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  1. ELGS 5.0 के तहत SBI देगा ₹80,000 करोड़ तक का कर्ज, अगले 8-10 दिनों में पिक्चर हो जाएगी साफ

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ELGS 5.0 के तहत SBI देगा ₹80,000 करोड़ तक का कर्ज, अगले 8-10 दिनों में पिक्चर हो जाएगी साफ

Upstox

2 min read | अपडेटेड May 08, 2026, 14:39 IST

सारांश

इस योजना का उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित कारोबारों को अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल उपलब्ध कराना है। स्कीम के तहत एयरलाइंस सेक्टर के लिए अलग से 5,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया

ईसीएलजीएस 5.0 के तहत एसबीआई देगा 80,000 करोड़ रुपये तक का कर्जः चेयरमैन शेट्टी

पब्लिक सेक्टर का भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) 'आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (Emergency Credit Line Guarantee Scheme, ECLGS) 5.0' के तहत अपने ग्राहकों को 70,000-80,000 करोड़ रुपये तक का कर्ज उपलब्ध करा सकता है। बैंक के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने गुरुवार को यह जानकारी दी। शेट्टी ने कहा कि पात्र ग्राहकों की पहचान हो चुकी है और नए दिशानिर्देशों के अनुरूप यह ऋणसुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को ईसीएलजीएस 5.0 को मंजूरी दी थी, जिसके तहत कुल 2.55 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना का उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित कारोबारों को अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल उपलब्ध कराना है। स्कीम के तहत एयरलाइंस सेक्टर के लिए अलग से 5,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जबकि बचा फंड सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और अन्य पात्र उधारकर्ताओं के लिए उपलब्ध होगी।

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शेट्टी ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट का असर व्यापक है और विभिन्न सेक्टरों में इसके अप्रत्यक्ष प्रभाव भी देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने ईसीएलजीएस 5.0 को एक सक्रिय कदम बताते हुए कहा कि भले ही सभी इकाइयां इसका उपयोग न करें, लेकिन जरूरत पड़ने पर यह सुविधा उपलब्ध रहेगी। उन्होंने बताया कि इस स्कीम के एग्जिक्यूशन के लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मंजूरी और डिजिटल प्रक्रियाओं का एकीकरण जैसे मुद्दे अगले 8-10 दिनों में सुलझ जाने की उम्मीद है। इसके लिए 'जन समर्थ' पोर्टल के जरिए प्रक्रियाओं को लागू किया जा रहा है। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई का आकलन है कि बैंकिंग सिस्टम में 1.1 करोड़ से अधिक लाभार्थी इस योजना से संभावित रूप से लाभ उठा सकते हैं।

शेट्टी ने कोविड-19 के दौरान शुरू की गई इस योजना के पिछले चरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके तहत चूक की दर एमएसएमई सेक्टर की औसत चूक दर से कम रही है। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू ने कहा कि योजना का आकार बैंकों के मौजूदा ऋण जोखिम और प्रभावित क्षेत्रों की संभावित मांग को ध्यान में रखकर तय किया गया है। उन्होंने बताया कि नई योजना के तहत ऋण की अवधि चार साल से बढ़ाकर पांच साल कर दी गई है, जबकि एयरलाइंस के लिए इसे सात साल रखा गया है, क्योंकि इस सेक्टर का रिकवरी पीरियड अपेक्षाकृत लंबा होता है। नागराजू ने कहा कि सभी एमएसएमई इस योजना के तहत पात्र हैं, जबकि बिजली, दूरसंचार, चीनी और शैक्षणिक संस्थानों जैसे कुछ गैर-एमएसएमई क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है।

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