।

ITR-2 को नोटिफाई कर दिया गया है। Image: Shutterstock
इनकम टैक्स रिटर्न भरने वाले देश के लाखों टैक्सपेयर्स के लिए एक बहुत बड़ी और जरूरी खबर सामने आई है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए अपने ऑफिशियल ई-फाइलिंग पोर्टल पर आईटीआर-2 की ऑनलाइन फाइलिंग और एक्सेल यूटिलिटी सर्विस को शुरू कर दिया है। डिपार्टमेंट ने अपने ऑफिशियल एक्स हैंडल से पोस्ट शेयर करके टैक्सपेयर्स को यह अहम जानकारी दी है। इसका मतलब यह है कि जो टैक्सपेयर्स आईटीआर-2 फॉर्म के दायरे में आते हैं, वे अब बिना किसी देरी के अपना रिटर्न ऑनलाइन मोड में फाइल कर सकते हैं।
आपको बता दें कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इस बार नए असेसमेंट ईयर के लिए काफी तेजी से काम कर रहा है। आईटीआर-2 की सर्विस लाइव होने से पहले ही डिपार्टमेंट की तरफ से आईटीआर-1 और आईटीआर-4 फॉर्म को पोर्टल पर नोटिफाई और एक्टिव किया जा चुका है। अब आईटीआर-2 फॉर्म के भी लाइव हो जाने से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जो नौकरीपेशा होने के साथ-साथ शेयर मार्केट या प्रॉपर्टी से भी अच्छी कमाई करते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर आईटीआर-2 फॉर्म किन लोगों को भरना होता है। यह फॉर्म मुख्य रूप से उन इंडिविजुअल्स और हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली यानी HUF के लिए है, जिनकी कमाई का जरिया बिजनेस या प्रोफेशन नहीं है। अगर आपकी सालाना कमाई 50 लाख रुपये से ज्यादा है, तो आपको आईटीआर-2 भरना होगा। इसके अलावा अगर आपको सैलरी या पेंशन के साथ-साथ एक से ज्यादा मकान से रेंटल इनकम होती है, या फिर आपने शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और प्रॉपर्टी बेचकर कैपिटल गेंस यानी मुनाफा कमाया है, तो आपके लिए आईटीआर-2 फॉर्म भरना अनिवार्य है। साथ ही अगर आपके पास कोई विदेशी संपत्ति है या विदेश से कोई कमाई हुई है, तो भी इसी फॉर्म का इस्तेमाल करना होगा। किसी कंपनी के डायरेक्टर और अनलिस्टेड शेयर्स में निवेश करने वाले लोग भी इसी कैटेगरी में आते हैं।
यह जानना भी बहुत जरूरी है कि कौन से लोग आईटीआर-2 फॉर्म का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। अगर आपकी आमदनी किसी भी तरह के बिजनेस या फिर किसी प्रोफेशन से होती है, तो आप इस फॉर्म को नहीं भर सकते हैं। ऐसे टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने दूसरे फॉर्म जैसे आईटीआर-3 या आईटीआर-4 तय किए हैं। अगर आप पार्टनरशिप फर्म में पार्टनर हैं या फिर खुद का कोई छोटा-बड़ा व्यापार चलाते हैं, तो आपको आईटीआर-2 के बजाय अपनी कैटेगरी के हिसाब से सही फॉर्म चुनना होगा। गलत फॉर्म चुनने पर आपका रिटर्न डिफेक्टिव माना जा सकता है और आपको नोटिस भी मिल सकता है।
आईटीआर-2 फॉर्म भरते समय टैक्सपेयर्स को कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए ताकि बाद में कोई गड़बड़ी न हो। सबसे पहले अपने पास फॉर्म 16, फॉर्म 16A, AIS यानी एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट और फॉर्म 26AS को अच्छी तरह से चेक कर लें। अपने बैंक अकाउंट के स्टेटमेंट और शेयर ब्रोकर से मिले कैपिटल गेंस स्टेटमेंट को भी पास में रखें ताकि कमाई का एक-एक आंकड़ा बिल्कुल सही भरा जा सके। इस बार टैक्स स्लैब और नियमों में हुए बदलावों को भी ध्यान से पढ़ लें। अगर आप ऑनलाइन सीधे पोर्टल पर फॉर्म भर रहे हैं तो अपनी डिटेल्स को बार-बार री-चेक करें, और अगर एक्सेल यूटिलिटी का इस्तेमाल कर रहे हैं तो सही डेटा अपलोड करने के बाद रिटर्न को ई-वेरिफाई करना बिल्कुल न भूलें।
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