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  1. VB-G-RAM G ऐक्ट 2025 कैसे है महात्मा गांधी नरेगा से अलग, 25 FAQs में समझें इससे जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी

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VB-G-RAM G ऐक्ट 2025 कैसे है महात्मा गांधी नरेगा से अलग, 25 FAQs में समझें इससे जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी

Namita Shukla

7 min read | अपडेटेड May 12, 2026, 12:17 IST

सारांश

विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) की गारंटी: वीबी-जी राम जी (विकसित भारत - जी राम जी) अधिनियम, 2025, केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने के बाद, 01/07/2026 से देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा।

VB-G RAM G ACT 2025

विकसित भारत-जी राम जी ऐक्ट से जुड़े 25 FAQs (Photo: Shutterstock)

विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G Act 2025) 1 जुलाई से लागू होने जा रहा है। सरकारी नोटिफिकेशन 11 मई को जारी किया जा चुका है। ग्रामीण विकास के लिए इसके क्या मायने हैं, इसका किस तरह से लाभ उठाया जा सकता है और यह किस तरह से महात्मा गांधी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 (महात्मा गांधी नरेगा अधिनियम 2005) से अलग है, चलिए इन सभी सवालों के जवाब समझते हैं। यहां कुल 25 FAQs में आपको इससे जुड़ी हर बड़ी-छोटी जानकारी मिलेगी।

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VB-G RAM G से जुड़े FAQs

1- विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 क्या है?

विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025, ग्रामीण रोजगार एवं विकास से संबंधित एक कानून है। इस कानून का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के अकुशल मजदूरी वाले रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान करके और उत्पादक ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण को बढ़ावा देकर ग्रामीण विकास को विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप ढालना है।

2- विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम कब लागू होगा?

विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) की गारंटी: वीबी-जी राम जी (विकसित भारत - जी राम जी) अधिनियम, 2025, केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने के बाद, 01/07/2026 से देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगा।

3- महात्मा गांधी एनआरईजीए को कब निरस्त किया जाएगा?

केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने के बाद, महात्मा गांधी एनआरईजीए योजना 01/07/2026 से निरस्त हो जाएगी।

4- क्या विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम को सभी राज्यों में एक साथ लागू किया जाएगा?

जी हां। केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने के बाद, विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम 01/07/2026 से पूरे देश में लागू होगा।

5- इस अधिनियम के तहत कितने दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है?

यह अधिनियम वैसे हर पात्र ग्रामीण परिवार को एक फाइनेंशियल ईयर में 125 दिनों के सैलरीड रोजगार की गारंटी देता है, जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं।

6- क्या राज्य सरकारों को इस अधिनियम के तहत योजनाएं बनाना अनिवार्य है?

जी हां। राज्य सरकारों को इस अधिनियम के लागू होने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप योजनाओं को अधिसूचित करना अनिवार्य है।

7- भंग होने के बाद, महात्मा गांधी नरेगा के तहत चल रहे कार्यों का क्या होगा?

महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत चल रहे काम, शुरू होने की डेट पर वीबी-जी राम जी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार जारी रह सकते हैं। इन कामों को सुचारू रूप से ट्रांसफर किया जाएगा और यह सुनिश्चित करते हुए इन्हें पूरा करने की प्राथमिकता दी जाएगी कि सार्वजनिक परिसंपत्तियां अधूरी न रह जाएं और सामुदायिक लाभ जारी रहें।

8- क्या विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम में परिवर्तन के दौरान महात्मा गांधी नरेगा के तहत रोजगार जारी रहेगा?

जी हां। महात्मा गांधी नरेगा के तहत रोजगार वीबी जी राम जी के शुरू होने तक निर्बाध रूप से जारी रहेगा।

9- शुरू होने से पहले निर्बाध रोजगार की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु क्या कदम उठाए गए हैं?

उभरती मांग के पैटर्न और जमीनी आवश्यकताओं के अनुरूप राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को पर्याप्त श्रम बजट उपलब्ध कराया गया है, जिससे निर्बाध रोजगार के मौके और समय पर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।

10- क्या बदलाव के पीरियड के दौरान नए कामों की शुरुआत की जा सकती है?

जी हां। जहां चल रहे कार्य रोजगार की मांग को पूरा करने की दृष्टि से अपर्याप्त होंगे, वहां विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम की अनुसूची-I के अनुरूप कामों के संग्रह में से नए कार्य शुरू किए जा सकते हैं।

11- क्या नए अधिनियम के तहत श्रमिकों को रोजगार की गारंटी मिलती रहेगी?

जी हां। प्रत्येक ऐसा ग्रामीण परिवार जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, उन्हें वैधानिक रोजगार की गारंटी मिलती रहेगी। यह गारंटी प्रति वित्तीय वर्ष में 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है।

12- क्या मौजूदा जॉब कार्ड/कर्मचारी वैध रहेंगे?

जी हां। जिन मौजूदा एमजीएनआरईजीए जॉब कार्ड/श्रमिकों के लिए ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वे विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के अनुसार नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक वैध बने रहेंगे।

13- इस अधिनियम के तहत कौन रोजगार पाने का पात्र है?

प्रत्येक ऐसा ग्रामीण परिवार जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, इस अधिनियम के तहत रोजगार पाने का पात्र होगा।

14- कोई परिवार ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड के लिए पंजीकरण कैसे कराएगा?

जिन ग्रामीण परिवारों के पास महात्मा गांधी नरेगा जॉब कार्ड नहीं है, वे अपने परिवार के किसी वयस्क सदस्य के जरिए संबंधित ग्राम पंचायत को परिवार के सदस्यों के नाम, आयु और पते की जानकारी जमा करके ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी करवाने के लिए पंजीकरण हेतु आवेदन कर सकते हैं।

15- कोई परिवार कैसे रोजगार प्राप्त कर सकता है?

ग्रामीण क्षेत्रों के वयस्क सदस्य ग्राम पंचायत के जरिए रोजगार की मांग कर सकते हैं। आवेदन मौखिक रूप से, फॉर्म 6 के जरिए लिखित रूप में या डिजिटल माध्यमों से ग्राम पंचायत, कार्यक्रम अधिकारी या किसी भी अधिकृत व्यक्ति को किया जा सकता है।

16- कितने दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराया जाना चाहिए?

आवेदन की तिथि से 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराया जाना चाहिए। 17- अगर 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो क्या होगा? ऐसे श्रमिकों को बेरोजगारी भत्ता प्राप्त करने का अधिकार होगा।

18- रोजगार उपलब्ध न कराए जाने की स्थिति में कितना बेरोजगारी भत्ता देय होगा?

अगर रोजगार की मांग के अनुसार निर्धारित अवधि के भीतर रोजगार प्रदान नहीं किया जाता है, तो राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष के पहले तीस दिनों के लिए अधिसूचित मजदूरी दर के एक-चौथाई से कम नहीं और शेष अवधि के लिए अधिसूचित मजदूरी दर के आधे से कम नहीं का बेरोजगारी भत्ता देय होगा।

19- क्या विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत बढ़ी हुई मजदूरी दरें दी जाएंगी?

जी हां। इस अधिनियम की धारा 10 के प्रावधानों के अनुसार बढ़ी हुई मजदूरी दरें दी जाएंगी। इस अधिनियम के तहत नई मजदूरी दरों की अधिसूचना जारी होने तक, महात्मा गांधी एनआरईजीए की मौजूदा मजदूरी दरें लागू रहेंगी।

20- मजदूरी का भुगतान कितने अंतराल पर किया जाएगा और कैसे किया जाएगा?

मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर या किसी भी स्थिति में हाजिरी सूची के बंद होने के बाद दो सप्ताह के भीतर किया जाएगा। श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान बैंकों या डाकघरों में उनके व्यक्तिगत खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, DBT) के जरिए किया जाता है।

21- मजदूरी के भुगतान में देरी होने की स्थिति में क्या होगा?

अगर हाजिरी सूची के बंद होने के पंद्रह दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान नहीं किया जाता है, तो मजदूरी चाहने वाले विलंब के लिए प्रति दिन बकाया मजदूरी के 0.05% की दर से मुआवजे के हकदार होंगे।

22- नए अधिनियम के तहत उपस्थिति कैसे दर्ज की जाएगी?

कार्यस्थलों पर उपस्थिति चेहरे की पहचान पर आधारित एक प्रणाली के माध्यम से दर्ज की जाएगी। हालांकि, सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, खराब या अनुपलब्ध नेटवर्क कनेक्टिविटी, तकनीकी समस्याएं, उपकरण संबंधी समस्याएं या अन्य असाधारण परिस्थितियों जैसे वास्तविक मामलों में अपवाद प्रबंधन प्रणाली भी उपलब्ध होगी।

23- क्या श्रमिकों को कार्यस्थल पर सुविधाएं मिलेंगी?

जी हां। कार्यस्थल पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। कार्यस्थल पर सुरक्षित पेयजल, बच्चों के लिए छाया और विश्राम के लिए स्थान और प्राथमिक चिकित्सा पेटी अवश्य होनी चाहिए।

24- क्या कृषि के चरम मौसमों के दौरान काम जारी रह सकता है?

बुवाई और कटाई जैसे कृषि के चरम मौसमों के दौरान पर्याप्त श्रम की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु, राज्य सरकारें कृषि के चरम मौसमों को कवर करने वाली एक अवधि को अधिसूचित करेंगी। इस अवधि के दौरान इस अधिनियम के तहत कोई कार्य नहीं किया जाएगा।

25- अगर कार्य पांच किलोमीटर से अधिक दूर हो, तो क्या होगा?

जहां तक संभव हो, आवेदक के गांव से 5 किलोमीटर के दायरे में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। अगर रोजगार इससे अधिक दूरी पर (लेकिन ब्लॉक के भीतर) उपलब्ध कराया जाता है, तो श्रमिकों को परिवहन और रहने-सहने के खर्चों के लिए मजदूरी दर का 10% अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा।

लेखकों के बारे में

Namita Shukla
Namita Shukla is a seasoned journalist with over 15 years of experience in Hindi media. She has worked with some of the most reputed news organizations, including Navbharat Times, Dainik Jagran, Aaj Tak, and Hindustan Times Hindi. Throughout her career, Namita has reported on a wide range of beats such as national affairs, sports, business, and entertainment, bringing clarity and depth to her reporting. In addition to her journalistic work, she is a certified fact-checker by both Google and Meta, underscoring her commitment to accuracy and ethical journalism in the digital age.

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